थायरॉइड की सौम्य गांठों के इलाज में नई DAMA तकनीक से उम्मीद जगी है। जानें यह तकनीक क्या है, कैसे काम करती है और इसके संभावित फायदे क्या हैं।

थायरॉइड की समस्या आज कई लोगों में देखने को मिलती है। कुछ मरीजों में थायरॉइड की गांठ बन जाती है, जबकि कुछ लोगों में थायरॉइड ग्रंथि जरूरत से कम या ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है। कई मामलों में इलाज के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। सर्जरी के बाद कुछ मरीजों को लंबे समय तक थायरॉइड हार्मोन की दवा लेनी पड़ती है।
अब लखनऊ के संजय गांधी पीजीआई में विकसित की गई एक नई तकनीक ने ऐसे मरीजों के लिए उम्मीद जगाई है। इसे डायरेक्ट एक्सेस माइक्रोवेव एब्लेशन यानी DAMA तकनीक बताया गया है। शुरुआती अध्ययन में इसका इस्तेमाल दोनों तरफ सौम्य थायरॉइड गांठ वाले कुछ मरीजों में किया गया है।
DAMA एक हाइब्रिड तकनीक है, जिसमें जरूरत के अनुसार थायरॉइड की एक तरफ की गांठ को सर्जरी से हटाया जाता है, जबकि दूसरी तरफ मौजूद सौम्य गांठ का इलाज माइक्रोवेव एब्लेशन से किया जाता है।
इसका मुख्य उद्देश्य थायरॉइड के स्वस्थ हिस्से को बचाना है। इससे शरीर में थायरॉइड की प्राकृतिक कार्यक्षमता बनी रहने की संभावना रहती है।
अध्ययन में अब तक सात चयनित मरीजों पर इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सभी प्रक्रियाएं तकनीकी और चिकित्सकीय रूप से सफल रहीं और किसी मरीज में बड़ी जटिलता सामने नहीं आई।
जब किसी मरीज का पूरा थायरॉइड निकाल दिया जाता है, तो शरीर में थायरॉइड हार्मोन बनना बहुत कम या बंद हो सकता है। ऐसे में हार्मोन रिप्लेसमेंट दवा की जरूरत पड़ सकती है।
इसके अलावा थायरॉइड के पास मौजूद पैराथायरॉइड ग्रंथियां भी प्रभावित हो सकती हैं। इससे कुछ मरीजों में कैल्शियम का स्तर कम हो सकता है और उन्हें कैल्शियम की दवा की जरूरत पड़ सकती है।
यही वजह है कि ऐसी तकनीक पर काम किया जा रहा है जिसमें बीमारी वाली गांठ का इलाज हो और स्वस्थ थायरॉइड टिश्यू को ज्यादा से ज्यादा सुरक्षित रखा जा सके।
DAMA तकनीक में थायरॉइड के उस हिस्से तक सीधे पहुंच बनाई जाती है, जहां इलाज की जरूरत होती है। बड़ी या सर्जरी योग्य गांठ को सर्जरी से हटाया जा सकता है, जबकि दूसरी ओर मौजूद सौम्य गांठ को माइक्रोवेव एब्लेशन की मदद से नष्ट किया जाता है।
माइक्रोवेव एब्लेशन में विशेष प्रोब के जरिए गांठ वाले टिश्यू पर ऊर्जा पहुंचाई जाती है। इसका उद्देश्य प्रभावित टिश्यू को नष्ट करना होता है।
सीधी पहुंच मिलने की वजह से डॉक्टर माइक्रोवेव प्रोब को ज्यादा सटीक जगह पर लगाने की कोशिश कर सकते हैं। इससे आवाज की नस, श्वासनली, भोजन की नली और प्रमुख रक्त वाहिकाओं जैसी आसपास की संरचनाओं को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।
इस तकनीक के शुरुआती परिणाम उत्साहजनक बताए गए हैं। सात चयनित मरीजों में प्रक्रिया सफल रही और किसी में बड़ी जटिलता सामने नहीं आई।
उपचार के बाद मरीजों की थायरॉइड कार्यक्षमता सामान्य रही और इलाज की गई गांठों के आकार में शुरुआती कमी भी देखी गई।
हालांकि, यह बात समझना जरूरी है कि अभी यह शुरुआती स्तर का परिणाम है। लंबे समय तक यह तकनीक कितनी प्रभावी और सुरक्षित रहती है, इसे जानने के लिए मरीजों की नियमित निगरानी और आगे के अध्ययन जरूरी हैं।
DAMA तकनीक का सबसे बड़ा उद्देश्य थायरॉइड के स्वस्थ हिस्से को बचाना है। इसके कुछ संभावित फायदे इस प्रकार हैं:
नहीं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह तकनीक खास तौर पर उन मरीजों के लिए विकसित की गई है, जिनके थायरॉइड के दोनों हिस्सों में सौम्य गांठें हैं।
हर मरीज की स्थिति अलग होती है। गांठ का आकार, उसकी प्रकृति, थायरॉइड की कार्यक्षमता और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों को देखकर डॉक्टर इलाज का फैसला करते हैं।
इसलिए किसी भी मरीज को इस तकनीक को अपनी सर्जरी का विकल्प मानने से पहले एंडोक्राइन या थायरॉइड विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
थायरॉइड गर्दन के सामने मौजूद एक महत्वपूर्ण एंडोक्राइन ग्रंथि है। यह ऐसे हार्मोन बनाती है जो शरीर के मेटाबॉलिज्म और कई जरूरी प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं।
थायरॉइड हार्मोन शरीर की ऊर्जा, वजन, हृदय गति और शरीर के तापमान जैसी चीजों को नियंत्रित करने में भूमिका निभाते हैं।
जब थायरॉइड बहुत कम या बहुत ज्यादा हार्मोन बनाने लगता है, तो थायरॉइड से जुड़ी समस्या हो सकती है।
थायरॉइड की समस्या में लक्षण व्यक्ति और समस्या के प्रकार के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ मामलों में तेजी से वजन कम होना, दिल की धड़कन तेज होना, ज्यादा पसीना आना, गर्मी ज्यादा लगना, हाथ कांपना और घबराहट जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
ऐसे लक्षण लगातार बने रहने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
नई DAMA तकनीक के शुरुआती परिणामों से उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन इसे लेकर अभी लंबे समय के परिणाम सामने आना बाकी हैं। इसलिए इसे थायरॉइड की हर समस्या का स्थायी इलाज मानना सही नहीं होगा।
अगर किसी व्यक्ति को थायरॉइड की गांठ या हार्मोन से जुड़ी समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच और इलाज कराना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के थायरॉइड की दवा बंद करना या बदलना भी सही नहीं है।