राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) शुक्रवार को नासिक में TCS से जुड़े BPO ऑफिस का दौरा करेगा, ताकि यौन उत्पीड़न के कथित मामलों की जांच की जा सके। एक बयान में, आयोग ने कहा कि उसने मीडिया में आ रही गंभीर रिपोर्टों का (अपनी ओर से) संज्ञान लिया है और 17 अप्रैल को मौके पर जाकर जांच करेगा।
बयान में कहा गया, “राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने महाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की BPO यूनिट में महिलाओं के यौन उत्पीड़न की कथित घटनाओं के बारे में मीडिया में आई गंभीर रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान (suo motu cognizance) लिया है।”
इसमें आगे कहा गया, “इस मामले को गंभीरता से लेते हुए, आयोग ने—राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 की धारा 8 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए—इस घटना की विस्तृत जांच करने के लिए एक तथ्य-खोज समिति (fact-finding committee) का गठन किया है। यह समिति 17 अप्रैल को घटना स्थल का दौरा करेगी।”
PTI के अनुसार, इस समिति में बॉम्बे हाई कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश साधना जाधव, हरियाणा के पूर्व DGP बी.के. सिन्हा, सुप्रीम कोर्ट की वकील मोनिका अरोड़ा और NCW की वरिष्ठ समन्वयक लीलाबाती शामिल हैं। यह पैनल घटना से जुड़े हालातों की जांच करेगा और सुविधा केंद्र (facility center) के अधिकारियों की प्रतिक्रिया की समीक्षा करेगा।
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
TCS नासिक में कथित धार्मिक धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है, जहां गुरुवार को एक याचिका दायर की गई। रिपोर्टों के अनुसार, याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने तर्क दिया कि संगठित और धोखे से किए जाने वाले धार्मिक धर्मांतरण संप्रभुता, धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रीय एकता के लिए एक गंभीर खतरा हैं। याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों से ऐसी प्रथाओं पर रोक लगाने के लिए सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।
TCS नासिक मामला क्या है?
नासिक के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में यौन, मानसिक और धार्मिक उत्पीड़न की अलग-अलग घटनाओं के संबंध में FIR की एक चौंकाने वाली श्रृंखला दर्ज की गई है। नासिक पुलिस ने इस मामले में आरोपी कुल आठ व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, एक महिला आरोपी अभी भी फरार है। इस मामले की जांच के लिए एक SIT पैनल का भी गठन किया गया है।
नासिक पुलिस ने TCS से जुड़े एक BPO में कथित कदाचार के मामले से संबंधित विवरण राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के साथ साझा किए हैं, क्योंकि उनका मानना है कि यह मामला केवल ऑफिस परिसर तक ही सीमित नहीं है। राज्य की ATS और खुफिया एजेंसियां संभावित चरमपंथी संबंधों और विदेशी फंडिंग की भी जांच कर रही हैं।
पुलिस कमिश्नर संदीप कर्णिक ने बताया कि एक SIT आठ आरोपी वरिष्ठ कर्मचारियों की जांच कर रही है और किसी भी अंतरराष्ट्रीय संबंध का पता लगाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों से जानकारी मिलने का इंतज़ार कर रही है। 26 मार्च से 3 अप्रैल के बीच, पुलिस ने देवलाली और मुंबई नाका पुलिस स्टेशनों में नौ FIR दर्ज कीं।
ये FIR नौ जूनियर कर्मचारियों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के आधार पर दर्ज की गई थीं, जिनमें उन्होंने यौन शोषण, उत्पीड़न और धार्मिक दबाव का आरोप लगाया था।

















