यह पहली बार है जब ओडिशा के ताज़े स्ट्रॉबेरी विदेशी बाज़ारों में पहुँचे हैं। इसे राज्य के बागवानों के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। यह एक्सपोर्ट ढेंकनाल ज़िले की सप्तसज्या एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के ज़रिए किया गया। एक्सपोर्ट से बागवानों को स्थानीय बाज़ार की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत ज़्यादा कीमत मिली।
पहली बार लंदन में 51 किलो ताज़े स्ट्रॉबेरी का पहुँचना यह दिखाता है कि ओडिशा अब प्रीमियम और ज़्यादा कीमत वाली बागवानी फसलों की ओर बढ़ रहा है। यह किसानों की अंतरराष्ट्रीय क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को पूरा करने की क्षमता का भी सबूत है।
APEDA और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की भूमिका
किसानों की सफलता में कई संगठनों का सहयोग अहम था बागवानी निदेशालय, कृषि और किसान सशक्तिकरण विभाग (DA&FE), APEDA और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर ने इस एक्सपोर्ट में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा, ओडिशा लाइवलीहुड मिशन ने भी किसानों को बेहतर मार्केट के मौके दिलाने में मदद की।

स्ट्रॉबेरी भारतीय बागवानी के लिए क्यों अहम है यह एक्सपोर्ट
स्ट्रॉबेरी स्वादिष्ट होती हैं और उन्हें सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। उनमें कई पोषक तत्व होते हैं, जो ताकत देते हैं और बीमारियों से बचाते हैं। दुनिया भर में होटलों, जूस कंपनियों और फूड और बेवरेज इंडस्ट्री में इनकी बहुत ज़्यादा डिमांड है।
ताज़े फल, फूड प्रोसेसिंग और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में दुनिया भर में इनकी ताज़गी, न्यूट्रिशनल वैल्यू और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण इनकी बहुत ज़्यादा डिमांड है। यह सफल एक्सपोर्ट साबित करता है कि ओडिशा अब ऐसी फसलों पर रणनीतिक रूप से ध्यान दे रहा है जो किसानों के लिए ज़्यादा मुनाफा कमा सकें। यह कदम सुरक्षित, पौष्टिक और ज़िम्मेदारी से उगाए गए प्रोडक्ट्स की ग्लोबल डिमांड को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो राज्य के कृषि भविष्य के लिए नई संभावनाएं खोलता है।

ढेंकनाल ज़िले के किसानों की अहम भूमिका
ढेंकनाल जिले के किसानों ने कुल 51 किलोग्राम ताज़ी स्ट्रॉबेरी लंदन भेजीं। ये स्ट्रॉबेरी “सप्तसज्या एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड” नाम के एक किसान उत्पादक संगठन (FPO) द्वारा उगाई और काटी गई थीं। इस संगठन में कई किसान एक साथ काम करते हैं। यह सब किसानों की कड़ी मेहनत से ही संभव हो पाया।
PSFPO योजना और गेट्स फाउंडेशन का सहयोग

इस काम में किसानों को सरकार और कई संगठनों से पूरा समर्थन मिला। कृषि और किसान सशक्तिकरण विभाग के तहत बागवानी निदेशालय ने किसानों की मदद की। यह सहायता PSFPO नाम की एक योजना के तहत दी गई। इस योजना को गेट्स फाउंडेशन ने सपोर्ट किया था और पैलेडियम फाउंडेशन ने इसे लागू किया था। APEDA और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर ने भी किसानों की मदद की।
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