विश्व की सबसे बड़ी श्रीरामचरित मानस लिखने वाले डॉ. अरुण कुमार खाेबरे हुए सम्मानित   

हिंदी प्रचारिणी समिति देश की आजादी से भी पहले सन 1935 में प्रारंभ हो गई थी। इस समिति ने अपने ऐतिहासिक मंच से राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर, नन्ददुलारे वाजपेयी और महादेवी वर्मा सहित कई बड़े साहित्यकारों का उनकी उपलब्धियों पर सम्मान किया है।

विश्व की सबसे बड़ी श्रीरामचरित मानस लिखने वाले डॉ. अरुण कुमार खाेबरे हुए सम्मानित   
विश्व की सबसे बड़ी श्रीरामचरित मानस लिखने का रिकार्ड बनाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ.अरुण कुमार खोबरे का गत दिनों छिंदवाड़ा में देश की सुप्रसिद्ध संस्था हिंदी प्रचारिणी समिति ने सम्मान किया। गौरतलब है कि डॉ. खोबरे छिंदवाड़ा के ही निवासी हैं। कार्यक्रम में उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। इस अवसर पर उन्हें शॉल, श्रीफल और अभिनंदन पत्र देकर समिति के अध्यक्ष शिवकुमार गुप्ता ने सम्मानित किया। 

कार्यक्रम में संस्था के उपाध्यक्ष गुणेंद्र दुबे, मंत्री प्रकाश साव, साहित्य सचिव रणजीत सिंह परिहार, कार्यालयीन मंत्री प्रणय नामदेव, वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र राही सहित कई लोग मौजूद थे।

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर का भी किया है सम्मान : 
हिंदी प्रचारिणी समिति देश की आजादी से भी पहले सन 1935 में प्रारंभ हो गई थी। इस समिति ने अपने ऐतिहासिक मंच से राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर, नन्ददुलारे वाजपेयी और महादेवी वर्मा सहित कई बड़े साहित्यकारों का उनकी उपलब्धियों पर सम्मान किया है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए डॉ. अरुण खोबरे ने कहा कि यह उनके लिए अतिसौभाग्य की बात है कि इतनी बड़ी हस्तियों के साथ उनका नाम जोड़ा जा रहा है जबकि वे इनके कण मात्र भी नहीं हैं।


हनुमान जी की कृपा से संभव हुआ यह काज : 
विश्व की सबसे बड़ी श्रीरामचरित मानस लिखने का रिकार्ड बनाने को लेकर डॉ. खोबरे ने कहा कि यह सब हनुमान जी की विशेष कृपा से ही संभव हो पाया है। वे एक छोटे से माध्यम मात्र थे, लेकिन यह कठिन काम करने वाले स्वयं हनुमान थे। इसलिए हनुमान जी को ही इसका श्रेय जाता है। इस दौरान डॉ. खोबरे ने अपने माता-पिता को विश्व रिकार्ड समर्पित किया

घर में लगाएं पीपल, नीम और तुलसी की त्रिवेणी : 
पर्यावरण और श्रीरामचरित मानस विषय पर उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा सभी कांड पर्यावरण से ओत-प्रोत हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण का अद्भुत वर्णन श्रीरामचरित मानस में देखने को मिलता है। सभागार में उपस्थित प्रबुद्धजनों से उन्होंने अपने घर में तुलसी, पीपल और नीम का पेड़ लगाने की अपील की।हिंदी प्रचारिणी समिति के अलावा भी छिंदवाड़ा जिले के आसपास की तहसीलों और ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों ने उनका सम्मान किया। साथ ही समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों ने भी उनका सम्मान किया।

कवि, गीतकार और गजलकार भी हैं डॉ. खोबरे : 
डॉ. खोबरे माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष के साथपरीक्षा नियंत्रक भी हैं। डॉ. खोबरे को लोग कवि, गीतकार, गजलकार और शायर के रूप में भी जानते हैं और उन्हें अरुण अज्ञानी के नाम से भी जाना जाता है।

लगभग तीन दर्जन से ज्यादा सम्मान, पुरस्कार प्राप्त कर चुके अरुण अज्ञानी अपनी कविताओं, गीतों, गजलों को मधुर आवाज में सुनाने के लिए जाने जाते हैं। डॉ.खोबरे, पत्रकारिता में मास्टर ऑफ जर्नलिस्म, एम.फिल, पीएचडी के साथ ही यूजीसी नेट भी हैं।

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