State

Parents’ Care Bill: अब अपने माता-पिता की उपेक्षा की तो ख़ैर नहीं, तेलंगाना सरकार ने बिल किया पास

Parents' Care Bill

हैदराबाद। अपने माता-पिता की उपेक्षा करने वालों की तेलंगाना सरकार सख्त हो गई। अगर अब माता-पिता की उपेक्षा की तो खैर नहीं होगी। दरअसल, कर्मचारियों के लिए अपने माता-पिता की देखभाल के संबंध में स्पष्ट जिम्मेदारियां तय करने और उपेक्षा को रोकने के लिए बनाए गए निगरानी तंत्र को कानूनी समर्थन देने के उद्देश्य से तेलंगाना सरकार ने रविवार को एक महत्वपूर्ण बिल (Parents’ Care Bill) पास किया।

सरकार ने कहा कि यह कानून सामाजिक सुधार की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण और गरिमा को मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण विधायी कदम उठाते हुए, तेलंगाना विधानसभा ने ‘तेलंगाना कर्मचारी जिम्मेदारी और माता-पिता देखभाल निगरानी बिल, 2026’ पास किया। यह बिल समाज कल्याण मंत्री, अड्लूरी लक्ष्मण कुमार द्वारा पेश किया गया था।

 

निजी कर्मचारी, अधिकारी और जन प्रतिनिधि भी इसके दायरे में

स्पीकर की सहमति से मंजूर किए गए इस बिल का उद्देश्य बुजुर्ग माता-पिता के अधिकारों और भलाई की रक्षा के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करना है। यह पारिवारिक जिम्मेदारी को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस कानून का दायरा केवल सरकारी कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं है। इस बिल में निजी क्षेत्र के कर्मचारियों, अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों जैसे विधायकों, MLCs, पार्षदों, नगर परिषद सदस्यों और सरपंचों को भी शामिल किया गया है।

Parents' Care Bill

Parents’ Care Bill

इस बिल में क्या प्रावधान हैं?

  • यह कानून कर्मचारियों की अपने माता-पिता की देखभाल और भरण-पोषण के संबंध में जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है। यह बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य सेवा, आवास और वित्तीय सुरक्षा जैसे आवश्यक पहलुओं को सुनिश्चित करने में जवाबदेही अनिवार्य करता है।
  • उपेक्षा के मामलों से निपटने के लिए भी प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिसमें ऐसे तंत्र स्थापित किए गए हैं जो अधिकारियों को जब भी आवश्यक हो, हस्तक्षेप करने और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने का अधिकार देते हैं।
  • महत्वपूर्ण बात यह है कि यह बिल माता-पिता को अपने बच्चों से भरण-पोषण मांगने का अधिकार देता है और शिकायतों के निवारण के लिए एक औपचारिक तंत्र प्रदान करता है।
  • नया बिल यह निर्धारित करता है कि कोई भी कर्मचारी जो अपने माता-पिता की उपेक्षा करता हुआ पाया जाएगा, उसके कुल वेतन से 15% या ₹10,000 जो भी कम हो की कटौती की जाएगी। काटी गई राशि उनके माता-पिता को सौंप दी जाएगी।
  • सरकार का दावा है कि यह बिल बुजुर्गों को बेसहारा छोड़ने और उनकी उपेक्षा से संबंधित बढ़ती चिंताओं का समाधान करेगा, साथ ही पारिवारिक व्यवस्था के नैतिक और सामाजिक ताने-बाने को भी मजबूत करेगा।

 

अपने माता-पिता की देखभाल करना एक नैतिक कर्तव्य

बिल पेश करते समय मंत्री ने क्या कहा? इस मौके पर बोलते हुए, कल्याण मंत्री लक्ष्मण कुमार ने कहा कि अपने माता-पिता की देखभाल करना एक बुनियादी नैतिक कर्तव्य है। बदलते सामाजिक माहौल के बीच, पारंपरिक पारिवारिक मूल्यों पर दबाव पड़ रहा है। इसलिए, इन जिम्मेदारियों को कानूनी सहारा देना ज़रूरी हो गया है।

यह कानून मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के मार्गदर्शन और प्रेरणा से आगे बढ़ाया गया है। मंत्री ने आगे कहा कि इस कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक खास निगरानी तंत्र बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि प्रभावित वरिष्ठ नागरिकों को समय पर न्याय दिलाने के लिए शिकायतें सुनने और उन्हें सुलझाने का एक व्यवस्थित ढांचा तैयार किया जाएगा।

 

Read Also- हवाई यात्रियों के लिए राहत भरी खबर, अब 60% सीटों पर नहीं लगेगा कोई एक्स्ट्रा चार्ज

 

कानून का मकसद और बुजुर्गों की उम्मीदें

परिवार द्वारा उपेक्षा की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए, उम्मीद है कि यह कानून पूरे समाज में जिम्मेदारी और जवाबदेही की भावना पैदा करेगा। सिर्फ़ कर्मचारियों के लिए ही नहीं, बल्कि यह उम्मीद की जाती है कि यह कानून सभी परिवारों के लिए एक व्यापक नैतिक और कानूनी मानक के तौर पर काम करेगा।

इस बिल के पास होने को गर्व की बात बताते हुए, मंत्री लक्ष्मण कुमार ने बुजुर्गों की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की पक्की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने भरोसा जताया कि यह कानून तेलंगाना में पारिवारिक ढांचे को मज़बूत करने में योगदान देगा और यह सुनिश्चित करेगा कि वरिष्ठ नागरिक गरिमा और देखभाल के साथ अपना जीवन जी सकें।

 

Share post: facebook twitter pinterest whatsapp