पश्चिमी तट के एक छोटे से गाँव डेयर अम्मार में जैतून की खेती, जो पीढ़ियों से इस क्षेत्र के किसानों का मुख्य व्यवसाय रहा है, इस साल किसी अभूतपूर्व संकट से जूझ रही है। फिलिस्तीनी किसानों के लिए जैतून की खेती सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व का आ...

पश्चिमी तट के एक छोटे से गाँव डेयर अम्मार में जैतून की खेती, जो पीढ़ियों से इस क्षेत्र के किसानों का मुख्य व्यवसाय रहा है, इस साल किसी अभूतपूर्व संकट से जूझ रही है। फिलिस्तीनी किसानों के लिए जैतून की खेती सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व का आधार है। लेकिन इस साल, इजराइली बस्तीवासियों और सेना के बढ़ते दबाव के कारण यहां की फसल बर्बाद हो रही है।
हर साल, डेयर अम्मार के किसान अपने पारंपरिक जैतून के बाग़ों से तेल निकालते हैं, लेकिन इस साल का सीजन कुछ अलग है। इजराइली सैन्य बल और अवैध बस्तीवासियों के हमले ने इस क्षेत्र की फसल को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इजराइली सेना की बंद सैन्य क्षेत्र घोषित करने की नीतियों और बस्तीवासियों के हमलों ने किसानों को उनकी ज़मीन तक पहुँचने से रोक दिया है, जिसके परिणामस्वरूप अधिकांश फसल इस साल नष्ट हो गई।
डेयर अम्मार में इस साल लगभग 80 प्रतिशत जैतून के पेड़ बिना तोड़े रह गए हैं। इजराइली सैन्य और बस्तीवासियों की कार्रवाई के कारण यह बाग़ीचे किसानों के लिए दुर्गम हो गए हैं। सैन्य प्रतिबंध और लगातार हमलों ने उन्हें अपने बाग़ों तक पहुँचने की राह मुश्किल बना दी है। इसके अलावा, जैतून की फसल के बिना, ग्रामीणों की आय का प्रमुख स्रोत भी समाप्त हो गया है।
डेयर अम्मार और आस-पास के इलाकों में इजराइली बसने वाले लगातार फिलिस्तीनी किसानों के खेतों पर हमला करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में, सैन्य और बसने वालों के सहयोग से, कई ज़मीनों पर कब्ज़ा किया गया है, जिससे किसानों को उनकी खेती तक पहुँचने में परेशानी होती है। इस साल भी, कई परिवारों ने अपने बाग़ों से एक भी जैतून नहीं तोड़ा और न ही कोई तेल निकाला।
सिर्फ सैन्य प्रतिबंध ही नहीं, बल्कि इजराइली बसने वाले भी फिलिस्तीनी किसानों को उनकी ज़मीन से निकालने के लिए उनका शिकार करते हैं। किसानों के बाग़ों में घुसकर, वे पेड़ों से जैतून तोड़ने का प्रयास करते हैं और कभी-कभी किसानों पर शारीरिक हमला भी कर देते हैं। यूसुफ दार अल-मूसा जैसे किसान जो अपनी ज़मीन से जुड़ी पीढ़ियों पुरानी यादों को संजोते हैं, आज भी इन हमलों का शिकार हो रहे हैं।
फिलिस्तीनी समाज के लिए जैतून और जैतून का तेल केवल खाद्य पदार्थ नहीं हैं, बल्कि यह उनकी सांस्कृतिक और पारंपरिक धरोहर का हिस्सा है। एक ओर जहां जैतून के तेल से होने वाली आय किसानों के लिए जीवन रेखा है, वहीं दूसरी ओर, यह स्थानीय समाज की एकता का प्रतीक भी है। जैतून की कटाई का समय परिवारों को एकजुट करने, एक साथ काम करने और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने का समय होता है।
इस साल, डेयर अम्मार में कृषि के संकट को लेकर पूरे गाँव में निराशा फैली हुई है। लेकिन इसके बावजूद, गाँव के लोग इस मुश्किल दौर में भी एकजुट होकर संघर्ष कर रहे हैं। हाल ही में, कुछ कार्यकर्ताओं ने इजराइली सैन्य आदेशों के बावजूद जैतून की कटाई शुरू की, और यह दिखाया कि फिलिस्तीनी किसान अपनी ज़मीन और संस्कृति के लिए किस हद तक संघर्ष करने को तैयार हैं।
अभी भी, डेयर अम्मार और आसपास के क्षेत्र में किसानों का प्रतिरोध जारी है। वे चाहे अपनी ज़मीन से वंचित हों, पर उनका हौसला और संघर्ष खत्म नहीं हुआ है। यह संघर्ष सिर्फ कृषि संकट का नहीं, बल्कि एक पूरे समुदाय का है जो अपनी पहचान और अस्तित्व को बचाने के लिए लड़ रहा है।
डेयर अम्मार का जैतून का संकट एक गहरी और गंभीर समस्या को उजागर करता है—किसान अपनी ज़मीन, अपने संसाधनों और अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह संकट केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक भी है। फिलिस्तीनी किसान अब अपनी खेती और संस्कृति की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं, और यह संघर्ष पूरी दुनिया को बताता है कि इस इलाके के लोगों की उम्मीदें और उनकी मेहनत कभी खत्म नहीं हो सकती, भले ही उन्हें कितनी भी मुश्किलों का सामना करना पड़े।
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