पटवारी ने कहा- राज्यपाल के अभिभाषण से पहले एक्शन लें
भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर बजट सत्र (MP Budget Session) से पहले तीन मंत्रियों को बर्खास्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लोकतांत्रिक मूल्यों और नैतिकता की अनदेखी हो रही है, जिससे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बता दें कि मध्य प्रदेश विधानसभा का आगामी बजट सत्र 16 फरवरी (mp vidhan sabha satra 2026) से शुरू होने वाला है, जो 6 मार्च तक चलेगा। इस दौरान राज्य सरकार 2026-27 के लिए अनुमानित 4.63 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश करेगी, जो पिछले वर्ष से करीब 10 प्रतिशत अधिक होगा, लेकिन यह सत्र सिर्फ आर्थिक योजनाओं तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि राजनीतिक हंगामे का गवाह बनेगा।
राज्यपाल के अभिभाषण में आंकड़ों का आडंबर
पीसीसी चीफ ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि 16 फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण के जरिए “आंकड़ों का आडंबर” पेश किया जाएगा, जबकि प्रदेश आर्थिक संकट और बढ़ते कर्ज के बोझ से जूझ रहा है।

तीन मंत्रियों पर गंभीर आरोप
पटवारी ने तीन मंत्रियों के संदर्भ में नैतिक जवाबदेही तय करने की मांग की है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि इन मामलों के बावजूद मंत्रियों का पद पर बने रहना सरकार की नैतिकता, संवेदनशीलता और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
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इन पर लगे आरोप
- विजय शाह पर “देश की बेटी और भारतीय सेना के अपमान” से जुड़े गंभीर आरोपों का उल्लेख किया।
- राजेंद्र शुक्ल के कार्यकाल में छिंदवाड़ा में जहरीली सिरप से बच्चों की मौत का मामला उठाया।
- कैलाश विजयवर्गीय पर अपने क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने में विफल रहने का आरोप लगाया।
राज्यपाल के अभिभाषण से पहले हो कार्रवाई : पटवारी
पटवारी ने पत्र में लिखा है कि बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण से पूर्व इन मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाए, ताकि जनभावनाओं का सम्मान हो सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो यह संदेश जाएगा कि सरकार आरोपों पर मौन समर्थन दे रही है।
सरकार को घेरने के लिए तीन चरणों में विरोध
सदन से सड़क तक कांग्रेस की 3 चरणीय रणनीति कांग्रेस ने बजट सत्र के दौरान सरकार को घेरने के लिए तीन चरणों में विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है। पहले चरण में विधायक अपने-अपने क्षेत्रों से भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और घोटालों के तथ्य सदन में पेश करेंगे। उमंग सिंघार ने विधायकों को निर्देश दिए हैं कि वे सबूतों के साथ मुद्दे उठाएं, जैसे विभागीय धांधली और माफिया राज। यह रणनीति स्थानीय मुद्दों को राज्य स्तर पर लाकर सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाएगी।
गौकशी, खराब पानी, बेरोजगारी और कर्ज का मुद्दा
दूसरे चरण में हर रोज विधानसभा परिसर में गांधी प्रतिमा के सामने सांकेतिक प्रदर्शन होंगे। मुख्य मुद्दे गौकशी, खराब पानी, बेरोजगारी और कर्ज होंगे। यह प्रदर्शन मीडिया का ध्यान आकर्षित कर जनता में संदेश फैलाएंगे। तीसरे चरण में एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस, महिला कांग्रेस और सेवादल जैसे संगठन सड़कों पर उतरेंगे। विधानसभा का घेराव किया जाएगा, जो विरोध को जन आंदोलन का रूप देगा। यह रणनीति 2023 के किसान आंदोलन से प्रेरित लगती है, जहां सड़क विरोध ने राजनीतिक दबाव बनाया।
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विकास योजनाओं पर सवाल उठाता कर्ज
मुख्य मुद्दों पर गहराई से नजर सत्र में उठने वाले मुद्दों में गौ हत्या प्रमुख है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार गौ रक्षा कानूनों को सख्ती से लागू नहीं कर रही, जिससे हिंदुत्व वोटर्स में असंतोष है। दूषित पानी से मौतें इंदौर में स्वास्थ्य संकट को दर्शाती हैं, जहां विपक्ष स्थगन प्रस्ताव लाएगा। प्रदेश का कर्ज 3 लाख करोड़ से ऊपर पहुंच चुका है, जो विकास योजनाओं पर सवाल उठाता है।अवैध खनन से पर्यावरण क्षति और राजस्व हानि हो रही है। महंगाई और बेरोजगारी युवाओं को प्रभावित कर रही है, जहां सरकार का रोजगार फोकस परीक्षा होगा।

