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भारतीय कंपनियों ने रूस के साथ बड़ी खाद डील की शुरुआत की

भारतीय कंपनियों ने रूस के साथ बड़ी खाद डील की शुरुआत की

भारत की कई सरकारी कंपनियों ने रूस की प्रमुख फर्टिलाइज़र कंपनी यूरालकेम (Uralchem) के साथ मिलकर रूस में एक नया यूरिया प्लांट बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यह प्लांट हर साल 1.8 से 2 मिलियन टन यूरिया उत्पादन करने की क्षमता रखेगा।
यह समझौता राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के दौरान साइन किया गया।

भारत–रूस फर्टिलाइज़र सहयोग क्यों बढ़ा?

पिछले कुछ वर्षों में भारत की खाद आवश्यकताओं में रूस का योगदान लगातार बढ़ा है:

  • 2017–18: रूस से सिर्फ 7.6% फर्टिलाइज़र आयात

  • 2023–24: यह बढ़कर लगभग 27% पहुँच गया

इससे स्पष्ट है कि रूस भारत की कृषि सप्लाई चेन का एक अहम और भरोसेमंद साझेदार बन चुका है।

कौन-कौन सी भारतीय कंपनियाँ शामिल हैं?

यह नया प्रोजेक्ट तीन बड़ी भारतीय सरकारी कंपनियों के साथ मिलकर शुरू किया जा रहा है:

  • राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइज़र्स लिमिटेड (RCF)

  • नेशनल फर्टिलाइज़र्स लिमिटेड (NFL)

  • इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL)

ये कंपनियाँ रूस की यूरालकेम ग्रुप के साथ मिलकर प्लांट विकसित करेंगी।
यह भारतीय फर्टिलाइज़र कंपनियों का विदेश में बनने वाला सबसे बड़ा संयुक्त प्रोजेक्ट माना जा रहा है।

पहले भी हुआ है बड़ा विदेशी जॉइंट वेंचर

  • ओमान–इंडिया फर्टिलाइज़र कंपनी (OMIFCO)

  • उत्पादन क्षमता: 1.65 मिलियन टन यूरिया प्रति वर्ष

  • भारतीय साझेदार: IFFCO और KRIBHCO

यूरालकेम ग्रुप: दुनिया की बड़ी फर्टिलाइज़र कंपनियों में से एक

  • दुनिया के सबसे बड़े नाइट्रोजन और कंपाउंड फर्टिलाइज़र निर्माताओं में शामिल

  • प्लांट रूस के कई क्षेत्रों में स्थित हैं:
    कैलिनिनग्राद, किरोव, पर्म, मॉस्को रीजन

  • कुल कर्मचारी: 38,000+

नई रूस परियोजना के लिए अमोनिया सप्लाई टोआज़ JSC द्वारा की जाएगी।
वर्तमान में प्रोजेक्ट की तकनीकी आवश्यकताओं, लागत, डिज़ाइन और फंडिंग मॉडल पर काम चल रहा है।

यूरालकेम का बयान

यूरालकेम के CEO दिमित्री कोन्याएव ने कहा: “भारत न सिर्फ दुनिया के बड़े कृषि देशों में से एक है, बल्कि फर्टिलाइज़र का एक प्रमुख ग्राहक भी है। इसलिए भारत यूरालकेम के लिए हमेशा से महत्वपूर्ण बाज़ार रहा है।”

मोदी–पुतिन की बैठक में क्या कहा गया?

  • भारत में फर्टिलाइज़र सप्लाई बिना रुकावट जारी रखने पर जोर दिया

  • भारत–रूस सहयोग को और मजबूत करने की इच्छा जताई

रूस से भारत में खाद आयात क्यों तेजी से बढ़ा?

2017–18 से 2023–24 के बीच:

  • रूस से आने वाले यूरिया में औसत सालाना बढ़ोतरी: 62%

  • DAP और NPK की सप्लाई में बढ़ोतरी: लगभग 22% प्रति वर्ष

यही कारण है कि 2023–24 तक रूस की हिस्सेदारी भारत के कुल आयात में 8% से बढ़कर 27% हो गई।

इस साझेदारी का भारत को क्या लाभ होगा?

  • भारत की कृषि के लिए खाद सप्लाई स्थिर रहेगी

  • भविष्य में उर्वरकों की कीमतों पर नियंत्रण संभव

  • रूस–भारत आर्थिक संबंधों में नई मजबूती

  • घरेलू खेती और खाद सुरक्षा को लंबे समय तक समर्थन

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