जनवरी माह में सरकार ने बिजली के बिलों में 1.98 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की थी। अब सरकार जुलाई माह में बिजली 8.32 प्रतिशत महंगा करने की तैयारी कर रही है। अगर जुलाई माह में बिजली किे बिलों में बढ़ोत्तरी हो जाती है, तो ऐसा पहली बार होगा जब 6 माह के अंतराल में बिजली के बिलाें में बढ़ोत्तरी की जाएगी।
कोरोना के कारण टूट चुकी मध्य वर्ग और निम्न वर्ग की कमर पर सरकार पेट्रोल और डीजल के दाम के बाद अब महंगी बिजली का बोझ डालने की तैयारी कर रही है। इसके पहले सरकार जनवरी माह में भी बिजली के दामों में बढ़ोत्तरी कर चुकी है। अब 6 महीने बाद सरकार बिजली के दामों में बढ़ोत्तरी करने जा रही है।
गौरतलब है कि जनवरी माह में सरकार ने बिजली के बिलों में 1.98 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की थी। अब सरकार जुलाई माह में बिजली 8.32 प्रतिशत महंगा करने की तैयारी कर रही है। अगर जुलाई माह में बिजली किे बिलों में बढ़ोत्तरी हो जाती है, तो ऐसा पहली बार होगा जब 6 माह के अंतराल में बिजली के बिलाें में बढ़ोत्तरी की जाएगी।
कितना बोझा डालेगी सरकार आपकी जेब पर :
सरकार यदि सरकार जुलाई में बिजली को महंगा कर देती है तो जुलाई से बिजली का बिल 200 यूनिट में 145 रुपए और 300 यूनिट में 296 रुपए बढ़कर आ सकता है। यानि अभी 200 यूनिट बिजली का बिल 1774 रुपए बन रहा है। यदि इसे 8.32 प्रतिशत बढ़ा दिया जाता है तो बिजली का बिल करीब 1919 रुपए आएगा।
दरअसल एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने फरवरी माह में विद्युत नियामक आयोग के सामने वित्तीय वर्ष 2021-22 में घरों में सप्लाई की जाने वाली बिजली की दरों में 8.32 प्रतिशत की वृद्धि करने का प्रस्ताव रखा है। कंपनी का तर्क है कि गत वित्तीय वर्ष में 2629 करोड़ का घाटा हुआ है, इसकी भरपाई के लिए 8.32 प्रतिशत की वृद्धि की जाने की जरूरत है।
ऊर्जा मंत्री झाड़ और कचरा साफ करने में व्यस्त :
महंगाई के कारण पूरे प्रदेश में लोग त्राहि त्राहि कर रहे हैं, लेकिन मप्र के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर (Pradyuman Singh Tomar) ट्रांसफार्मर से कचरा और झाड़ साफ करने में व्यस्त हैं। पूरे प्रदेश में जो काम लाइनमैन और हेल्पर को करना चाहिए, वो काम ऊर्जा मंत्री को करना पड़ रहा है। ऊर्जा मंत्री मंगलवार को विद्या नगर स्थित सब स्टेशन पहुंचे और तारों और बिजली के खंभे पर चढ़ी बेल को खुद ही हटाने लगे।
मप्र की जनता बढ़ते पेट्रोलियम पदार्थों के दामों और अब बिजली के बढ़े दामों से त्रस्त हो जाएगी। ऐसे में ऊर्जा मंत्री को इनके दामों को कम करने के लिए प्रभावी नीतियां बनानी चाहिए, न कि ट्रांसफार्मर, बिजली के तारों और खंभों की सफाई करना चाहिए।