भारत में Telegram पर अस्थायी प्रतिबंध लगने के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है, जिसने इंटरनेट इंडस्ट्री, टेलीकॉम सेक्टर और टेक जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। Telegram के संस्थापक और CEO Pavel Durov ने भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी Reliance Jio पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। Durov का दावा है कि Jio ने एक तकनीकी तरीके, जिसे BGP Hijacking कहा जाता है, का इस्तेमाल करके Telegram की पहुंच को सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दूसरे देशों में भी प्रभावित किया।

हालांकि Reliance Jio ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि कंपनी का इस कथित घटना से कोई लेना-देना नहीं है और वह वैश्विक इंटरनेट रूटिंग मानकों के अनुसार काम करती है। लेकिन इस पूरे विवाद ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है क्या यह सिर्फ एक तकनीकी गलती थी या फिर वास्तव में कुछ और चल रहा था?

आखिर शुरू हुआ पूरा विवाद कैसे?

Telegram पर भारत सरकार द्वारा 22 जून तक अस्थायी रोक लगाए जाने के बाद Pavel Durov ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पोस्ट किए। उन्होंने दावा किया कि Telegram तक पहुंच में जो दिक्कतें आ रही हैं, वह केवल भारत तक सीमित नहीं थीं। Durov के अनुसार, UAE समेत कई देशों के यूजर्स को भी Telegram एक्सेस करने में परेशानी हुई। उनका आरोप था कि इसकी वजह एक Rogue BGP Hijacking थी, जिसके जरिए इंटरनेट ट्रैफिक को गलत दिशा में भेजा गया। उन्होंने यह भी कहा कि यह महज तकनीकी गलती नहीं लगती क्योंकि संबंधित नेटवर्क को कई बार रिपोर्ट भेजी गई थीं, लेकिन समस्या को ठीक नहीं किया गया। Durov ने यहां तक संकेत दिया कि यह किसी Competitive War का हिस्सा हो सकता है।

BGP क्या होता है और इंटरनेट में इसकी भूमिका कितनी बड़ी है?

इस विवाद को समझने के लिए सबसे पहले BGP यानी Border Gateway Protocol को समझना जरूरी है। अगर इंटरनेट को पूरी दुनिया का एक विशाल हाईवे सिस्टम मान लिया जाए, तो BGP उस हाईवे का GPS है। दुनिया भर के नेटवर्क इसी सिस्टम की मदद से तय करते हैं कि किसी वेबसाइट या ऐप तक पहुंचने का सबसे सही रास्ता कौन सा है।

जब आप Telegram, WhatsApp, Instagram या किसी भी वेबसाइट को खोलते हैं, तो आपका इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर BGP की मदद से यह तय करता है कि डेटा को किस रास्ते से भेजा जाए ताकि वह सबसे तेजी और सुरक्षित तरीके से अपने गंतव्य तक पहुंच सके। इंटरनेट का पूरा ढांचा इसी भरोसे पर चलता है कि नेटवर्क जो रास्ते बता रहा है,

BGP Hijacking आखिर होता क्या है?

BGP Hijacking आखिर होता क्या है?

समस्या तब शुरू होती है जब कोई नेटवर्क गलत जानकारी प्रसारित कर देता है। BGP Hijacking में कोई नेटवर्क दुनिया भर के अन्य नेटवर्क्स को यह बताने लगता है कि किसी वेबसाइट या सर्वर तक पहुंचने का सबसे सही रास्ता उसी के पास है। अगर दूसरे नेटवर्क इस घोषणा पर भरोसा कर लेते हैं, तो ट्रैफिक गलत दिशा में जाने लगता है। आसान भाषा में समझें तो मान लीजिए किसी शहर में एक नकली साइनबोर्ड लगा दिया जाए जिस पर लिखा हो कि “Telegram का रास्ता इधर है”। लोग उस बोर्ड को देखकर गलत रास्ते पर मुड़ जाएंगे। इंटरनेट में भी कुछ ऐसा ही होता है। इस स्थिति में यूजर्स का डेटा गलत नेटवर्क तक पहुंच सकता है, जहां उसे रोका जा सकता है, इंटरसेप्ट किया जा सकता है या पूरी तरह ब्लैकहोल किया जा सकता है। ब्लैकहोल का मतलब है कि डेटा कहीं जाकर गायब हो जाए और सर्विस तक न पहुंचे ही।

Pavel Durov ने Jio पर क्या आरोप लगाए?

  • Durov ने दावा किया कि एक नेटवर्क ने Telegram के IP एड्रेस स्पेस को अपनी तरफ से दुनिया भर के इंटरनेट रूटिंग सिस्टम में घोषित किया।
  • उनका आरोप था कि इससे Telegram का ट्रैफिक गलत दिशा में जाने लगा और भारत के बाहर भी यूजर्स को दिक्कत हुई।
  • उन्होंने नेटवर्क ऑपरेटर्स को सलाह दी कि वे Reliance से आने वाले अनधिकृत BGP Announcements को स्वीकार न करें ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
  • सबसे बड़ा आरोप तब सामने आया जब Durov ने कहा कि उन्हें हैरानी नहीं होगी अगर Reliance और WhatsApp भारत में Telegram पर कार्रवाई के पीछे लॉबिंग कर रहे हों।
  • इस बयान के बाद विवाद और ज्यादा बढ़ गया क्योंकि Meta पहले से Reliance Jio में लगभग 10 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है। Meta ने 2020 में Jio Platforms में लगभग 5.7 अरब डॉलर का निवेश किया था। दोनों कंपनियां AI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स पर भी साथ काम कर रही हैं।

Jio ने क्या जवाब दिया?

