मराठा मंदिर : एक ऐसा थिएटर जहां दादा-दादी की फिल्में आज भी स्क्रीन पर चल रही हैं। जहां हर दिन एक प्रेम कहानी दोहराई जाती है। जहां सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं परंपरा बन चुका है। जी हां, हम बात कर रहे हैं मुंबई के मराठा मंदिर थिएटर की। मुंबई का मराठा मंदिर केवल एक सामान्य थिएटर नहीं है बल्कि यह थिएटर भावनाओं से जुड़ा हुआ है।
80 साल पुराने थिएटर ने बॉलीवुड के बदलते दौर को देखा है। जब सारे थिएटर मल्टीप्लेक्स में बदल चुके तब यह थिएटर आज भी शान से सिंगल स्क्रीन थिएटर की सूची में कायम है। इस थिएटर ने जाने कितने सुपरस्टार के उतार चढ़ाव देखे हैं। दर्शकों का हर स्वभाव देखा है। लेकिन इस थिएटर की पहचान बनी दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे मूवी से, जो यहां पिछले 30 साल से लगातार चल रही है। और इस थिएटर ने इस बार अपनी 30 साल की परंपरा के विपरीत जाने का फैसला भी कर लिया है।
क्या है मराठा मंदिर और क्या है इसकी खासियत?
मराठा मंदिर मुंबई सेंट्रल इलाके में स्थित एक प्रतिष्ठित सिंगल स्क्रीन थिएटर है। इस थिएटर की नींव 16 अक्टूबर 1945 को रखी गई थी। यह वह दौर था जब भारत में अंग्रेज़ो का शासन था। सिनेमा लोगों के लिए उस दौरान सबसे बड़ा और एक मात्र मनोरंजन हुआ करता था। मराठा मंदिर उस युग में अपनी जगह कायम कर चुका था। इस थिएटर में एक बहुत बड़ा विशाल हॉल, ऊंची छत और लगभग 1000 लोगों की सीटिंग क्षमता है। आज जब मल्टीप्लेक्स का जमाना आ गया है। तब भी मराठा मंदिर उसी शान से खड़ा है और लोगों को सिंगल स्क्रीन बड़े पर्दे का अनुभव देता है।

मराठा मंदिर ने देखें है बड़ी-बड़ी फिल्मों के प्रीमियर
1940 से 1970 के दशक में मराठा मंदिर बॉलीवुड का एक ऐसा थिएटर हुआ करता था जहां प्रीमियर शो हुआ करते थे। जी हां, बड़ी-बड़ी फिल्मों की फर्स्ट स्क्रीनिंग इस थिएटर ने देखी है। यह थिएटर एक समय ऐसी पहचान रखता था कि यहां बड़े-बड़े सितारे फिल्म रिलीज करने के लिए आते थे। मीडिया का जमावड़ा यहां लगता था। लोगों की भीड़ सितारों को देखने के लिए आती थी।
समय बदला नए थिएटर आगे लेकिन मराठा मंदिर ने अपनी पहचान को खत्म नहीं होने दिया। आज भी जनता के बीच इस थिएटर ने अपनी पहचान जनता के थिएटर के रूप में बना कर रखी है। जहां एक साधारण व्यक्ति कम से कम दाम में अपनी पसंदीदा फिल्म देख सकता है।
DDLJ ने बना दिया इस थिएटर को अमर
मराठा मंदिर को आज लोग DDLJ मूवी की वजह से जानते हैं। 1995 में रिलीज हुई इस मूवी को मराठा मंदिर ने ऐसे पकड़ लिया है कि यहां रोज एक तय समय पर यह मूवी दिखाई जाती रही है
पिछले 30 सालों से लगातार मराठा मंदिर में DDLJ का एक शो चलता है। दुनिया की सबसे लंबी चलने वाली फिल्मों में DDLJ मराठा मंदिर की वजह से ही शामिल हुई है। मुंबई में घूमने के लिए आने वाले कई लोग मराठा मंदिर जैसे हिस्टोरिकल थिएटर में DDLJ देखने के लिए आते हैं।
मराठा मंदिर की कमाई कितनी और कैसे होती है?
मराठा मंदिर की कमाई का मॉडल बाकी मल्टीप्लेक्स या सिनेमाघर से काफी अलग है। मराठा मंदिर में टिकट बिक्री से ही मुख्य आय होती है। यहां रोजाना डीडीएलजे का एक शो चलता है जिसे देखने के लिए सैकड़ो लोग आते हैं। नई फिल्मों की रिलीज के समय भी यहां जबरदस्त कमाई होती है। हालांकि मराठा मंदिर के टिकट के दाम मल्टीप्लेक्स की तरह हाई प्राइस नहीं होते। निम्न वर्गीय परिवारों के दर्शकों के लिए यह एक सबसे सही जगह है। यही वजह है कि मल्टीप्लेक्स के दौर में भी आज भी यह थिएटर फाइनेंशली रूप से काफी मजबूत है।
धुरंधर 2 बदल दिया मराठा मंदिर का इतिहास
आज तक मराठा मंदिर ने किसी भी फिल्म के लिए DDLJ फ़िल्म का शेड्यूल नहीं बदला था। परंतु धुरन्धर 2 की लम्बी टाइमिंग की वजह से मराठा मंदिर के मालिकों ने डीडीएलजे का पुराना फिक्स टाइम बदल दिया है। बता दे इससे पहले DDLJ रोजाना सुबह 11:30 शुरू होती थी। परंतु अब डीडीएलजे के शो के समय को 11:30 बजे से 10:00 कर दिया गया है।
धुरन्धर 2 फिल्म की लंबाई काफी बड़ी है। ऐसे में पर्याप्त शो को टाइम मिल सके और नई फिल्म को ज्यादा स्लॉट मिल सके इसी बात को ध्यान में रखते हुए मराठा मंदिर ने DDLJ के शेड्यूल को बदला है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज भी डीडीएलजे फिल्म को इस थिएटर से हटाया नहीं गया है। हालांकि 30 सालों में पहली बार ऐसा हुआ है कि मराठा मंदिर में DDLJ का फिक्स टाइम बदला है जो कि अपने आप में एक ऐतिहासिक घटना है।
मराठा मंदिर केवल एक थिएटर नहीं है बल्कि भारतीय सिनेमा का जीवित इतिहास है। DDLJ जैसी प्यार की कहानी को इस थिएटर ने पिछले 30 सालों से अमर बनाए रखा है। और धुरंधर 2 को पर्याप्त जगह देने के लिए इस थिएटर में DDLJ का 30 साल पुराना शेड्यूल भी बदलने का निर्णय लिया है। पुरानी यादों और नए जोश के बीच मराठा मंदिर आज भी वही संदेश दे रहा है कि ‘ सिनेमा बदल सकता है, लेकिन उसका जादू कभी खत्म नहीं होता’

















