जो अगणित लघु दीप हमारे, तूफ़ानों में एक किनारे। जल-जलकर बुझ गए किसी दिन-माँगा नहीं स्नेह मुँह खोल! कलम, आज उनकी जय बोल! पीकर जिनकी लाल शिखाएँ। उगल रही लपट दिशाएँ, जिनके सिंहनाद से सहमी-धरती रही अभी तक डोल! कलम, आज उनकी जय बोल! Chhatrapati Shivaji: इन प...