Mutual fund strategy: शेयर बाजार में उतार चढ़ाव आजकल काफी आम बात हो चुकी है। कभी मार्केट तेजी से ऊपर चढ़ता है तो कभी धड़ाम से नीचे गिरता है। कभी जोरदार रिकवरी देखने को मिलती है तो कभी निवेशकों को भारी नुकसान झेलना पड़ता है। ऐसे माहौल में म्युचुअल फंड निवेशकों के मन में भी लगातार सवाल उठते हैं कि अब क्या करें? निवेश जारी रखें या पैसा निकाल लें?
हाल ही में बाजार में तेज गिरावट देखी गई। वैश्विक तनाव, तेल के दाम बढ़ना और विदेशी निवेशकों की बिकवाली की वजह से अनिश्चितता काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में म्युचुअल फंड निवेशकों के लिए सही रणनीति बनाना भी बहुत जरूरी है। यदि कोई म्युचुअल फंड निवेशक सही Mutual fund strategy के साथ निवेश करता है तो मार्केट का यह उतार चढ़ाव निवेशकों के लिए मौका बन जाता है।
बाजार की गिरावट और उछाल का Mutual fund strategy पर प्रभाव
Mutual fund strategy पूरी तरह से बाजार की गिरावट और उछाल पर निर्भर करती है। बाजार की अस्थिरता पूरी तरह से निवेशकों पर निर्भर होती है। वैश्विक घटनाएं, कच्चे तेल की कीमत, विदेशी निवेशकों की बिकवाली यह सभी बाजार को अस्थिर बनाते हैं। लेकिन इस पूरी परिस्थिति में घबराने की बजाय विशेष स्ट्रेटजी अपनाना बहुत ज्यादा जरूरी है। यदि निवेशक गिरते हुए बाजार के दौरान भी सही स्ट्रेटजी अपनाते हैं तो इस मौके को भी वह फायदे में बदल सकते हैं।

गिरते हुए बाजार में फायदा लेने के लिए कौन सी Mutual fund strategy अपनाएं?
निवेश में लम सम ऑफ़ स्टैगरिंग का फार्मूला: एक्सपर्ट का कहना है कि जब भी बाज़ार गिरे तब लम सम निवेश करने का अच्छा मौका होता है। लेकिन पूरा पैसा एक ही बार ना लगाएं। पैसे को तीन-चार हिस्सों में बांटें। अलग-अलग समय पर निवेश करें इससे जोखिम कम हो जाता है और एवरेज फायदा बढ़ जाता है।
सही फंड कैटेगरी का चुनाव करें: मार्केट उतार-चढ़ाव भरा है, ऐसे में कुछ खास फंड की ककैटेगरी इस दौरान काफी फायदेमंद मानी जाती है। फ्लेक्सी कैप फंड, मिडकैप, मल्टीकैप फंड जैसे फंड अच्छी ग्रोथ का मौका देते हैं। वही फ्लेक्सी कैप फंड मैनेजर को बाजार के हिसाब से पोर्टफोलियो बदलने का भी मौका देते हैं।
डायवर्सिफिकेशन का हथियार रखना: म्युचुअल फंड निवेश में एक ही जगह पैसा लगाने से जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए डायवर्सिफिकेशन का फार्मूला अपनाएं। इक्विटी और डेब्ट दोनों में निवेश करें। अलग-अलग सेक्टर में पैसा लगाए ताकि नुकसान कम हो और पोर्टफोलियो बैलेंस हो।
SIP जारी रखें: बाजार में कितनी भी गिरावट क्यों ना आ जाए SIP को बंद ना करें। कम कीमत पर ज्यादा यूनिट मिलने की गारंटी SIP देता है। लंबी अवधि में यह बेहतर रिटर्न देता है। साथ ही यह हमारे निवेश को अनुशासन में बनाए रखता है।
निवेश में भावनाएं नहीं रणनीति अपनाएं: कई निवेशक बाजार के गिरने पर भावनाओं में आकर गलत फैसला ले लेते हैं, लेकिन इसी से ही बचना है। सही रणनीति से पोर्टफोलियो बेहतर भी होता है और सुरक्षित भी होता है। बाजार गिरने पर यूनिट ज्यादा मिलते हैं। बाजार उठने पर आपकी यूनिट के दाम बढ़ जाते हैं। दोनों ही परिस्थितियों में रणनीति ही काम आती है।
बैलेंस अप्रोच अपनाएं: एक्सपर्ट का कहना है कि बाजार के उतार चढ़ाव के दौरान लार्ज कैप, फ्लेक्सी कैप का मिश्रण बरकरार रखें। जरूरत पड़ने पर हाइब्रिड फंड भी चुनें।

मार्केट में उतार चढ़ाव डराने वाला जरूर होता है लेकिन यही उतार-चढ़ाव असली मौका भी देता है। समझदारी यही होती है कि पैनिक किए बिना सही Mutual fund strategy अपनाएं। मार्केट कितना भी क्यों ना गिर रहा हो SIP जारी रखें, डायवर्सिफिकेशन का फार्मूला अपनाएं, हमेशा लम सम निवेश से बचें। लम सम निवेश को एक ही जगह निवेश करने की जगह छोटे-छोटे हिस्सों में अलग-अलग निवेश करें। याद रखें अधिकतर नुकसान मार्केट की अस्थिरता से नहीं, बल्कि निवेशकों के गलत फैसले से होता है।

















