भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के विशेष एक दिवसीय सत्र के दौरान सोमवार को ‘नारी शक्ति वंदन’ (महिला सशक्तिकरण) पहल पर लंबी चर्चा के बाद महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण (Reservation) से संबंधित एक सरकारी प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। सदन की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उसने लंबे समय तक महिलाओं के अधिकारों को रोककर रखा और उनकी राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किया।
सदन में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस ने वर्षों तक महिलाओं की आकांक्षाओं के साथ अन्याय किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अतीत में लिए गए कुछ संवैधानिक निर्णयों के कारण, महिलाओं को समय पर राजनीतिक प्रतिनिधित्व से वंचित रखा गया। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ लाकर महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।
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परिसीमन प्रक्रिया और संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किए बिना आरक्षण लागू करना संभव नहीं
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आवश्यक परिसीमन प्रक्रिया और संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किए बिना महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना संभव नहीं है। विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए, उन्होंने बताया कि कांग्रेस सत्ता में रहते हुए भी महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने में विफल रही, और अब इस मुद्दे पर केवल राजनीति कर रही है। डॉ. यादव ने पुष्टि की कि महिला सशक्तिकरण भाजपा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में, महिलाओं को स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, जबकि सरकारी नौकरियों में वर्तमान में 35 प्रतिशत आरक्षण कोटा लागू है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य में महिलाएं प्रशासन, राजनीति, शिक्षा और उद्योग सहित हर क्षेत्र में प्रगति कर रही हैं।
गिरगिट की तरह रंग बदलती है कांग्रेस
मुख्यमंत्री ने टिप्पणी की कि कांग्रेस पार्टी ने सत्ता में रहते हुए महिलाओं के लिए आरक्षण के कार्यान्वयन को लगातार बाधित किया, और अब विपक्ष में रहते हुए भी भ्रम फैला रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण के संबंध में कांग्रेस का रुख हमेशा विरोधाभासी रहा है। उन्होंने आगे कहा कि यदि समय पर निर्णय लिए गए होते, तो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं दोनों में महिला प्रतिनिधियों की संख्या में काफी वृद्धि हो सकती थी।
महिला सशक्तिकरण के आँकड़े भी पेश किए
मुख्यमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि महिलाओं के उत्थान के मामले में मध्य प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में से एक है। उन्होंने दोहराया कि राज्य ने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू किया है, साथ ही सरकारी नौकरियों में भी 35 प्रतिशत आरक्षण कोटा दिया है। लाड़ली लक्ष्मी योजना, लाड़ली बहना योजना, स्वयं सहायता समूह, ड्रोन दीदी, बैंक सखी और महिलाओं के लिए रोज़गार की विभिन्न पहलों जैसी योजनाओं का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पूरे राज्य में 65 लाख से ज़्यादा महिलाएं 5 लाख से ज़्यादा स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं। इसके अलावा, लाड़ली बहना योजना के तहत 1.25 करोड़ लाभार्थियों को हर महीने आर्थिक सहायता दी जा रही है।
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महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार के दावे
मुख्यमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। फ़िलहाल, पूरे राज्य में 57 ‘वन स्टॉप सेंटर’ चल रहे हैं और आठ और सेंटर खोलने की मंज़ूरी दे दी गई है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि लड़कियों के साथ यौन अपराध करने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त कानून बनाए गए हैं, और महिलाओं की सुरक्षा के मामले में सरकार कोई भी समझौता नहीं करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने 30 सालों तक महिलाओं के अधिकारों को असल में “लूटा” है।
उन्होंने याद दिलाया कि महिला आरक्षण बिल सबसे पहले 1996 में पेश किया गया था, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने इसे अनिश्चित काल तक लटकाए रखा। दशकों तक, कांग्रेस ने महिला आरक्षण के मुद्दे को महज़ एक राजनीतिक “लॉलीपॉप” से ज़्यादा कुछ नहीं समझा। इसके उलट प्रधानमंत्री मोदी ने पक्का इरादा दिखाते हुए 2023 में लोकसभा में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण बिल) पेश किया। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया कि उसने महिलाओं की क्षमता और उनकी उम्मीदों को असल में “पीठ में छुरा घोंपा” है।

















