State

Naxal-Free India: नक्सलवाद खात्मे के लिए सरकार के प्रयासों पर लोकसभा में 31 मार्च को होगी चर्चा

Amit Shah

नई दिल्ली। लोकसभा में सोमवार को नक्सलवाद (Naxal-Free India) को खत्म करने के लिए सरकार के प्रयासों पर चर्चा होगी। इस चर्चा के दौरान यह साफ हो जाएगा कि गृह मंत्री देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का अपना वादा पूरा कर पाए हैं या नहीं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले साल नक्सल-मुक्त भारत के लिए 31 मार्च 2026 की समय-सीमा की घोषणा की थी। सोमवार को संसद का निचला सदन देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त कराने के लिए सरकार की पहलों पर चर्चा करेगा।

कार्यसूची के अनुसार, शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे लोकसभा के नियम 193 के तहत एक अल्पकालिक चर्चा का प्रस्ताव रखेंगे और उसे शुरू करेंगे। बता दें कि कई मौकों पर अमित शाह ने 31 मार्च, 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह से खत्म करने के प्रति केंद्र की प्रतिबद्धता को दोहराया है।

 

माओवादियों पर कुल ₹66 लाख का इनाम

पिछले एक साल में, कई माओवादी नेताओं ने आत्मसमर्पण किया है, अपने हथियार डाल दिए हैं और मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं। इनमें सबसे हालिया मामला बेहद वांछित माओवादी नेता सुकरू का है, जिसने 25 मार्च को चार अन्य लोगों के साथ ओडिशा पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। ADG (नक्सल विरोधी अभियान) संजीव पांडा ने बताया कि इन माओवादियों पर कुल 66 लाख रुपए का इनाम था। उन्होंने पांच हथियार भी सौंपे, जिनमें एक AK-47 राइफल, एक INSAS राइफल और एक सिंगल-शॉट बंदूक शामिल थी।

 

Read Also- जबलपुर से नागपुर, भोपाल और सिवनी का सफ़र होगा महंगा, सालाना पास की कीमतों में भी इज़ाफ़ा

 

आने वाले दिनों में तेज़ होंगे नक्सल विरोधी अभियान

ADG (नक्सल विरोधी अभियान) संजीव पांडा ने कहा कि माओवादियों की संख्या अब काफ़ी कम हो गई है। कंधमाल ज़िले में अब सिर्फ़ 8-9 माओवादी बचे हैं। आने वाले दिनों में, हम अपने नक्सल विरोधी अभियानों को और तेज़ करेंगे ताकि 31 मार्च तक हमें ठोस नतीजे मिल सकें। मैं बचे हुए माओवादियों से अपील करता हूँ कि वे पुलिस के सामने सरेंडर कर दें, और मैं उन्हें भरोसा दिलाता हूँ कि हम उनके फ़ायदे के लिए सरेंडर से जुड़ी सभी नीतियों को लागू करेंगे।

 

छत्तीसगढ़ में पप्पा राव ने सरेंडर किया

IG बस्तर पी. सुंदरराज ने बताया कि छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में जो कुख्यात दंडकारण्य जंगल क्षेत्र का हिस्सा है और जिसे नक्सल आंदोलन के मुख्य केंद्रों में से एक माना जाता है। दंडकारण्य स्पेशल ज़ोनल कमेटी (DKSZC) के सदस्य और दक्षिण सब-ज़ोनल ब्यूरो के प्रभारी पप्पा राव ने 17 मार्च को 17 अन्य माओवादी कैडरों के साथ सरेंडर कर दिया।

IG पी. सुंदरराज ने कहा कि दंडकारण्य में माओवादी आंदोलन के इतिहास में पहली बार, नक्सल संगठन असल में बिना नेता के हो गया है। नक्सल कार्यकर्ताओं का पुनर्वास और उन्हें मुख्यधारा में शामिल करना ही हाल के बड़े पैमाने पर हुए सरेंडरों के पीछे मुख्य वजह रही है, जिसमें CPI (माओवादी) के कई बड़े नेताओं का सरेंडर भी शामिल है।

Share post: facebook twitter pinterest whatsapp