राधिका आप्टे ने खुलासा किया कि एक फिल्म की शूटिंग में उनसे बिना ब्रा के एक्शन सीन करने को कहा गया। उन्होंने सेट पर सहमति और पारदर्शिता का मुद्दा उठाया।

फिल्मों में कलाकारों से उनकी भूमिका के लिए कई तरह की मांगें की जाती हैं, लेकिन जब शूटिंग से ठीक पहले कपड़ों और शरीर दिखाने को लेकर दबाव बनाया जाए, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। अभिनेत्री राधिका आप्टे ने हाल ही में अपने साथ हुई ऐसी ही एक असहज घटना का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि एक एक्शन फिल्म की शूटिंग के दौरान उनसे बिना ब्रा के शर्ट पहनकर और उसके बटन खुले रखकर एक्शन सीन करने को कहा गया था।
राधिका के मुताबिक, उन्होंने इस मांग पर सवाल उठाते हुए निर्देशक और फिल्म की टीम से कहा कि एक्शन सीन करते समय कपड़ों की स्थिति और उसकी व्यावहारिकता के बारे में भी सोचना चाहिए। अभिनेत्री ने यह भी बताया कि इस मामले में बातचीत कई दिनों तक चलती रही और उनसे शरीर के कुछ हिस्से दिखाने को लेकर भी सवाल किए गए।
राधिका आप्टे ने यह अनुभव अपनी आगामी सीरीज 'अक्का' के प्रमोशन के दौरान साझा किया। उनके बयान ने फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों की सहमति, काम की सीमाओं और शूटिंग से पहले शर्तें स्पष्ट करने की जरूरत पर फिर से चर्चा छेड़ दी है।
न्यूज18 के साथ बातचीत में राधिका आप्टे ने उस घटना को याद किया, जब उनसे एक एक्शन सीन के लिए बिना ब्रा के शर्ट पहनने और उसके बटन खुले रखने को कहा गया था।
अभिनेत्री ने बताया कि उन्होंने इस मांग पर अपनी आपत्ति जताते हुए कहा कि एक्शन करते समय यह कैसे संभव होगा। उनके मुताबिक, उन्होंने फिल्म की टीम से इस बारे में व्यावहारिक तरीके से सोचने के लिए कहा था।
राधिका ने जूम के साथ बातचीत में भी इस अनुभव के बारे में बताया। उनके अनुसार, जब उन्होंने पहली मांग पर सवाल उठाया, तो उनसे ब्रा और अंडरवियर में सीन करने की संभावना के बारे में भी पूछा गया।
अभिनेत्री ने इस पर हैरानी जताई और सवाल किया कि आखिर उनसे क्या करवाने की कोशिश की जा रही है।
राधिका के मुताबिक, कपड़ों को लेकर बातचीत यहीं खत्म नहीं हुई। करीब दो सप्ताह तक इस मुद्दे पर चर्चा होती रही। इस दौरान उनसे शरीर के अलग-अलग हिस्सों को दिखाने को लेकर भी सवाल किए गए।
उन्होंने इस पूरे अनुभव को बेहद परेशान करने वाला और निराशाजनक बताया। हालांकि, अभिनेत्री ने उस फिल्म या उससे जुड़े लोगों का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।
राधिका आप्टे ने अपने बयान में एक अहम सवाल उठाया कि अगर किसी फिल्म में किसी किरदार को कम कपड़ों में दिखाना या न्यूडिटी शामिल करना कहानी की जरूरत है, तो इसकी जानकारी कलाकार को पहले ही क्यों नहीं दी जाती?
