देश में इन दिनों PM नरेंद्र मोदी की सुरक्षा को लेकर एक नई बहस शुरू हो चुकी है। हाल ही में आई रिपोर्ट और सोशल मीडिया पोस्ट में साफ दिख रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सिक्योरिटी वाहनों की संख्या घटा दी है। हालांकि इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उद्देश्य ईंधन की बचत बताया जा रहा है। लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञ इसे गंभीर खतरे के रूप में देख रहे हैं।
हाल ही में भारत की खुफिया एजेंसी के पूर्व प्रमुख Samant Kumar Goel ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस फैसले पर खुलकर चिंता जताई है। मीडिया रिपोर्ट और सोशल मीडिया चर्चा के अनुसार PM नरेंद्र मोदी की सुरक्षा के काफिले में पहले 12 से 15 गाड़ियां चलती थी। परंतु उसे हटाकर अब केवल 2 वाहनों तक सीमित कर दिया गया है। परंतु यह सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए काफी हानिकारक हो सकता है।
Samant Kumar Goel कौन है?
इस पूरे मुद्दे में सबसे अहम नाम Samant Kumar Goel का सामने आ रहा है। वह भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग के प्रमुख रह चुके हैं। उन्होंने 2019 से 2023 तक भारत के लिए इस कार्य पद को संभाला है। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई संवेदनशील राष्ट्रीय अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसलिए उनके द्वारा दी गई इस चेतावनी को गंभीरता से लिया जाना जरूरी है।
PM नरेंद्र मोदी की सुरक्षा पर क्यों जताई जा रही है चिंता?
सामंत कुमार गोयल का साफ कहना है कि प्रधानमंत्री देश के सबसे हाई रिस्क व्यक्तियों में से एक होते हैं। उनकी सुरक्षा कोई व्यक्तिगत सुविधा नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा होता है। देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिलहाल हालात काफी अस्थिर बने हुए हैं। ऐसे में PM नरेंद्र मोदी की सुरक्षा को कम करना जोखिम भरा हो सकता है।
बड़ा काफिला आमतौर पर इस बात को छिपाने में मदद करता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किस गाड़ी में है। परंतु कम वाहन होने से यह सुरक्षा परत कमजोरी बन जाती है और हमलावरों के लिए लक्ष्य करना आसान हो जाता है।
क्या सच में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खतरा है?
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार भारत का इतिहास इस बात का गवाह है की प्रभावशाली नेताओं पर लगातार हमले हो चुके हैं। इसलिए PM नरेंद्र मोदी की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की ढील नहीं दी जा सकती। वहीं भारत के रिश्ते पाकिस्तान और कुछ देशों के साथ लंबे समय से खराब चल रहे हैं। ऐसे में कोई भी जिहादी या आतंकवादी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कभी भी हमला कर सकता है। इसीलिए भारत के पूर्व सुरक्षा चीफ ने आवाहन किया है कि PM नरेंद्र मोदी की सुरक्षा को पहले की तरह z प्लस कर दिया जाए।
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहां लोग इसे PM नरेंद्र मोदी की सुरक्षा को कम करना मोदी जी की तरफ से एक प्रेरणादायक कदम मान रहे हैं। वहीं कई यूजर्स और विश्लेषकों का मानना है कि उद्देश्य सेट करना बेहद अच्छी बात है, परंतु PM नरेंद्र मोदी की सुरक्षा से समझौता नहीं करना चाहिए। कई सोशल मीडिया अकाउंट ने इसी भावना को साझा भी किया है।
कुल मिलाकर PM नरेन्द्र मोदी की सुरक्षा में किसी प्रकार की कटौती अब केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि अब राष्ट्रीय बहस बन चुका है। ईंधन की बचत का संदेश देना ठीक है, परंतु सर्वोच्च नेतृत्व की सुरक्षा का सवाल भी महत्वपूर्ण है।
ऐसे में पूर्व प्रमुख Samant Kumar Goel की चेतावनी ने इस बहस को और भी गंभीर बना दिया है। अब देखना यह होगा कि इस मुद्दे पर सरकार क्या रुख अपनाती है? क्या सुरक्षा व्यवस्था को फिर से मजबूत किया जाता है या यही मॉडल जारी रहेगा?













