हेपेटाइटिस से दुनिया में हर 30 सेकेंड में होती है एक व्यक्ति की मौत, जानें इस वायरस से बचने के उपाय 

पूरी दुनिया में लगभग 42 करोड़ लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। इनमें 35 करोड़ लाेग हेपेटाइटिस बी से और 7.1 करोड़ लोग हेपेटाइटिस सी से जूझ रहे हैं। जिनमें से 1 मिलियन लोग हर साल इस बीमारी की जानकारी न होने के कारण मर जाते हैं। भारत में लगभग 4 करोड़ लोग हेपेटाइटिस बी और 1.25 करोड़ लोग हेपेटाइटिस सी से पीड़ित हैं।

हेपेटाइटिस से दुनिया में हर 30 सेकेंड में होती है एक व्यक्ति की मौत, जानें इस वायरस से बचने के उपाय 

पूरी दुनिया में 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस के रूप में मनाया जाता है, क्याेंकि इसी दिन हेपेटाइटिस बी जैसी जानलेवा बीमारी की काट खोजने वाले वैज्ञानिक बारूक सैमुअल ब्लमबर्ग का जन्म हुआ था। इसीलिए डब्ल्यूएचओ ने इस दिन को विश्व हेपेटाइटिस डे घोषित किया हुआ है।

हेपेटाइटिस को मुख्यत: ए, बी, सी, डी और ई श्रेणी में रखा गया है। इनमें से ए और ई दूषित खाना और पानी से फैलती है। जबकि बी, सी और डी संक्रमित खून या निडिल का प्रयोग करने से फैलती है। हेपेटाइटिस बी और सी आगे चलकर पीलिया, सिरोसिस और लिवर कैंसर का कारण हो सकती है।

42 करोड़ लोग जूझ रहे हैं इस बीमारी से : 
यदि आंकड़ों की मानें तो पूरी दुनिया में लगभग 42 करोड़ लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। इनमें 35 करोड़ लाेग हेपेटाइटिस बी से और 7.1 करोड़ लोग हेपेटाइटिस सी से जूझ रहे हैं। जिनमें से 1 मिलियन लोग हर साल इस बीमारी की जानकारी न होने के कारण मर जाते हैं। भारत में लगभग 4 करोड़ लोग हेपेटाइटिस बी और 1.25 करोड़ लोग हेपेटाइटिस सी से पीड़ित हैं।

डब्ल्यूएचओ ने रखा 2030 तक हेपेटाइटिस उन्मूलन का लक्ष्य :
डब्ल्यूएचओ ने 2030 तक हेपेटाइटिस उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। इसलिए डब्ल्यूएचओ ने इस बार हेपेटाइटिस दिवस की थीम हेपेटाइटिस कान्ट वेट रखी है। यदि आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो हेपेटाइटिस से मरने वाले लोगों में सबसे ज्यादा वो लोग होते हैं। जो शुरुआत में ही हेपेटाइटिस के लक्षणों को नजरअंदाज करते हैं या बीमारी के दौरान इलाज को अधूरा छोड़ देते हैं।

समय पर करवाएं इलाज : 
हेपेटाइटिस हो जाने पर इसका इलाज करवाने के लिए इंतजार नहीं करना चाहिए। बल्कि इस बीमारी का समय पर पूरा इलाज करवाना चाहिए। यदि इसका उचित उपचार किए बिना इसे बीच में ही छोड़ दिया जाए तो आगे चलकर ये लीवर सिरोसिस या ऐसी ही अन्य बीमारियों को पैदा कर सकती है। साथ ही इसके कारण लीवर कैंसर या लीवर फैल हो जाना जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। 

जो लोग हेपेटाइटिस बी या सी से पीड़ित होते हैं। उनमें से ज्यादातर को लीवर डेमेज हो जाने के बाद भी इस बीमारी के बारे में पता नहीं चलता है।

हेपेटाइटिस होने के मुख्य कारण : 
- हैपेटाइटिस बी और सी संक्रमित रक्त से फैलता है। 
- संक्रमित इंजेक्शन और ऑपरेशन के समय संक्रमित उपकरणों से भी यह फैलता है। 
- संक्रमित व्यक्ति से यौन संबंध बनाने के दौरान फैल सकता है। 
- टैटू बनवाते समय या एक्वा पंक्चर की संक्रमित सुई से फैल सकता है।
- हीमोडायलिसिस के दौरान संक्रमित उपकरणों से भी यह फैल सकता है। 
- शेविंग के दौरान संक्रमित ब्लेड या उस्तरे को साफ न कर पाने से भी यह फैल सकता है। 
- गर्भवती मां से उसके शिशु को भी हेपेटाइटिस बी या सी होने की संभावना रहती है। 

कैसे नहीं फैलता है हेपेटाइटिस : 
- हैपेटाइटिस बी और सी हाथ पकड़ने, साथ बैठने, गले मिलने और चुम्बन से नहीं फैलता है। 
- हैपेटाइटिस बी और सी साथ खाना खाने से नहीं फैलता।
- हैपेटाइटिस बी और सी खाने के बर्तन साझा करने से नहीं फैलता।
- साथ ही खांसने और छींकने से भी हैपेटाइटिस बी और सी नहीं फैलता।

रोकथाम :
- हेपेटाइटिस बी की रोकथाम के लिए टीका उपलब्ध है। इससे परिवार व अपनी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
- हेपेटाइटिस बी हो जाने के बाद दवाओं के सहारे इसे कंट्रोल किया जा सकता है। 
- हेपेटाइटिस सी को दवाओं से पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है।
- संक्रमित गर्भवती मां को हेपेटाइटिस बी का टीका लगाकर इसे बच्चे में पहुंचने से रोका जा सकता है। 

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