यह मामला सीधा-सीधा सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि पूरे वैश्विक सिस्टम को हिला देने वाली चेतावनी जैसा लग रहा है। ईरान के वरिष्ठ नेता मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ ने हाल ही में ऐसा संकेत दिया है जिससे साफ लगता है कि अब खेल सिर्फ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य भी रणनीति का हिस्सा बन सकता है। यह वही समुद्री रास्ता है, जिससे दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल, गैस और जरूरी सामान की सप्लाई के लिए निर्भर रहता है।
Bab al-Mandeb क्यों है दुनिया के लिए इतना महत्वपूर्ण?

ग़ालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कुछ ऐसे सवाल उठाए, जिन्होंने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया। उन्होंने पूछा कि आखिर दुनिया की कितनी तेल, LNG, गेहूं, चावल और उर्वरक की सप्लाई इस रास्ते से गुजरती है। साथ ही यह भी इशारा किया कि किन देशों और कंपनियों की सबसे ज्यादा निर्भरता इस स्ट्रेट पर है।
सीधे शब्दों में समझें तो ईरान अब यह आंकलन कर रहा है कि अगर इस रास्ते पर दबाव बनाया जाए, तो किसे सबसे ज्यादा झटका लगेगा। पहले से ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में चल रही तनावपूर्ण स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर भारी असर पड़ा है। ऐसे में अगर बाब अल-मंदेब भी इस टकराव में शामिल होता है, तो यह वैश्विक सप्लाई चेन के लिए बड़ा संकट बन सकता है।
Islamic Revolutionary Guard Corps और Operation True Promise 4

इसी बीच ईरान और उसके सहयोगी बलों ने “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4” के तहत एक और बड़ा हमला शुरू किया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अनुसार, यह कार्रवाई शुक्रवार दोपहर को की गई, जिसे “वेव 93” नाम दिया गया।
इस ऑपरेशन को हसन नसरल्लाह और शेख अहमद यासीन जैसे प्रमुख नेताओं को समर्पित बताया गया है। हमलों का निशाना इज़राइल के उत्तरी और केंद्रीय हिस्सों में मौजूद सैन्य ठिकाने थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेस्टर्न गैलीली, हाइफा, कफर कन्ना और क्रायोट जैसे इलाकों में सैन्य केंद्रों पर सटीक हमले किए गए।
इन हमलों में लंबी दूरी की मिसाइलें, गाइडेड हथियार और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। ईरानी सैन्य नेतृत्व का कहना है कि यह अभियान लगातार और बिना रुके जारी रहेगा।
ईरान-अमेरिका-इजराइल टकराव की नई दिशा

यह ताजा हमला उस बड़े संघर्ष का हिस्सा है, जो फरवरी के अंत में हुए हमले के बाद और तेज हो गया था। उस हमले में ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मारे गए थे। ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मानते हुए जवाबी कार्रवाई कर रहा है।
तेहरान का दावा है कि उसके जवाबी हमलों का मकसद सिर्फ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना है, जबकि दूसरी तरफ से ईरान के नागरिक इलाकों और ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले के हमलों में सैकड़ों आम नागरिकों की जान गई, जिनमें कई बच्चे भी शामिल थे।
IRGC का कहना है कि उनकी हालिया कार्रवाई ने अमेरिका और इजराइल को भारी नुकसान पहुंचाया है और यह दिखा दिया है कि क्षेत्र में उनकी सैन्य रणनीति अब उतनी प्रभावी नहीं रही।
क्या दुनिया को बड़ा झटका लगने वाला है?
अगर हालात इसी तरह आगे बढ़ते हैं और बाब अल-मंदेब जैसे अहम समुद्री रास्ते भी इस संघर्ष का हिस्सा बनते हैं, तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कीमतों से लेकर खाने-पीने की चीजों तक, हर चीज महंगी हो सकती है।
कुल मिलाकर, ईरान का यह नया संकेत सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक बड़ा रणनीतिक इशारा है जो आने वाले दिनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा दोनों को गहराई से प्रभावित कर सकता है।

















