मध्यप्रदेश में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तेल कंपनियों ने 25 मई को एक बार फिर ईंधन के दामों में बढ़ोतरी कर दी। इस बार पेट्रोल पर ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल पर ₹2.71 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। नई कीमतों...

मध्यप्रदेश में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तेल कंपनियों ने 25 मई को एक बार फिर ईंधन के दामों में बढ़ोतरी कर दी। इस बार पेट्रोल पर ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल पर ₹2.71 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। नई कीमतों के बाद प्रदेश के कई शहरों में पेट्रोल ₹115 प्रति लीटर के करीब पहुंच गया है, जबकि डीजल ₹100 के पार निकल चुका है।
| शहर | पेट्रोल | डीजल |
|---|---|---|
| Ujjain | ₹115.03 | ₹100.11 |
| Indore | ₹114.54 | ₹99.57 |
| Jabalpur | बढ़ोतरी दर्ज | बढ़ोतरी दर्ज |
| Gwalior | बढ़ोतरी दर्ज | बढ़ोतरी दर्ज |
मई महीने में यह चौथी बार है जब तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ाए हैं।
15 मई से अब तक दोनों ईंधन करीब ₹8 प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं।
ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और पंपिंग सेट चलाने में ज्यादा खर्च आएगा। इससे खेती की लागत बढ़ेगी और आगे चलकर अनाज व खाद्य वस्तुओं के दाम भी प्रभावित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी इसकी बड़ी वजह है। ईरान-अमेरिका तनाव के बाद क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। पहले जहां कच्चा तेल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल था, वहीं अब यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। तेल कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण कीमतों में बढ़ोतरी करना जरूरी हो गया था।
पूर्व मुख्यमंत्री Kamal Nath ने सोशल मीडिया पर सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि सरकार महंगाई नियंत्रित करने में विफल रही है और पूरा बोझ आम जनता पर डाला जा रहा है। कमलनाथ ने आरोप लगाया कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम कम थे, तब लोगों को राहत नहीं दी गई, लेकिन अब लगातार कीमतें बढ़ाई जा रही हैं।
मध्यप्रदेश में पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। आने वाले दिनों में ट्रांसपोर्ट, खेती और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी चीजों के दाम और बढ़ सकते हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो लोगों को फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद कम नजर आ रही है।
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