LPG के बाद अब इंटरनेट संकट : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब केवल तेल और गैस तक सीमित नहीं रह गया। असल में भारत में LPG की सप्लाई को लेकर भयंकर चिंता पसर गई है। इसी चिंता ने अब एक और नए संकट का दरवाजा खोल दिया है। जिसके बाद असर सीधा हमारे इंटरनेट और डिजिटल इंडिया मिशन पर भी पड़ सकता है। मतलब ईरान-इजराइल युद्ध अब LPG के बाद अब इंटरनेट संकट लाने वाला है।
जी हां, जानकारों की माने तो LPG गैस की कमी इसी प्रकार बनी रही तो मोबाइल टावर बनना बंद हो जाएंगे। 4G से 5G अपग्रेड की सुविधा भी प्रभावित हो जाएगी जिससे इंटरनेट सेवाएं कई क्षेत्रों में बाधित भी हो सकती हैं। हालांकि सुनने में यह बात जरूर अजीब लगती है लेकिन LPG का सीधा कनेक्शन टेलीकॉम सेक्टर से भी है। मतलब मिडल ईस्ट के बीच का तनाव केवल भारतीय घरों के किचन पर नहीं बल्कि हमारे हाथ में दिन भर रहने वाले मोबाइल पर भी पढ़ने वाला है।

क्या है LPG के बाद अब इंटरनेट संकट और कैसे पड़ेगा इसका असर?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि युद्ध की वजह से LPG सप्लाई लंबे समय तक बाधित रहने वाला है। यदि यह बाधा ऐसे ही चलती रही तो इसका सीधा असर टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर यानी मोबाइल टॉवर बनाने वाली इंडस्ट्री पर पड़ेगा। जिसकी वजह से इंटरनेट धीमा या बंद भी हो सकता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, LPG के बाद अब इंटरनेट संकट नही आने वाला।
परंतु लोगों के अंदर अब प्रश्न उठने लगा है कि आखिर LPG जो रसोई घर में इस्तेमाल होता है वह मोबाइल नेटवर्क से कैसे कनेक्शन रखता है? लेकिन असल में टेलीकॉम सेक्टर में LPG का एक डायरेक्ट उपयोग होता है जिसकी वजह से यदि टेलीकॉम सेक्टर से जुड़ी इंडस्ट्री में LPG सप्लाई कम हो गई तो मोबाइल टॉवर बनाने वाली कंपनियों की गतिविधि रुक जाएगी। मतलब नए नेटवर्क में विस्तार देरी से होगा और नेटवर्क अपग्रेड का काम ठप्प जाएगा।

LPG गैस और मोबाइल नेटवर्क के बीच क्या कनेक्शन है?
पहली नजर में यदि कोई देखे तो उसे समझ में नहीं आएगा कि आखिर LPG गैस और मोबाइल नेटवर्क का आपस में क्या कनेक्शन है? लेकिन टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर में LPG का इस्तेमाल होता है। मोबाइल टॉवर बनाने में LPG गैस की जरूरत पड़ती हैम यह गेलवेनाइजेशन की प्रक्रिया में काम आती है। इस प्रक्रिया में टॉवर बनाने वाली धातु को बहुत ज्यादा तापमान पर गर्म किया जाता है ताकि इसमें जंग ना लगे।
कई फैक्ट्रियों में गर्मी पैदा करने के लिए LPG से चलने वाली भट्टियों का इस्तेमाल होता है। यदि एलपीजी सप्लाई कम होता जाता है तो इन फैक्ट्री में स्टील स्ट्रक्चर की गेलवेनाइजेशन प्रक्रिया रुक जाएगी। यदि गेलवेनाइजेशन प्रक्रिया रुक गई तो टेलीकॉम टावर निर्माण की गति पर सीधा असर पड़ेगा जिससे नए मोबाइल टॉवर बनने में देरी होगी। नए इलाकों में नेटवर्क विस्तार रुक जाएगा। साथ ही 4G से 5G नेटवर्क अपग्रेड करना मुश्किल हो जाएगा। मतलब LPG के बाद अब इंटरनेट संकट वाली बात कुछ हद तक सच हो जाएगी।
LPG के बाद अब इंटरनेट संकट का दावा कितना सच है?
असल में LPG का मौजूदा संकट फिलहाल उतना गहराया नहीं है कि जिससे इंटरनेट बंद हो जाए और इंटरनेट अचानक बंद नहीं होगा। यदि LPG सप्लाई बाधित होता भी है तो आने वाले समय में नए टॉवर नहीं बनेंगे। नए एरियाज में नेटवर्क नहीं पहुंचेगा और अपग्रेड की सुविधा रुक जाएगी। लेकिन पहले से लगे टॉवर इंटरनेट कनेक्शन देते रहेंगे।
क्या कहना है सरकार और इंटरनेट कंपनियों का ?
फिलहाल सरकार और कंपनियां आपस में मिलकर इस मुसीबत का हल निकालने में लगी हुई हैं। हालांकि मौजूदा लगे हुए टॉवर पर संकट नहीं है। लेकिन असली चिंता भविष्य की है। अगर भविष्य में यह संकट लंबे समय तक चला तो टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने वाली कंपनियों का उत्पादन प्रभावित होगा। लेकिन विशेषज्ञों की माने तो यह स्थिति लंबे समय तक नहीं रहने वाली। जल्द ही इसका हल निकाल लिया जाएगा।
कुल मिलाकर मिडल-ईस्ट में जारी तनाव की वजह से LPG सप्लाई पर दबाव जरूर बना है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं की LPG के बाद अब इंटरनेट संकट आने वाला है। हालांकि LPG संकट लंबा चला तो नेटवर्क विस्तार की रफ्तार धीमी हो जाएगी। लेकिन मौजूदा नेटवर्क बिना रोक-टोक के मिलता रहेगा। हालांकि इस संकट ने भारत को आईना जरूर दिखा दिया है, कि आज भी भारत को ऊर्जा संकट से निपटने के लिए आत्मनिर्भर होना जरूरी है।












