Onion Price: महाराष्ट्र में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट के बाद, किसानों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। कृषि मंडियों में मिल रहे बेहद कम दामों से परेशान होकर, किसानों ने हाईवे पर अपने प्याज फेंककर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि मौजूदा कीमतों पर तो खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है, जिससे आर्थिक संकट और गहराता जा रहा है।
मामला महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले में स्थित गंगापुर कृषि उपज मंडी समिति (APMC) का है, जहां प्याज की कीमतों में भारी गिरावट के बाद किसानों का गुस्सा भड़क उठा। मंडी में कीमतें गिरकर मात्र ₹125 से ₹130 प्रति क्विंटल रह गईं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
इस स्थिति से आक्रोशित होकर, प्रदर्शनकारी किसानों ने अपने प्याज सीधे सड़क पर फेंक दिए, जिससे गंगापुर-नाशिक और गंगापुर-वैजापुर हाईवे पर यातायात बाधित हो गया। इस विरोध प्रदर्शन के कारण वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जो लगभग आधे घंटे तक बनी रहीं। इसके बाद, पुलिस और मंडी के अधिकारी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पहुंचे।
प्याज की कीमतें उत्पादन लागत से भी नीचे गिरीं
रिपोर्टों के अनुसार, किसानों का दावा है कि प्याज की खेती तेजी से घाटे का सौदा बनती जा रही है। एक एकड़ में प्याज उगाने की लागत ₹80,000 से ₹100,000 के बीच आती है। इसमें बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और कीटनाशकों पर होने वाला खर्च शामिल है। हालांकि, मंडियों में अभी जो कीमतें मिल रही हैं, उनसे परिवहन और ढुलाई (हैंडलिंग चार्ज) का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। कई किसानों ने बताया कि उन्हें अपने प्याज के लिए मात्र ₹1 से ₹2 प्रति किलोग्राम का भाव मिल रहा है। नतीजतन, महीनों की कड़ी मेहनत के बावजूद, उन्हें अंत में आर्थिक नुकसान ही उठाना पड़ रहा है।
बंपर फसल किसानों के लिए बोझ बन गई
विशेषज्ञों और किसान संगठनों के अनुसार, मौजूदा रबी सीजन में प्याज की पैदावार असाधारण रूप से अधिक हुई है। मंडियों में प्याज की भारी मात्रा में आवक होने से आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) में प्याज की भरमार हो गई है, जिसके कारण कीमतें तेजी से नीचे गिर गई हैं। मंडियों में खरीदारों की कमी और भंडारण सुविधाओं के सीमित होने के कारण, किसान अपनी उपज को बेहद कम कीमतों पर बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं। कई किसानों ने कहा है कि अगर मौजूदा हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले समय में खेती करना और भी मुश्किल हो जाएगा।

निर्यात संकट और बाज़ार की कमज़ोरी का असर
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और निर्यात से जुड़ी समस्याओं का असर प्याज़ के व्यापार पर भी पड़ा है। निर्यात में कमी के कारण देश के भीतर ही प्याज़ का भारी भंडार जमा हो गया है, जिससे घरेलू बाज़ार पर दबाव बढ़ गया है। किसानों का कहना है कि भले ही सरकार ने NAFED के ज़रिए खरीद की घोषणा की है, लेकिन इस पहल का फ़ायदा मंडियों (थोक बाज़ारों) में ठीक से नहीं मिल पा रहा है। कई किसान संगठनों ने आरोप लगाया है कि सरकार की खरीद दरें किसानों की असल उत्पादन लागत से काफ़ी कम हैं।
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किसान सरकार से बड़ी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे
गिरती कीमतों से परेशान किसान अब लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। छत्रपति संभाजीनगर इलाके में विभिन्न किसान संगठनों ने सड़कों को जाम करके और यातायात रोककर आंदोलन किया है। किसान मांग कर रहे हैं कि सरकार प्याज़ के लिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) जैसी कोई व्यवस्था लागू करे और बाज़ार में दखल देकर यह सुनिश्चित करे कि उन्हें उचित मेहनताना मिले।
किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते ज़रूरी कदम नहीं उठाए गए तो हज़ारों किसानों की आर्थिक हालत और भी खराब हो सकती है। महाराष्ट्र में प्याज़ किसानों के बीच यह असंतोष किसी एक ज़िले तक ही सीमित नहीं है। बल्कि, राज्य के कई हिस्सों में किसान इसी समस्या से जूझ रहे हैं। अब सबकी नज़रें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि किसानों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।













