भारत में पेट्रोल की कीमतें प्रतिदिन सुबह 6 बजे संशोधित होती हैं। यह व्यवस्था जून 2017 से लागू है जब सरकार ने डायनामिक फ्यूल प्राइसिंग सिस्टम अपनाया था। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में crude oil के उतार-चढ़ाव, रुपये-डॉलर विनिमय दर और केंद्र व राज्य सरकारों के कर इन तीन कारकों पर पेट्रोल की खुदरा कीमत निर्भर करती है। जून 2025 में केंद्र सरकार ने उत्पाद शुल्क में ₹2 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी, जिसका सीधा असर पंप कीमतों पर दिखा।
आज देश के बड़े शहरों में पेट्रोल का रेट कितना है?

देश के अलग-अलग शहरों में पेट्रोल price एकसमान नहीं होता। राज्य सरकारें अपने स्तर पर VAT और सेस लगाती हैं, इसीलिए मुंबई में पेट्रोल दिल्ली से महंगा मिलता है। नीचे दी गई तालिका में प्रमुख शहरों के अनुमानित मौजूदा दर दर्शाए गए हैं।
| शहर | पेट्रोल रेट (₹/लीटर) | राज्य VAT (%) |
|---|---|---|
| दिल्ली | ₹94.72 | 19.40% |
| मुंबई | ₹103.44 | 26.00% |
| चेन्नई | ₹100.85 | 15.00% + सेस |
| कोलकाता | ₹104.95 | 25.00% |
| बेंगलुरु | ₹102.86 | 25.92% |
| हैदराबाद | ₹107.41 | 35.20% |
| जयपुर | ₹104.72 | 31.04% |
| पटना | ₹105.61 | 26.00% |
पेट्रोल की कीमत तय करने में कौन-कौन से फैक्टर काम करते हैं?
पेट्रोल की खुदरा कीमत कई परतों में बनती है। बेस प्राइस, फ्रेट चार्ज, केंद्र का उत्पाद शुल्क (₹19.90/लीटर), डीलर कमीशन और राज्य VAT ये सब मिलकर अंतिम रेट बनाते हैं। दिल्ली में पेट्रोल की बेस कीमत करीब ₹55-58 के आसपास रहती है, लेकिन करों के बाद यह ₹94 के पार पहुंच जाती है। केंद्रीय उत्पाद शुल्क 2022 में ₹9.5 प्रति लीटर घटाया गया था। तब दिल्ली में पेट्रोल ₹105.41 से गिरकर ₹95.41 पर आया था। यही दिखाता है कि कर नीति का असर कितना सीधा और तत्काल होता है।
Crude Oil महंगा होने पर भारत में क्या असर पड़ता है?
भारत अपनी कुल पेट्रोलियम ज़रूरत का लगभग 85% आयात करता है। ब्रेंट क्रूड ऑयल जब $80 प्रति बैरल के ऊपर जाता है, तो घरेलू कीमतों पर दबाव बढ़ता है। 2026 की शुरुआत में crude oil $74-78 प्रति बैरल के दायरे में था यह अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति थी। रुपये की कमज़ोरी भी कीमतें बढ़ाती है। अगर डॉलर के मुकाबले रुपया एक रुपया कमज़ोर हो जाए, तो पेट्रोल लगभग 50-60 पैसे प्रति लीटर महंगा हो सकता है। जनवरी 2026 में रुपया ₹84.3 प्रति डॉलर के करीब था।
Strategic Petroleum Reserve क्या है और क्यों जरूरी है?
स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व (SPR) वह आपातकालीन भंडार है जो युद्ध, प्राकृतिक आपदा या वैश्विक आपूर्ति बाधा की स्थिति में काम आता है। भारत का SPR तीन स्थानों पर है विशाखापट्टनम (1.33 MMT), मंगलुरु (1.50 MMT) और पादुर, कर्नाटक (2.50 MMT)। कुल क्षमता 5.33 मिलियन मेट्रिक टन है जो करीब 9.5 दिनों की खपत के बराबर है। IEA के मानक के अनुसार देशों को 90 दिन का रिज़र्व रखना चाहिए। भारत अभी उससे काफी पीछे है। 2025-26 में सरकार ने चांडीखोल (ओडिशा) और पादुर विस्तार में अतिरिक्त 6.5 MMT क्षमता जोड़ने की योजना घोषित की है। यह निवेश लंबे समय में पेट्रोल कीमतों को बाहरी झटकों से बचाने में मदद करेगा।
अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल इतना महंगा या सस्ता क्यों है?
हैदराबाद में पेट्रोल दिल्ली से ₹12 से अधिक महंगा है। इसकी वजह तेलंगाना का 35.20% VAT है , देश में सर्वाधिक। दूसरी तरफ अंडमान-निकोबार द्वीप में पेट्रोल सब्सिडाइज़्ड दर पर मिलता है। कुछ राज्यों ने विधानसभा चुनाव से पहले VAT घटाया है। उत्तर प्रदेश ने 2021 में VAT में कटौती की थी। यह राजनीतिक अर्थशास्त्र का एक स्पष्ट उदाहरण है जो सीधे उपभोक्ता की जेब से जुड़ा है।
क्या पेट्रोल और डीजल GST के दायरे में आएंगे?
पेट्रोल और डीज़ल अभी तक GST के बाहर हैं। अगर इन्हें 28% GST स्लैब में लाया जाए तो दिल्ली में पेट्रोल ₹75 तक आ सकता है। GST काउंसिल इस मुद्दे पर अब तक सहमति नहीं बना पाई है क्योंकि राज्य सरकारें अपना VAT राजस्व खोना नहीं चाहतीं। 2025-26 में यह बहस फिर ज़ोर पकड़ा, पर कोई निर्णय सामने नहीं आया।
पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के बीच पैसे बचाने के आसान तरीके
टायर में सही हवा का दबाव बनाए रखने से 3-4% ईंधन की बचत होती है। इंजन ऑयल समय पर बदलना, AC का सीमित उपयोग और 60-80 km/h की गति पर गाड़ी चलाना ये तीन उपाय मिलकर महीने में ₹300-500 बचा सकते हैं। को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड से पेट्रोल भरवाने पर HPCL या BPCL स्टेशनों पर ₹1.5 से ₹2.5 प्रति लीटर कैशबैक मिलता है। HDFC-BPCL, ICICI-HPCL जैसे कार्ड इसके उदाहरण हैं।
पेट्रोल की कीमत केवल एक संख्या नहीं है यह crude oil बाज़ार, मुद्रा दर, सरकारी कर नीति और स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व जैसे कारकों का जटिल समीकरण है। उपभोक्ता के तौर पर रोज़ाना अपडेटेड दर देखना, ईंधन बचाने के उपाय अपनाना और सरकारी नीतियों पर नज़र रखना यही व्यावहारिक रास्ता है। GST एकीकरण और SPR विस्तार जैसे दीर्घकालिक सुधार अगर समय पर लागू हों, तो आने वाले वर्षों में कीमतों में स्थिरता की उम्मीद की जा सकती है।













