यूनियन बजट 2026 नया अपडेट : यदि आप भी स्मार्टफोन खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं तो बेहतर है 1 फरवरी 2026 का इंतजार कर लीजिए। जी हां, क्योंकि बजट 2026 आपके हाथ में आने वाले मोबाइल की कीमत को बदल सकता है। हाल ही में केंद्र सरकार के सामने एक प्रस्ताव भेजा गया है जिसमें मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कस्टम ड्यूटी नियमों में बड़ी राहत देने की बात कही जा रही है। यदि यह प्रस्ताव 1 फरवरी 2026 के कैबिनेट में पास हो जाता है तो आज जो फोन 15,000 से 20,000 में मिल रहा है वह फोन सस्ता हो जाएगा।
बता दें, IT मंत्रालय और IT इंडस्ट्री लगातार मांग कर रहे हैं कि मोबाइल के पार्ट्स पर लगने वाली भारी कस्टम ड्यूटी कम की जाए ताकि भारत में बनने वाले फोन सस्ते हो सकें, कंपनियों की लागत कम हो और ग्राहक को भी सीधा फायदा मिल सके। पिछले कुछ समय से बाजारों में एक के बाद एक धड़ल्ले से स्मार्टफोन लॉन्च किये जा रहे हैं।वहीं जब एक अच्छी क्वालिटी के स्मार्टफोन को खरीदने की बात आती है तो ग्राहक को 15,000 से ₹20,000 जेब से ढीले करने पड़ते हैं। परंतु 1 फरवरी 2026 को बजट पास होते ही हो सकता है भारत मे मोबाइल और गैजेट्स बात सस्ते हो जाएं।
IT मंत्रालय ने क्यों पेश किया है यह प्रस्ताव?
बता दें आज भारत में स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स की बहुत ज्यादा मांग है। भारत खुद ही आज एक बहुत बड़ा बाजार बन चुका है। यही नहीं आज भारत में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बनाये भी जा रहे हैं और आने वाले समय में यह मार्केट और बड़ा होने वाला है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय मोबाइल उत्पादन 100 बिलियन डॉलर पर पहुंच चुका है और आज यह देश सबसे बड़े स्मार्टफोन असेंबली हब के रूप में भी उभर रहा है। हालांकि भारत में ज्यादातर मोबाइल के पार्ट्स चीन समेत अन्य देशों से आते हैं जिसकी वजह से इन पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी बढ़ जाती है और मोबाइल की कीमत बढ़ जाती है। इसलिए IT मंत्रालय ने इस असंतुलन को दूर करने की बात कही है।
IT मंत्रालय और IT इंडस्ट्री की क्या मांगे हैं?
- IT मंत्रालय ने मांग की है कि वर्ष 2026 के बजट में सरकार मोबाइल असेंबली और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी को घटाकर 10% कर दे।वर्तमान में यह कस्टम ड्यूटी 15% है। ऐसे में हो सकता है आने वाले समय में माइक्रोफोन, रिसीवर, स्पीकर, पीसीबी इत्यादि की कस्टम ड्यूटी कम हो जाए।
- इसके अलावा ईयर फोन, इयरबड्स और स्मार्ट घड़ियों की मांग में भी वृद्धि को देखते हुए इन पर भी ड्यूटी को 15% करने की मांग की जा रही है ताकि भारत में इन उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़े।
- साथ ही IT मंत्रालय ने इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के ढांचे को समाप्त करने की बात कही है और यदि ऐसा होता है तो अलग-अलग पार्ट्स पर से 5% से 25% की ड्यूटी कम हो जाएगी।
इस मामले में इंडियन सेल्यूलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स संगठन( ICEA)का प्रस्ताव
- IT मंत्रालय द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर अपने विचार व्यक्त करते हुए इंडियन सेल्यूलर इलेक्ट्रॉनिक्स संगठन ICEA ने भी सरकार से मांग की है कि केवल ड्यूटी कम करना ही काफी नहीं है बल्कि टैरिफ संरचना में सुधार, गुड्स कैटेगरी के ढांचे में सुधार और मैन्युफैक्चरिंग संचालन नियमों को सरल करना भी जरूरी है।
- इसके चलते इंडियन सेल्यूलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स संगठन ने सुझाव दिए हैं कि मोबाइल घटकों पर स्टैंडर्ड वेज को लगभग 2% स्वीकार किया जाए।
- PCB असेंबली और फ्लैक्सिबल PCB असेंबली की ड्यूटी को कम कर दिया जाए।
- वियरेबल और हैरेबल प्रोडक्ट्स की ड्यूटी को एवरेज कर दिया जाए।
- साथ ही मैन्युफैक्चरिंग और अन्य ऑपरेशंस, वेयरहाउस रेगुलेशन में सुधार किया जाए जिससे भारत प्रोडक्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग लागत कम होगी और विदेशी कंपनियां भारत को सप्लाई चेन में जगह देने लगेंगी।
उपरोक्त प्रस्ताव यदि भारत में लागू होते हैं तो क्या हो जाएगा?
- IT मंत्रालय, IT इंडस्ट्री, ICEA का प्रस्ताव यदि पारित होता है तो आने वाले समय में भारत में मोबाइल के दाम कम हो जाएंगे।
- मोबाइल भारत में ही बनने लगेंगे, पार्ट्स पर टैक्स कम लगेगा, ट्रांसपोर्ट का खर्चा बचेगा।
- देश में नई मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक फैक्ट्रियां लगेगी जिससे बाहर की कंट्रीज निवेश करेंगे।
- रोजगार के मौके बनेंगे, बेहतर सप्लाई चेन जुड़ेंगे, नए जॉब्स अस्तित्व में आएंगे।
- वहीं मोबाइल पार्ट जो चीन और दूसरे देशों से आते हैं वह भारत में बनने लगेंगे जिससे विदेशी निर्भरता कम हो जाएगी।
- आने वाले समय में हो सकता है भारत चीन की तरह ही ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बन जाए।
- इससे सीधे तौर पर सरकार को भी फायदा होगा क्योंकि टैक्स बेस बढ़ेगा अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और GDP में बढ़ोतरी होगी।
बजट 2026 केवल मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिए खास नहीं, बल्कि यह नौकरी, आर्थिक वृद्धि, निर्यात क्षमता और देश की अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से भी बेहद खास होने वाला है। यदि यह बजट पास हो जाता है तो यह केवल उद्योगों को लाभ नहीं देगा बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था को भी नई ऊंचाई देगा। अब देखना यह होगा कि सरकार 1 फरवरी 2026 को क्या इन सुझावों को अपनाती है और देश को टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में ऊंचा उठाती है।
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