मध्य प्रदेश में दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। प्रदेश की पहली अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला भोपाल में स्थापित की जा रही है, जिसका अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। यह प्रयोगशाल...

मध्य प्रदेश में दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। प्रदेश की पहली अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला भोपाल में स्थापित की जा रही है, जिसका अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। यह प्रयोगशाला सहकारी क्षेत्र में अपनी तरह की पहली राज्य स्तरीय लैब होगी। यह परियोजना केंद्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग की नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट (NPDD) योजना के तहत स्वीकृत की गई है। प्रयोगशाला को मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन, भोपाल के परिसर में स्थापित किया जा रहा है।
इस आधुनिक प्रयोगशाला की सबसे खास बात यह है कि अब आम उपभोक्ता भी अपने घर में इस्तेमाल होने वाले दूध और दुग्ध उत्पादों की जांच करा सकेंगे। अगर किसी को दूध, दही, पनीर, घी या अन्य उत्पादों में मिलावट की आशंका होगी, तो उन्हें अब अलग-अलग जगह भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके अलावा, डेयरी यूनिट्स, सहकारी संस्थाएं और खाद्य उत्पादक कंपनियां भी यहां अपने उत्पादों की वैज्ञानिक जांच करवा सकेंगी।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित, शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण दूध व दुग्ध उत्पाद उचित कीमत पर उपलब्ध कराना है। साथ ही, खाद्य सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना भी इसका अहम लक्ष्य है। अब तक प्रदेश में दूध और दुग्ध उत्पादों की वैज्ञानिक जांच एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी। इसी कमी को दूर करने के लिए इस अत्याधुनिक प्रयोगशाला की स्थापना की जा रही है।
यह राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला केंद्र सरकार के मार्गदर्शन और वित्तीय सहयोग से स्थापित की जा रही है। इसे NABL (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज) और FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) से मान्यता प्राप्त होगी। इसका मतलब यह है कि यहां से जारी की जाने वाली जांच रिपोर्ट कानूनी और वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह मान्य होंगी।
प्रयोगशाला के निर्माण और उपकरणों के लिए भारत सरकार द्वारा 12 करोड़ 40 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है। परियोजना के तहत 7 अत्याधुनिक मशीनों की खरीदी पूरी हो चुकी है, जबकि बाकी मशीनों, केमिकल्स और ग्लासवेयर की खरीद प्रक्रिया जारी है। सभी तैयारियां पूरी होते ही जल्द ही दूध और दुग्ध उत्पादों की जांच का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
इस राज्य स्तरीय केन्द्रीय प्रयोगशाला में दूध और दुग्ध पदार्थों की 100 से अधिक वैज्ञानिक मानकों पर जांच की जाएगी। इनमें प्रमुख रूप से —
पेस्टिसाइड्स
एंटीबायोटिक्स
हेवी मेटल्स
अफ्लाटॉक्सिन
वसा की शुद्धता
प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा
यूरिया, आयोडीन, माल्टोज
शुगर, नमक और अन्य सभी प्रकार की मिलावट शामिल होंगी।
इस प्रयोगशाला के शुरू होने से प्रदेश में दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। मिलावट पर प्रभावी नियंत्रण होगा, उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ेगी और इसका सीधा असर जनस्वास्थ्य पर सकारात्मक रूप से पड़ेगा। साथ ही, प्रदेश का डेयरी सेक्टर और सहकारी संस्थाएं भी गुणवत्ता के नए और ऊंचे मानक स्थापित कर सकेंगी, जिससे किसानों और दुग्ध उत्पादकों को भी लाभ मिलेगा।
भोपाल में बनने वाली यह अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला मध्य प्रदेश के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी। इससे न सिर्फ आम लोगों को शुद्ध और सुरक्षित दूध मिलेगा, बल्कि डेयरी उद्योग में पारदर्शिता, गुणवत्ता और भरोसा भी बढ़ेगा। कुल मिलाकर, यह पहल उपभोक्ता स्वास्थ्य, किसानों की आय और प्रदेश की डेयरी व्यवस्था तीनों के लिए बेहद अहम साबित होगी।
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