Agriculture

Womens Day 2026: कृषि के क्षेत्र में झंडे बुलंद कर रहीं महिलाएं, साइंस और खेती के क्षेत्र में अहम योगदान

Womens Day 2026

Womens Day 2026: भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहां पुरुष ही नहीं बल्कि महिला किसान भी बुलंदियों के झंडे गाड़ रही हैं। महिलाएं हमेशा से कड़ी मेहनत और लगन की मिसाल रही हैं। चाहे खेतों में काम करना हो या लैब में साइंटिफिक रिसर्च करना हो, महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। कई भारतीय महिला साइंटिस्ट और किसानों ने न सिर्फ अपने काम से समाज को आकार दिया है बल्कि देश के विकास में भी अहम योगदान दिया है।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 (Womens Day 2026) के मौके पर आइए ऐसी ही कुछ प्रेरणा देने वाली महिलाओं के बारे में जानें, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से साइंस और खेती के क्षेत्र में इतिहास रचा है। ई.के. जानकी अम्मल, अन्ना मणि और असीमा चटर्जी जैसी महिला साइंटिस्ट से लेकर खेतों में काम करने वाली महिला किसानों तक, उनकी कड़ी मेहनत और कामयाबियों ने देश के विकास को आकार दिया है।

 

गन्ने पर रिसर्च करती साइंटिस्ट

ई.के. जानकी अम्मल एक मशहूर भारतीय साइंटिस्ट और बॉटनिस्ट थीं। उन्होंने अपनी ज़िंदगी का ज़्यादातर समय पौधों और फसलों पर रिसर्च करने में लगाया। गन्ने की किस्मों पर उनका काम खास तौर पर अहम माना जाता है। उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि बेहतर और ज़्यादा प्रोडक्टिव गन्ने की किस्में कैसे डेवलप की जाएं। जानकी अम्मल की रिसर्च ने साइंटिस्ट्स को नई और मज़बूत पौधों की किस्में डेवलप करने के लिए इस्तेमाल होने वाले साइंटिफिक प्रोसेस को समझने में मदद की।

उनके काम ने गन्ने की ऐसी किस्में डेवलप करने में मदद की जो ज़्यादा पैदावार वाली थीं और अलग-अलग मौसम के लिए अच्छी थीं। इस योगदान से किसानों को सीधे तौर पर फ़ायदा हुआ।

 

 

मौसम की जानकारी में बड़ा योगदान

अन्ना मणि एक मशहूर भारतीय मौसम विज्ञानी थीं। वह भारत की पहली जानी-मानी महिला मौसम विज्ञानी में से एक थीं। उन्होंने मौसम से जुड़ी कई मशीनों और इंस्ट्रूमेंट्स को डेवलप करने में योगदान दिया। उनके काम से मौसम की ज़्यादा सही जानकारी मिली। मौसम की सही जानकारी किसानों के लिए बहुत ज़रूरी है, जो इसका इस्तेमाल खेती के फ़ैसले लेने के लिए करते हैं।

 

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पौधों से बनी दवाओं पर काम करने वाली एक साइंटिस्ट

असिमा चटर्जी एक मशहूर भारतीय साइंटिस्ट थीं। साइंस के क्षेत्र में उनके काम ने देश का नाम रोशन किया। वह डॉक्टर ऑफ़ साइंस (D.Sc.) की डिग्री पाने वाली पहली भारतीय महिला साइंटिस्ट में से एक थीं। असीमा चटर्जी ने खास तौर पर पौधों से बनी दवाओं पर रिसर्च की।

उन्होंने अलग-अलग पौधों में मौजूद उन चीज़ों को समझने की कोशिश की जिनका इस्तेमाल बीमारियों के इलाज के लिए किया जा सकता है। उनकी रिसर्च ने साइंटिस्ट्स को मलेरिया और मिर्गी जैसी बीमारियों के लिए दवाएँ बनाने में मदद की।

अपने काम से, उन्होंने यह भी दिखाया कि हमारे आस-पास पाए जाने वाले कई पौधों में दवा वाले गुण होते हैं। अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो उनका इस्तेमाल कई तरह की दवाएँ बनाने के लिए किया जा सकता है।

 

खेती में महिला किसानों की भूमिका

आज, भारत में बड़ी संख्या में महिलाएँ खेती से जुड़ी हैं। खेतों में काम करने के अलावा, वे पशुपालन, बागवानी और खेती के दूसरे कामों में भी एक्टिव हैं। महिला किसान परिवार की इनकम बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। गाँवों में खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने में उनका योगदान बहुत ज़रूरी है।

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