दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के बाद घायल हुए दिल्ली पुलिसकर्मियों के परिवारों ने पहली बार खुलकर अपनी पीड़ा साझा की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस अधिकारियों के परिजनों ने बताया कि ड्यूटी के दौरान उनके परिवार के सदस्यों पर हमला हुआ, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे, लेकिन हिंसा का शिकार हो गए।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के बाद घायल हुए दिल्ली पुलिसकर्मियों के परिवारों ने पहली बार खुलकर अपनी पीड़ा साझा की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस अधिकारियों के परिजनों ने बताया कि ड्यूटी के दौरान उनके परिवार के सदस्यों पर हमला हुआ, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे, लेकिन हिंसा का शिकार हो गए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक दिल्ली पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) की बेटी ने आरोप लगाया कि उनके पिता पर प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने हमला किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता पुलिस में आने से पहले भारतीय नौसेना में मरीन कमांडो के रूप में 15 वर्षों तक देश की सेवा कर चुके हैं। उनके अनुसार, प्रदर्शन के दौरान उनके पिता मुख्य बैरिकेड पर तैनात थे और लगातार कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश कर रहे थे। बेटी ने दावा किया कि उनके पिता पहले ही घर आकर बताते थे कि प्रदर्शन में केवल छात्र ही नहीं, बल्कि कुछ असामाजिक तत्व भी शामिल हो चुके हैं, जिससे स्थिति लगातार तनावपूर्ण होती जा रही थी।
सब-इंस्पेक्टर की बेटी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने उनके पिता को घेर लिया और उनके साथ मारपीट की। उनके अनुसार, घटना के बाद उनके पिता को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां वे करीब चार घंटे तक बेहोश रहे। रात में जब उनके साथी उन्हें घर लेकर आए तो उनकी वर्दी खून से सनी हुई थी। उन्होंने कहा कि अपने पिता को उस हालत में देखना परिवार के लिए बेहद दर्दनाक अनुभव था।
घायल पुलिस अधिकारी की बेटी ने यह भी कहा कि घटना के बाद सोशल मीडिया पर उनके पिता को गलत तरीके से निशाना बनाया गया। उनका कहना था कि जब उन्होंने इंटरनेट पर प्रतिक्रियाएं देखीं तो कई लोग उनके पिता को अपराधी बता रहे थे। इसके बाद उन्हें यह भी पता चला कि कुछ लोगों ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कानूनी शिकायतें दर्ज कराई हैं। उन्होंने कहा कि इसी वजह से उन्होंने भी अन्य पुलिस परिवारों के साथ मिलकर न्याय की मांग करने का फैसला किया।
हिंसा में घायल हुए एक सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) की पत्नी ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने परिवार का अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई की रात उनके पति घायल अवस्था में घर लौटे, जिसे देखकर वह और उनकी दो साल की बेटी बेहद डर गए। उनके अनुसार, वह रात उनके परिवार के लिए सबसे कठिन और भावनात्मक रूप से बेहद दर्दनाक रही।
दिल्ली पुलिस के एक सहायक उप-निरीक्षक (ASI) की पत्नी सीमा ने बताया कि उनके पति प्रदर्शन के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने की ड्यूटी पर तैनात थे। उन्होंने कहा कि सुबह उनके पति ने फोन पर बताया था कि जंतर-मंतर पर भारी भीड़ जमा हो रही है। लेकिन शाम तक उन्हें जानकारी मिली कि उनके पति घायल होकर अस्पताल में भर्ती हैं। सीमा ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने पुलिसकर्मियों पर पत्थर, गमले और अन्य वस्तुओं से हमला किया। उन्होंने बताया कि उनके पति का हेलमेट पूरी तरह टूट गया था। उनका मानना है कि यदि हेलमेट न होता तो चोट और भी गंभीर हो सकती थी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद पुलिस परिवारों ने मांग की कि ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों को जिन कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, उस पर संसद में गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उनका कहना था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान पुलिसकर्मी लगातार जोखिम उठाते हैं, लेकिन उनके संघर्ष और चुनौतियों पर अक्सर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। जंतर-मंतर हिंसा के बाद घायल हुए दिल्ली पुलिसकर्मियों के परिवारों ने अपनी आपबीती साझा करते हुए सुरक्षा, सम्मान और न्याय की मांग की है। वहीं, इन घटनाओं से जुड़े आरोपों की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है। मामले की अंतिम सच्चाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।