भारत में घर खरीदना आज भी उतना आसान नहीं है जितना सुनने में लगता है। आम आदमी की सैलरी का बड़ा हिस्सा रोजमर्रा के खर्चों में चला जाता है, ऊपर से घर खरीदने के लिए एकमुश्त बड़ी रकम चाहिए होती है डाउन पेमेंट, रजिस्ट्रेशन, लोन प्रोसेस… सब मिलाकर यह एक भारी फ...

भारत में घर खरीदना आज भी उतना आसान नहीं है जितना सुनने में लगता है। आम आदमी की सैलरी का बड़ा हिस्सा रोजमर्रा के खर्चों में चला जाता है, ऊपर से घर खरीदने के लिए एकमुश्त बड़ी रकम चाहिए होती है डाउन पेमेंट, रजिस्ट्रेशन, लोन प्रोसेस… सब मिलाकर यह एक भारी फैसला बन जाता है। इसके साथ अगर आप टैक्स के नियम, PAN, TCS और खासकर NRI से जुड़े पेपरवर्क को जोड़ दें, तो पूरा प्रोसेस और भी उलझा हुआ लगने लगता है। यही वजह है कि आज के समय में किराए पर रहने वाले, पहली बार घर खरीदने वाले और Gen-Z के लिए अपना घर लेना थोड़ा दूर का सपना लगने लगा है।
लेकिन अब धीरे-धीरे चीजें बदल रही हैं। Income Tax Act 2025, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ है, उसने पूरे सिस्टम को simplify करने की कोशिश की है। पहले लोग घर इसलिए खरीदते थे क्योंकि उन्हें टैक्स में फायदा मिलता था होम लोन की EMI पर deductions मिलती थीं, जिससे ऐसा लगता था कि लोन लेना थोड़ा सस्ता पड़ रहा है। लेकिन अब नया सिस्टम अलग सोच लेकर आया है। इसमें deductions कम कर दिए गए हैं, लेकिन बदले में आपको हर महीने हाथ में ज्यादा सैलरी मिलती है।
सीधी भाषा में समझें तो पहले फायदा “बाद में” मिलता था, अब फायदा “सीधे हाथ में” मिल रहा है। और यही बदलाव सबसे बड़ा गेम चेंजर बन रहा है। जब हर महीने आपके पास ज्यादा पैसा बचता है, तो EMI देना आसान लगता है, डाउन पेमेंट की प्लानिंग बेहतर हो जाती है और सबसे जरूरी आपको यह भरोसा आता है कि हां, अब घर लेना मुमकिन है।
खासकर आज की युवा पीढ़ी यानी Gen-Z के लिए यह बदलाव काफी अहम माना जा रहा है। पहले वे टैक्स बचाने के चक्कर में फैसले लेते थे, अब वे अपनी असली जरूरत और फाइनेंशियल स्थिति के हिसाब से सोच सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि सरकार आपको घर खरीदने के लिए push कर रही है, बल्कि अब आपको इतनी liquidity मिल रही है कि आप खुद decide कर सकें कि कब और कैसे घर लेना है।
हालांकि, एक सच्चाई अभी भी वही है: घर खरीदने का फैसला सिर्फ टैक्स से तय नहीं होता। प्रॉपर्टी की कीमत क्या है, होम लोन का ब्याज कितना है और आपकी income कितनी stable है, ये सब चीजें आज भी उतनी ही important हैं। टैक्स नियम आपको support कर सकते हैं, लेकिन final decision आपकी pocket और planning ही तय करती है।
नए टैक्स सिस्टम का एक और बड़ा फायदा यह है कि अब पूरा प्रोसेस पहले से ज्यादा simple और transparent हो गया है। PAN-based compliance, कम paperwork और NRI के लिए आसान नियम ये सब मिलकर रियल एस्टेट सेक्टर को भी boost दे सकते हैं। इससे आने वाले समय में छोटे शहरों यानी Tier-2 और Tier-3 में भी प्रॉपर्टी की demand बढ़ सकती है।
इसी के साथ 2026 से एक और नया बदलाव आया है Form 121 में। अब पहले वाले Form 15G और 15H की जगह यही फॉर्म इस्तेमाल होगा। यह एक self-declaration form है, जिससे आप बैंक को बता सकते हैं कि आपकी income tax लिमिट से कम है, ताकि आपके interest पर TDS ना कटे। इसमें सबसे जरूरी बात यह है कि अब PAN देना compulsory कर दिया गया है। अगर PAN नहीं दिया, तो फॉर्म invalid माना जाएगा और ज्यादा TDS कट सकता है। साथ ही हर फॉर्म को एक 26-digit UIN नंबर मिलेगा, जिससे सरकार सीधे ट्रैक कर सकेगी और सिस्टम में transparency बढ़ेगी।
अगर इसे ऑनलाइन भरना है तो प्रोसेस भी ज्यादा मुश्किल नहीं है, बस income tax e-filing portal पर लॉगिन करें, Form 121 चुनें, अपनी डिटेल्स भरें, verify करें और OTP या Aadhaar से submit कर दें।
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