बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन लगभग 19 साल बाद कोलकाता में सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने जा रही हैं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कोलकाता लौटना उनके लिए अपने ही देश लौटने जैसा एहसास है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि उनकी यह यात्रा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और असहमति की आवाज़ों के सम्मान के महत्व को फिर से रेखांकित करेगी।