वृंदावन। देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं के आस्था के केंद्र,
पूज्य संत श्री प्रेमानंद जी महाराज एक बार फिर अपने पुराने आश्रम 'श्री हित राधा केलि कुंज' लौट आए हैं। इसके साथ ही पिछले कुछ महीनों से अनिश्चितकाल के लिए स्थगित की गई उनकी ऐतिहासिक सुबह की
पदयात्रा (दर्शन यात्रा) भी दोबारा शुरू हो गई है। 23 अक्टूबर 2026 की सुबह जब महाराज जी लंबे समय बाद गाड़ी से उतरकर पैदल ही अपने आश्रम की ओर बढ़े, तो वहां मौजूद हजारों भक्तों की आंखें खुशी से छलक उठीं और पूरा वातावरण 'राधे-राधे' के जयकारों से गूंज उठा।
आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर महाराज जी की पदयात्रा क्यों रुकी थी, उन्हें केलि कुंज आश्रम क्यों छोड़ना पड़ा था और हाल ही में आश्रम से जुड़े किस विवाद ने सोशल मीडिया पर तूल पकड़ा था।
1. पदयात्रा रुकने का मुख्य कारण: बिगड़ता स्वास्थ्य और डायलिसिस
कई लोगों को ऐसा भ्रम था कि महाराज जी ने अपनी यात्रा किसी विवाद के डर से रोकी थी, लेकिन मुख्य वजह उनका स्वास्थ्य और बढ़ती भीड़ का प्रबंधन थी।
- दैनिक डायलिसिस की आवश्यकता: महाराज जी पिछले लगभग दो दशकों से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। पहले जहां उनका हफ्ते में 4-5 दिन डायलिसिस होता था, वहीं हाल के समय में डॉक्टरों ने इसे रोजाना (डेली डायलिसिस) करना अनिवार्य कर दिया है।
- यमुना विहार कुंज में स्थानांतरण: इसी स्वास्थ्य कारणों और आराम की सख्त जरूरत को देखते हुए महाराज जी केलि कुंज आश्रम से दूर, शांत वातावरण में स्थित यमुना विहार कुंज (बेलवन) आश्रम में शिफ्ट हो गए थे।
2. स्थानीय निवासियों की शिकायतें और सुरक्षा कारण
महाराज जी की सुबह 2 से 3 बजे के बीच होने वाली पदयात्रा में दर्शन के लिए देश-विदेश से हजारों भक्त सड़कों पर कतार लगाकर खड़े हो जाते थे।
- ध्वनि प्रदूषण और अव्यवस्था: यात्रा के दौरान बजने वाले लाउड भजन, आतिशबाजी और भारी भीड़ के कारण परिक्रमा मार्ग के पास (विशेष रूप से एनआरआई ग्रीन कॉलोनी) रहने वाले स्थानीय निवासियों, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों की नींद में व्यवधान आ रहा था।
- महाराज जी का संवेदनशील निर्णय: जब यह बात महाराज जी तक पहुंची, तो उन्होंने समाज और पड़ोसियों के सुख-चैन को प्राथमिकता देते हुए अपनी प्रसिद्ध रात्रि पदयात्रा को तुरंत प्रभाव से रोकने का फैसला किया था।
3. हालिया विवाद: शिष्य की रहस्यमयी मौत और अफवाहों का बजार
केलि कुंज आश्रम सुर्खियों में तब आया जब सितंबर 2026 के आखिरी हफ्ते में आश्रम से जुड़े उनके एक प्रमुख शिष्य 'रसिक दुलारी शरण' की आश्रम परिसर में ऊंचाई से गिरने के कारण रहस्यमयी मौत हो गई।
- सोशल मीडिया पर अफवाहें: इस दुखद दुर्घटना के बाद इंटरनेट और सोशल मीडिया पर आश्रम की आंतरिक व्यवस्था, सेवादारों और जमीन-जायदाद से जुड़े तरह-तरह के मनगढ़ंत दावे और आरोप-प्रत्यारोप लगाए जाने लगे。
- आश्रम प्रशासन का रुख: इन सभी विवादों और भक्तों की भावनाओं के आहत होने से महाराज जी भी काफी व्यथित हुए। हालांकि, आश्रम ने स्पष्ट किया है कि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और भक्तों को किसी भी प्रकार की भ्रामक खबरों या डीपफेक/एआई जनित अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।
अब आगे क्या? आश्रम की नई व्यवस्था और नियम
केलि कुंज में महाराज जी की वापसी के बाद भी अब चीजें पहले जैसी नहीं रही हैं। सुरक्षा, स्वास्थ्य और विवादों से बचने के लिए आश्रम ने सख्त कदम उठाए हैं:
- दीक्षा पर पूर्ण रोक: आश्रम ने फिलहाल किसी भी नए साधक या भक्त को दीक्षा देना पूरी तरह से बंद कर दिया है।
- सीमित दर्शन व्यवस्था: महाराज जी से व्यक्तिगत मुलाकात (एकांतिक वार्ता) और व्यक्तिगत दर्शन को अभी अनिश्चितकाल के लिए रोक कर रखा गया है। केवल ठाकुर श्री राधा मोहन जी के दर्शन के लिए ही सुबह और शाम को सीमित समय के लिए केलि कुंज के कपाट खुलते हैं।
तमाम बाहरी विवादों और गंभीर शारीरिक कष्टों के बावजूद, पूज्य प्रेमानंद जी महाराज का केवल एक ही संदेश है—"मौन रहो, एकांत में रहो और केवल राधा नाम का सुमिरन करो"। उनका केलि कुंज की धरती पर वापस कदम रखना यह साबित करता है कि संतों का जीवन केवल लोक-कल्याण के लिए होता है, वे किसी विवाद या परिस्थितियों से विचलित नहीं होते।