देश में चालू 2025-26 रबी सीजन के लिए गेहूं की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है और अभी तक फसल की स्थिति काफी अच्छी बताई जा रही है। कृषि आयुक्त पीके सिंह ने गुरुवार को यह जानकारी दी। उनके मुताबिक, समय पर बुवाई और बेहतर बीजों के इस्तेमाल से इस बार गेहूं की पैदावार को लेकर उम्मीदें मजबूत हैं।
रबी सीजन 2025-26 में गेहूं की बुवाई लगभग पूरी
29 दिसंबर तक देशभर में करीब 3.226 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुवाई हो चुकी है। पिछले साल यह आंकड़ा 3.28 करोड़ हेक्टेयर था। पीके सिंह ने बताया, “बिहार के कुछ हिस्सों को छोड़ दें, तो देश के ज्यादातर इलाकों में गेहूं की बुवाई पूरी हो चुकी है। कुल रकबा पिछले साल के बराबर या उसके आसपास ही रहने की उम्मीद है।”
मौसम के असर से निपटने के लिए उन्नत बीज

इस बार गेहूं की बुवाई में 73 प्रतिशत से ज्यादा क्षेत्र में ऐसे बीजों का इस्तेमाल किया गया है जो जलवायु के अनुकूल और बायो-फोर्टिफाइड हैं। इन बीजों की खासियत यह है कि ये मौसम में अचानक होने वाले बदलावों को बेहतर तरीके से झेल सकते हैं और पैदावार पर कम असर पड़ता है।
फसल की हालत फिलहाल बेहतरीन

कृषि आयुक्त के अनुसार, “इस बार गेहूं की बुवाई समय पर और जल्दी हुई है। इसी वजह से अभी फसल की हालत बहुत अच्छी है। गेहूं उत्पादक इलाकों से किसी भी तरह की समस्या की सूचना नहीं मिली है।”
इससे साफ है कि अगर आगे मौसम ने साथ दिया, तो किसानों को अच्छी पैदावार मिल सकती है।
दालों और तिलहनों की बुवाई भी पूरी
सिर्फ गेहूं ही नहीं, बल्कि इस रबी सीजन में दालों और तिलहनों की बुवाई भी पूरी हो चुकी है। खास बात यह है कि: चना, सरसों (रेपसीड-मस्टर्ड) इन दोनों फसलों के रकबे में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इन फसलों की पैदावार भी इस बार अच्छी रहेगी।
दक्षिण भारत में धान की रोपाई जारी – जहां उत्तर और मध्य भारत में रबी फसलों की बुवाई पूरी हो चुकी है, वहीं दक्षिण भारत में धान की रोपाई जनवरी के अंत तक जारी रहेगी।
क्यों अहम है अच्छी गेहूं की फसल?

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सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त अनाज उपलब्ध रहेगा
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बाजार में कीमतों पर नियंत्रण बना रहेगा
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दालों और तिलहनों की बेहतर पैदावार से आयात पर निर्भरता घटेगी
कुल मिलाकर तस्वीर सकारात्मक
रबी फसलों की बुवाई अक्टूबर से शुरू होती है और मार्च से कटाई का दौर शुरू हो जाता है। मौजूदा हालात को देखें तो इस बार रबी सीजन किसानों और सरकार दोनों के लिए राहत भरा नजर आ रहा है। अगर मौसम ने आखिरी समय तक साथ दिया, तो 2025-26 का रबी सीजन अच्छी पैदावार और स्थिर बाजार कीमतों की उम्मीद जगा रहा है।
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