  • आरोपों के कुछ ही घंटों बाद Reliance Jio ने आधिकारिक बयान जारी कर पूरे मामले से खुद को अलग कर लिया।
  • कंपनी ने कहा कि सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के कारण गलतफहमियां पैदा हो रही हैं, लेकिन Jio किसी भी प्रकार की BGP Route Misconfiguration या Hijacking घटना में शामिल नहीं रही है।
  • Jio का कहना है कि वह अपने नेटवर्क का संचालन वैश्विक इंटरनेट रूटिंग मानकों, सुरक्षा प्रोटोकॉल और पारदर्शिता के सर्वोच्च स्तरों के अनुसार करती है।
  • कंपनी ने साफ शब्दों में कहा कि उसके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं।

क्या Durov ने गलत कंपनी की पहचान कर ली?

  • इस विवाद में एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब कई टेलीकॉम विशेषज्ञों और नेटवर्क रिसर्चर्स ने Durov के दावों पर सवाल उठाए।
  • कुछ इंडस्ट्री सूत्रों का कहना है कि Durov ने Reliance Communications और Reliance Jio को लेकर भ्रम पैदा कर दिया हो सकता है।
  • उन्होंने जिस Autonomous System Number (ASN) का जिक्र किया, वह AS18101 था, जबकि Reliance Jio का ASN AS55836 है।
  • यानी जिस तकनीकी पहचान संख्या का हवाला दिया जा रहा है, वह Jio के नेटवर्क से मेल नहीं खाती।
  • यही कारण है कि कई विशेषज्ञ इस पूरे आरोप को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।

विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?

प्रसिद्ध नेटवर्क रिसर्चर और BGP विशेषज्ञ Anurag Bhatia का मानना है कि यह घटना जानबूझकर की गई कार्रवाई नहीं लगती। उनके अनुसार, तकनीकी दृष्टि से ऐसा करना तर्कसंगत नहीं दिखता और ज्यादा संभावना यही है कि यह किसी प्रकार की रूटिंग गलती रही हो। इंटरनेट का ढांचा बेहद जटिल है और कई बार डेटा अनेक नेटवर्क्स से होकर गुजरता है। ऐसे में किसी एक घटना के पीछे निश्चित तौर पर किसी कंपनी की मंशा साबित करना आसान नहीं होता।

आखिर Telegram पर बैन क्यों लगाया गया?

Telegram vs Jio BGP Hijacking

इस पूरे विवाद की शुरुआत वास्तव में Telegram पर लगे अस्थायी प्रतिबंध से हुई थी। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने केंद्र सरकार को सिफारिश भेजी थी कि Telegram पर कुछ चैनल NEET परीक्षा के कथित लीक पेपर बेचने का दावा कर रहे हैं। एजेंसी के अनुसार कई चैनल छात्रों और अभिभावकों से हजारों से लेकर लाखों रुपये तक मांग रहे थे। कुछ चैनलों के नाम भी खुले तौर पर “PAPER LEAKED NEET”, “Re-NEET 2026”, “Private Mafia” और “REE NEET MAFIAA” जैसे थे। NTA का कहना है कि परीक्षा पत्र पूरी तरह सुरक्षित थे और बाहर किसी के पास उपलब्ध नहीं थे।

 सरकार ने इसी पृष्ठभूमि में Telegram को अस्थायी रूप से ब्लॉक करने का फैसला लिया। इसके अलावा Telegram के Message Editing फीचर पर भी अस्थायी रोक लगाने के निर्देश दिए गए। एजेंसी का मानना था कि पुराने संदेशों को बाद में एडिट करके उनमें PDF या अन्य फाइलें जोड़ने की सुविधा गलत दावे साबित करने में बाधा बन सकती है।

Durov का पलटवार

  • Pavel Durov ने सरकार के इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि Telegram पर प्रतिबंध लगाने से असली दोषियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
  • उनका कहना है कि इससे भारत के 15 करोड़ से ज्यादा सामान्य यूजर्स प्रभावित होंगे, जबकि कथित पेपर लीक से जुड़े लोग आसानी से दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर चले जाएंगे।
  • Durov का दावा है कि Telegram को निशाना बनाया जा रहा है जबकि समस्या का मूल कारण कहीं और है।

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल इस मामले में कई सवालों के जवाब अभी बाकी हैं। एक तरफ Telegram के संस्थापक लगातार BGP Hijacking और प्रतिस्पर्धी दबाव की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ Reliance Jio सभी आरोपों को पूरी तरह नकार रही है। तकनीकी विशेषज्ञों की राय भी बंटी हुई दिखाई दे रही है। कुछ लोग इसे सामान्य नेटवर्किंग गलती मान रहे हैं जबकि कुछ का मानना है कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

एक बात साफ है—Telegram Ban, NEET Paper Leak विवाद और BGP Hijacking के आरोपों ने मिलकर भारत के डिजिटल इकोसिस्टम में एक नया और बेहद दिलचस्प विवाद खड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मामला केवल एक मैसेजिंग ऐप का नहीं बल्कि इंटरनेट गवर्नेंस, नेटवर्क सुरक्षा और डिजिटल प्रतिस्पर्धा का बड़ा मुद्दा बन सकता है।