दतिया। दिल्ली MP-MLA कोर्ट ने बुधवार को मध्य प्रदेश के दतिया से कांग्रेस विधायक (Congress MLA Sentenced) राजेंद्र भारती (Rajendra Bharti) को लैंड डेवलपमेंट बैंक से जुड़े एक मामले में दोषी ठहराया। कोर्ट ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत दोषी पाया। कोर्ट ने राजेंद्र भारती को तिहाड़ जेल भेजने का आदेश दिया है। विधायक राजेंद्र भारती ने बैंक में अपनी मां के नाम पर तीन साल की अवधि के लिए 10.50 लाख रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) खुलवाई थी, जिस पर 13.50% की दर से ब्याज मिल रहा था। आरोप है कि बाद में FD की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 15 साल कर दी गई थी।
इस मामले के संबंध में बैंक कर्मचारी नरेंद्र सिंह ने कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए, कोर्ट ने इसे धोखाधड़ी का मामला माना और एक औपचारिक केस दर्ज करने का आदेश दिया। दतिया से कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अशोक डांगी ने कहा कि कोर्ट ने अभी केवल विधायक राजेंद्र भारती को दोषी ठहराया है। कोर्ट की ओर से अभी तक यह जानकारी नहीं मिली है कि उन्हें क्या विशिष्ट सज़ा या दंड दिया गया है।
25 साल पहले की गई अनियमितताएं
यह मामला लगभग 25 साल पुराना है, उस समय जब पूर्व विधायक राजेंद्र भारती दतिया के जिला सहकारी कृषि और ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे। अपने कार्यकाल के दौरान 1998 में उन्होंने अपनी दिवंगत मां, सावित्री देवी के नाम पर 10 लाख रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) खुलवाई थी, जिसकी परिपक्वता अवधि तीन साल थी। उस समय इस जमा राशि पर 13.5% की वार्षिक ब्याज दर मिल रही थी।
आरोप है कि अध्यक्ष पद पर रहते हुए, उन्होंने नियमों का उल्लंघन करते हुए FD पर मिलने वाले ब्याज को हर साल अलग से निकाल लिया, जबकि सामान्य नियमों के अनुसार, ब्याज और मूल राशि दोनों का भुगतान केवल जमा राशि की परिपक्वता (मैच्योरिटी) पर ही किया जाता है। इस प्रकार तीन साल की अवधि के दौरान स्थापित नियमों का उल्लंघन करते हुए भुगतान अधिकृत किए गए थे।

दस्तावेज़ों में हेरफेर करके FD की अवधि बढ़ाई गई
आरोप है कि 2001 में जब फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD) मैच्योरिटी के करीब थी और बाज़ार में ब्याज दरें कम हो गई थीं तो राजेंद्र भारती ने अपने सरकारी पद का दुरुपयोग करते हुए दस्तावेज़ों में हेरफेर किया और FD की अवधि को तीन साल के लिए और बढ़ा दिया। इसके बाद, वह हर साल 13.5% की बढ़ी हुई दर से ब्याज लेते रहे।
आगे यह भी आरोप है कि 2004 में FD की अवधि को लगभग 10 साल और बढ़ाने के लिए दस्तावेज़ों में एक बार फिर बदलाव किए गए, जिससे यह पक्का हो गया कि उन्हें ज़्यादा ब्याज मिलता रहे। यह पूरी साज़िश जाली दस्तावेज़ों और सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव करके अंजाम दी गई थी।
2003 में गड़बड़ियां सामने आईं, जांच के दौरान सबूत मिले
बैंक मैनेजमेंट को 2003 में इन गड़बड़ियों के बारे में पता चला, जिसके बाद एक अंदरूनी जांच शुरू की गई। जांच में यह नतीजा निकला कि राजेंद्र भारती और उनकी माँ, दोनों ही दोषी थे। इसके बाद, यह मामला उपभोक्ता फ़ोरम और दतिया में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत में भेजा गया।
अदालत में दस्तावेज़ी सबूत और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए गए। शुरुआती सुनवाई के बाद, अदालत ने पुलिस जांच का आदेश दिया और निर्देश दिया कि धोखाधड़ी, जालसाज़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साज़िश (IPC की धारा 420, 467, 468, 471, 409 और 120B) के आरोपों के तहत मामला दर्ज किया जाए। जाँच के दौरान, बैंक के एक कर्मचारी को भी आरोपी बनाया गया।
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हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई
इस मामले में राजेंद्र भारती ने अपने ऊपर लगे आरोपों को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कई याचिकाएं दायर कीं, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की और दलील दी कि मध्य प्रदेश राज्य के अंदर निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं होगी। नतीजतन, यह मामला दिल्ली की विशेष सत्र अदालत में भेज दिया गया।
शुरुआत में यह मामला दतिया अदालत में चला। इसके बाद सुनवाई ग्वालियर की MP-MLA अदालत में हुई और बाद में दिल्ली में हुई। काफी लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद, अदालत ने अब इस मामले में दोषी होने का फ़ैसला सुनाया है।

