उनका कहना है कि फिल्म निर्माता जब किसी कलाकार को भूमिका के लिए साइन करते हैं, तो उन्हें किरदार की जरूरतों और अपनी रचनात्मक सोच के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।
राधिका के मुताबिक, यदि उन्हें शुरुआत में ही बता दिया जाए कि किसी दृश्य में किस तरह के कपड़े पहनने होंगे या कितना एक्सपोजर अपेक्षित है, तो वह अपनी सहमति से फैसला ले सकती हैं।
वह ऐसी भूमिका स्वीकार भी कर सकती हैं और मना भी कर सकती हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि फैसला पूरी जानकारी के आधार पर होना चाहिए।
अभिनेत्री ने कहा कि शूटिंग से केवल दो दिन पहले ऐसी मांगें सामने आने पर कलाकार के लिए स्थिति मुश्किल हो जाती है। उस समय शूटिंग का कार्यक्रम तय हो चुका होता है और अचानक सामने आई अपेक्षाओं को लेकर दबाव महसूस हो सकता है।
राधिका की बात का सीधा मतलब है कि किसी कलाकार की सहमति पहले से स्पष्ट होनी चाहिए, न कि शूटिंग के आखिरी समय में उस पर दबाव बनाकर हासिल की जाए।
राधिका आप्टे ने बातचीत के दौरान इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर्स की भूमिका पर भी अपनी राय रखी। फिल्म और वेब सीरीज की शूटिंग में इन पेशेवरों का काम अंतरंग दृश्यों को कलाकारों की सहमति और तय सीमाओं के भीतर फिल्माने में मदद करना होता है।
राधिका ने माना कि फिल्म सेट पर इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर्स की मौजूदगी से काफी बदलाव आया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उनकी भूमिका हमेशा कलाकारों को सुरक्षा देने में सफल नहीं होती।
अभिनेत्री के मुताबिक, इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर्स को अक्सर निर्माता नियुक्त करते हैं। ऐसे में यदि वे किसी दृश्य या मांग को लेकर कलाकार का पक्ष लेते हैं और निर्माता की अपेक्षाओं से असहमत होते हैं, तो उनके लिए भी मुश्किलें पैदा हो सकती हैं।
राधिका ने दावा किया कि उन्होंने ऐसे मामले देखे हैं, जिनमें कलाकारों के पक्ष में खड़े होने पर इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर्स को नौकरी से निकाल दिया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ परिस्थितियों में ऐसे पेशेवरों को अपना रुख बदलना पड़ सकता है, जबकि कुछ मामलों में कलाकार का पक्ष लेने के बावजूद स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आता।
उनके बयान से यह सवाल सामने आता है कि अगर किसी कलाकार को असहज महसूस हो रहा है, तो उसकी शिकायत को प्रभावी ढंग से सुनने और उस पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी किसकी होनी चाहिए?
सिर्फ सेट पर इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर की मौजूदगी पर्याप्त नहीं है। उनकी भूमिका तभी प्रभावी हो सकती है, जब वे बिना किसी अनुचित दबाव के अपना काम कर सकें और कलाकारों की सहमति का सम्मान सुनिश्चित करने में सक्षम हों।
राधिका आप्टे ने अपने अनुभव को पूरी फिल्म इंडस्ट्री पर लागू करने से भी इनकार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके साथ काम करने वाले ज्यादातर लोगों ने उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया है।
अभिनेत्री के मुताबिक, लगभग दस में से नौ फिल्म सेट पर उन्हें पूरा सम्मान मिला, लेकिन एक सेट पर हुआ ऐसा अनुभव भी गंभीर है।
उन्होंने यह चिंता भी जाहिर की कि अप्रिय अनुभवों के बारे में खुलकर बात करना हमेशा आसान नहीं होता। राधिका ने कहा कि वह अभी तक उस फिल्म या उससे जुड़े लोगों का नाम नहीं बता पा रही हैं।
