खरीफ सीजन से ठीक पहले किसानों के लिए एक नई चिंता सामने आ रही है। खाद (फर्टिलाइज़र) की सप्लाई पर खतरा मंडराने लगा है, और इसकी बड़ी वजह है पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत की खेती काफी हद तक इस क्षेत्र पर निर्भर है, ऐसे में अगर हालात बिगड़े तो इसका सीधा असर किसानों की लागत और उत्पादन दोनों पर पड़ सकता है।
खाद सप्लाई पर मंडराया खतरा

CareEdge Ratings की रिपोर्ट के अनुसार भारत अपने कुल फर्टिलाइज़र आयात का करीब 26% हिस्सा पश्चिम एशिया से लाता है। यानी हर चौथा बैग खाद कहीं न कहीं उसी इलाके से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा जॉर्डन, रूस, मोरक्को और चीन जैसे देश भी सप्लाई में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन पश्चिम एशिया की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा होने के कारण वहीं का तनाव सबसे बड़ा जोखिम बन गया है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य बना बड़ी चिंता
इस पूरे मामले में सबसे अहम भूमिका निभा रहा है Strait of Hormuz। यह दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से तेल और गैस की भारी आवाजाही होती है। भारत के लिए यह और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश के लगभग 40% कच्चे तेल का आयात इसी रास्ते से होता है। अगर यहां रुकावट आती है, तो सिर्फ ईंधन ही नहीं बल्कि खाद उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है।
LNG महंगा तो खाद भी महंगा
खाद बनाने में LNG (गैस) एक जरूरी कच्चा माल है। अगर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है, तो LNG की कीमतें तेजी से ऊपर जा सकती हैं। इसका सीधा असर फर्टिलाइज़र की कीमत पर पड़ेगा। ऐसी स्थिति में या तो किसानों को महंगा खाद खरीदना पड़ेगा या फिर सरकार को सब्सिडी बढ़ानी पड़ेगी, दोनों ही हालात चुनौतीपूर्ण हैं।
खरीफ सीजन पर असर की आशंका
खास बात यह है कि यह पूरा संकट ऐसे समय में सामने आ रहा है, जब खरीफ बुवाई की तैयारी चल रही है। ऊपर से मौसम को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है, खासकर El Niño की आशंका के चलते। अगर खाद समय पर और सही दाम पर नहीं मिला, तो इसका असर सीधे उत्पादन पर पड़ेगा, जिससे किसानों की आमदनी भी प्रभावित हो सकती है।
किसानों और सरकार दोनों के लिए चुनौती
यह स्थिति सिर्फ किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि सरकार के लिए भी एक बड़ा टेस्ट है। एक तरफ सप्लाई चेन को संभालना है, तो दूसरी तरफ बढ़ती लागत को कंट्रोल करना है।
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