सांप के काटने पर न करवाएं झाड़ फूंक, अस्पताल जाकर करवाएं सही इलाज 

बरसात के दिनों में सांप के काटने के केस अत्याधिक सामने आते हैं। ग्रामीण और जंगलों से सटे इलाकों में यह घटनाएं और ज्यादा होती हैं। वहीं भारत में आज भी कई लोग सांप के काटने पर तुरंत अस्पताल न जाकर झाड़ फूंक और तंत्र-मंत्र से इलाज करवाते हैं। ऐसे में पीड़ित की हालत ज्यादा खराब हो जाती है और अक्सर ऐसे व्यक्ति को इसकी कीमत अपनी जान से हाथ धोकर गंवानी पड़ती है। 

सांप के काटने पर न करवाएं झाड़ फूंक, अस्पताल जाकर करवाएं सही इलाज 
बरसात के दिनों में सांप के काटने के केस अत्याधिक सामने आते हैं। ग्रामीण और जंगलों से सटे इलाकों में यह घटनाएं और ज्यादा होती हैं। वहीं भारत में आज भी कई लोग सांप के काटने पर तुरंत अस्पताल न जाकर झाड़ फूंक और तंत्र-मंत्र से इलाज करवाते हैं। ऐसे में पीड़ित की हालत ज्यादा खराब हो जाती है और अक्सर ऐसे व्यक्ति को इसकी कीमत अपनी जान से हाथ धोकर गंवानी पड़ती है। 

भारत में स्नैक मैन (Snake Man) के नाम से मशहूर सर्प वैज्ञानिक रोमुलस व्हिटकर (Romulus Whitaker) की पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ साइंस (Public Library of Science) नाम के जर्नल में 2011 में एक प्रकाशित हुई एक रिपाेर्ट के मुताबिक भारत में हर साल जून से सितंबर के बीच 45900 से 50900 लोगों की मौत सांप के काटने से हो जाती है। इन मौतों में 97 फीसदी मौतें भारत के ग्रामीण इलाकों में होती हैं। 

मरने वालों में 59 फीसद पुरुष : 
ऐसा देखा गया है कि सर्पदंश की घटना के बाद जान गंवाने वालों में 59 फीसदी पुरुष होते हैं। वहीं महिलाएं 41 फीसदी हैं। सांप के काटने से होने वाली मौतों में यूपी (8700) नंबर वन है। यूपी के बाद आंध्र प्रदेश (5200) और बिहार (4500) का नंबर आता है। वहीं 2020 में प्रकाशित हुई एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 20 सालों में भारत में 12 लाख मौतें सांपों के काटने से हुई हैं। 

इनमें से 50 प्रतिशत मौतें रसेल वाइपर, करैत और कोबरा प्रजाति के सांपों के काटने से हुई हैं। इसके अलावा 12 अन्य प्रजातियां भी हैं, जिनके काटने से व्यक्ति की मौत हो जाती है। इन मौतों में से 50 प्रतिशत मानसून यानि जून से सितंबर के दौरान हुई हैं। सबसे ज्यादा मौतें पैरों में काटने से होती हैं।

सांप के काटने के आधे घंटे बाद दिखने लगते हैं लक्षण : 
सांप के काटने को अनदेखा नहीं करना चाहिए, बल्कि मरीज को किसी नजदीकी अस्पताल में ले जाना चाहिए। सांप के दांतों के नीचे विष की थैली होती है। काटने पर विष की थैली से जहर सीधे शरीर में खून के माध्यम से फैल जाता है। सामान्तयः जहरीले सांपों के काटने पर दांतों के दो निशान अलग ही दिखाई देते हैं। गैर विषैले सांप के काटने पर दो से ज्यादा निशान हो सकते हैं।

सांप के काटने पर करीब-करीब 95 प्रतिशत मामलों में पहला लक्षण नींद का आना है, इसके साथ ही निगलने या सांस लेने में तकलीफ होती है, आमतौर पर सांप काटने पर आधे घंटे बाद लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

 
सांप के काटने पर यह ना करें :  
1. सांप के काटने के बाद काटे जाने वाली जगह को रस्सी से कसकर नहीं बांधना चाहिए। 
2. काटे जाने वाली जगह को ब्लेड से नहीं काटना चाहिए।
3. पारम्परिक तरीकों जड़ी बूटियों का इस्तेमाल न करें।
4. मुंह से खून न चूसें।
5. ओझा और तंत्र मंत्र वालों के पास न जाएं।
6. सांप काटे व्यक्ति के शव को नदी में प्रवाहित न करें।
7. अन्धविश्वास में न पड़े।

 
काटने के बाद तुरंत करें यह काम : 
1. सांप काटे व्यक्ति को दिलासा दें और उसे शांत रहने को कहें।
2. संभव हो तो सांप का फोटो खींच लें।
3. गीले कपडे़ से डंक की जगह की चमड़ी को साफ करें। जिससे वहां पर लगा विष निकल जाये।
4. सांप काटे व्यक्ति को करवट सुलायें, क्योंकि कई बार उल्टी भी होने लगती है। इससे उल्टी श्वसनतंत्र में नहीं जाएगी।
5. जहां पर सांप ने काटा है उस स्थान पर हल्के कपडे़ से बांध दें।



ऐसे करें उपचार : 
1. सांप काटे व्यक्ति को तत्काल नजदीकि अस्पताल ले जाने की व्यवस्था करें।
2. सांप के जहर का असर खत्म करने के लिए अस्पताल में एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन लगाया जाता है। सरकारी अस्पतालों में यह इलाज बिल्कुल फ्री होता है।
3. डाक्टर द्वारा दी गई सलाह के अनुसार उचित उपचार करायें।

 
सांप के काटने से इस तरह बचें :
1. अंधेरे में न जायें।
2. बिलों में हाथ न डालें।
3. झाड़ियों में न जायें।
4. पानी भरे गड्ढे में न जायें।
5. खेतों और जंगलों में बड़े बूट्स पहनकर चलें।     

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