उनके इस बयान से फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले कलाकारों की एक बड़ी चिंता सामने आती है। किसी घटना के बारे में बोलने की इच्छा होने के बावजूद कलाकारों को यह तय करना पड़ सकता है कि वे सार्वजनिक रूप से अपनी बात रख सकते हैं या नहीं।
हालांकि, राधिका ने संबंधित लोगों का नाम नहीं बताया है, इसलिए इस घटना के लिए किसी खास निर्देशक या निर्माता को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। फिलहाल इस मामले में उपलब्ध जानकारी अभिनेत्री के अपने बयान पर आधारित है।
फिल्मों और वेब सीरीज में इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर ऐसे दृश्यों की तैयारी और शूटिंग में मदद करते हैं, जिनमें अंतरंगता, शारीरिक निकटता या न्यूडिटी शामिल हो सकती है।
उनकी भूमिका में कलाकारों के साथ पहले से बातचीत करना, दृश्य की सीमाएं स्पष्ट करना और शूटिंग के दौरान तय सहमति का सम्मान सुनिश्चित करने में मदद करना शामिल हो सकता है।
ऐसे दृश्यों में पहले से स्पष्ट बातचीत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि कलाकार को यह पता होना चाहिए कि उससे क्या अपेक्षा की जा रही है और वह किन शर्तों पर सहज है।
राधिका आप्टे के बयान ने इस बात पर जोर दिया है कि किसी भी सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक उपयोगिता इस बात से तय होती है कि वह मुश्किल परिस्थिति में कलाकार के लिए कितनी प्रभावी साबित होती है।
यदि शूटिंग से ठीक पहले दृश्य की मांग बदल जाती है, तो कलाकार को नई परिस्थितियों पर विचार करने और अपनी सहमति देने या मना करने का उचित अवसर मिलना चाहिए।
काम की बात करें तो राधिका आप्टे अपनी आगामी नेटफ्लिक्स सीरीज 'अक्का' को लेकर भी चर्चा में हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, सीरीज का प्रीमियर 30 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है।
सीरीज के प्रमोशन के दौरान अभिनेत्री ने फिल्म इंडस्ट्री में अपने अनुभवों और कामकाज से जुड़े मुद्दों पर बात की। उनका ताजा बयान भी इसी बातचीत का हिस्सा है।
राधिका इससे पहले भी फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं की स्थिति, पर्दे पर दिखाए जाने वाले किरदारों और फिल्मों में दिखाई जाने वाली कुछ रोमांटिक धारणाओं पर अपनी राय रख चुकी हैं।
उनका हालिया बयान इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह केवल कपड़ों या किसी एक दृश्य का मामला नहीं है। यह इस बात से जुड़ा है कि कलाकारों को अपनी भूमिका की शर्तें जानने, सवाल पूछने और असहज मांगों पर अपनी राय रखने की कितनी स्वतंत्रता मिलती है।
राधिका आप्टे के खुलासे ने फिल्म सेट पर सहमति और पेशेवर व्यवहार को लेकर एक जरूरी चर्चा शुरू की है। किसी फिल्म में बोल्ड दृश्य होना अपने आप में समस्या नहीं है, बशर्ते कलाकार को इसकी जानकारी पहले से हो और वह अपनी इच्छा से उस भूमिका को स्वीकार करे।
समस्या तब पैदा होती है, जब शूटिंग से ठीक पहले किसी कलाकार के सामने नई मांग रख दी जाती है और उससे उम्मीद की जाती है कि वह बिना किसी परेशानी के उसे स्वीकार कर लेगा।
फिल्म निर्माताओं के लिए भी यह जरूरी है कि वे किसी भूमिका की वास्तविक जरूरतों के बारे में शुरुआत में ही स्पष्ट रहें। इससे कलाकार को सोच-समझकर फैसला लेने का मौका मिलता है और सेट पर अनावश्यक विवाद की आशंका कम होती है।
राधिका आप्टे ने अपने अनुभव के जरिए यही सवाल उठाया है कि जब किसी दृश्य की मांग पहले से तय हो सकती है, तो कलाकार को आखिरी समय तक अनिश्चितता में क्यों रखा जाए?
फिल्म इंडस्ट्री में रचनात्मक स्वतंत्रता जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी कलाकारों की सहमति और सम्मान भी है। दोनों के बीच संतुलन बनाना ही पेशेवर फिल्म निर्माण की असली कसौटी है।