विदेशों में रहने वाले भारतीयों NRI के लिए इस समय भारतीय बैंकों में निवेश का बड़ा मौका बनता दिखाई दे रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक हालिया पहल के बाद देश के कई बड़े बैंकों ने FCNR(B) डिपॉजिट पर ब्याज दरों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर दी है। इसका उद्देश्य विदेशों से ज्यादा डॉलर आकर्षित करना और रुपये पर बने दबाव को कम करना है।
देश के प्रमुख बैंक SBI, HDFC Bank, Axis Bank समेत कई अन्य वित्तीय संस्थानों ने विदेशी मुद्रा जमा योजनाओं पर ब्याज दरें बढ़ा दी हैं। इससे NRI निवेशकों को पहले के मुकाबले कहीं बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बन गई है।
आखिर FCNR(B) डिपॉजिट क्या होता है?

FCNR(B) यानी Foreign Currency Non-Resident (Bank) Deposit एक विशेष फिक्स्ड डिपॉजिट योजना है, जो खासतौर पर NRI, OCI और PIO निवेशकों के लिए बनाई गई है। इस खाते की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेशक अपनी रकम विदेशी मुद्रा में ही जमा कर सकते हैं और मैच्योरिटी पर भी वही विदेशी मुद्रा प्राप्त कर सकते हैं। इससे करेंसी एक्सचेंज रेट के उतार-चढ़ाव का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।
RBI के फैसले के बाद क्यों बढ़ीं ब्याज दरें?
हाल ही में RBI ने बैंकों को FCNR(B) जमा जुटाने के लिए बड़ी राहत दी है। केंद्रीय बैंक ने 3 से 5 साल की FCNR(B) जमा पर हेजिंग लागत का पूरा भार खुद उठाने का फैसला किया है। इससे बैंकों की लागत कम हो गई है और वे NRI ग्राहकों को अधिक आकर्षक ब्याज दरें ऑफर कर पा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य भारतीय बैंकिंग सिस्टम में डॉलर का प्रवाह बढ़ाना और रुपये को स्थिरता प्रदान करना है।
निजी बैंकों में HDFC Bank की आक्रामक पेशकश

ब्याज दरों की होड़ में फिलहाल HDFC Bank सबसे आगे दिखाई दे रहा है। बैंक ने 3 से 5 साल की FCNR(B) जमा पर ब्याज दर बढ़ाकर 6 प्रतिशत तक कर दी है। बताया जा रहा है कि यह बढ़ोतरी 200 से अधिक बेसिस पॉइंट्स की है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए यह योजना काफी आकर्षक बन गई है।
SBI और Axis Bank भी मैदान में
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI ने भी FCNR जमा पर ब्याज दरों में सुधार किया है। विभिन्न अवधि और जमा राशि के आधार पर बैंक 5.25 प्रतिशत से 6 प्रतिशत तक का रिटर्न ऑफर कर रहा है। वहीं Axis Bank भी NRI ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अपनी विदेशी मुद्रा जमा योजनाओं को प्रतिस्पर्धी बना रहा है।
प्रमुख बैंकों की FCNR(B) ब्याज दरें

वर्तमान में प्रमुख बैंकों द्वारा ऑफर की जा रही FCNR(B) ब्याज दरों का तुलनात्मक विवरण नीचे दिया गया है:
| बैंक | बैंक का प्रकार | FCNR(B) अधिकतम ब्याज दर | अवधि (Tenure) | प्रमुख विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| State Bank of India (SBI) | Public Sector Bank | 4.40% | 1–2 वर्ष | 1–2 वर्ष की अवधि में उपलब्ध सर्वोच्च FCNR(B) दर |
| Punjab National Bank (PNB) | Public Sector Bank | 6.10% | 1–2 वर्ष | अपडेटेड FCNR(B) दरों में सबसे अधिक ऑफर |
| Bank of Baroda (BoB) | Public Sector Bank | 6.00% तक | 3–5 वर्ष | लंबी अवधि के USD डिपॉजिट पर बेहतर रिटर्न |
| HDFC Bank | Private Sector Bank | 6.00% तक | 3–5 वर्ष | 3–5 वर्ष की FCNR(B) जमा पर आकर्षक ब्याज दर |
| Axis Bank | Private Sector Bank | 6.00% तक | 3–5 वर्ष | FCNR(B) दरों में 305 बेसिस पॉइंट्स तक की बढ़ोतरी |
| ICICI Bank | Private Sector Bank | 4.50% | 12–24 माह | 12–24 माह की अवधि में सर्वोच्च FCNR(B) दर |
किस बैंक में मिल रही है सबसे ज्यादा FCNR(B) ब्याज दर?
टेबल के अनुसार फिलहाल Punjab National Bank (PNB) 1–2 वर्ष की अवधि के लिए 6.10% तक की FCNR(B) ब्याज दर ऑफर कर रहा है, जो सूची में सबसे अधिक है। वहीं HDFC Bank, Axis Bank और Bank of Baroda 3–5 वर्ष की अवधि पर 6.00% तक का रिटर्न दे रहे हैं। दूसरी ओर SBI और ICICI Bank की अधिकतम दरें क्रमशः 4.40% और 4.50% हैं। हालांकि निवेशकों को केवल ब्याज दर ही नहीं, बल्कि जमा अवधि, मुद्रा विकल्प और बैंक की अन्य शर्तों को भी ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए।
बैंकों को कितने डॉलर मिलने की उम्मीद है?
बाजार विशेषज्ञों और बैंकिंग अधिकारियों का अनुमान है कि RBI की इस योजना के जरिए भारतीय बैंकिंग सिस्टम में 35 से 40 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त विदेशी निवेश आ सकता है। कई बैंक अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों को लक्षित कर विशेष अभियान भी चला रहे हैं।
NRI निवेशकों को कितना फायदा होगा?
नई ब्याज दरों के बाद FCNR(B) जमा पहले के मुकाबले कहीं अधिक लाभदायक हो गई है। कुछ अनुमानों के अनुसार 10,000 डॉलर की 5 वर्षीय FCNR जमा पर निवेशकों को पहले की तुलना में हजारों डॉलर अतिरिक्त ब्याज मिल सकता है। यही वजह है कि हाल के दिनों में इन योजनाओं के प्रति NRI निवेशकों की रुचि तेजी से बढ़ी है।
क्या अभी FCNR(B) में निवेश करना चाहिए?
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार जिन NRI निवेशकों की भविष्य की वित्तीय जरूरतें डॉलर, पाउंड, यूरो या अन्य विदेशी मुद्राओं में हैं, उनके लिए FCNR(B) एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। इसमें मुद्रा जोखिम सीमित रहता है और भारत में उपलब्ध कई अन्य सुरक्षित निवेश विकल्पों की तुलना में बेहतर रिटर्न भी मिल सकता है।
आने वाले महीनों में क्या रह सकता है ट्रेंड?
बाजार जानकारों का मानना है कि RBI की योजना 30 सितंबर 2026 तक लागू रहने के कारण आने वाले महीनों में और भी बैंक FCNR(B) दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं। यदि विदेशी निवेश का प्रवाह बढ़ता है तो इससे रुपये को मजबूती मिलने के साथ-साथ बैंकिंग सिस्टम की विदेशी मुद्रा स्थिति भी बेहतर हो सकती है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे निवेश की सलाह न माना जाए। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।

