संजय लीला भंसाली: 26 जनवरी का दिन समस्त भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस दिन भारतीय संविधान की रचना की गई थी और इसी के सम्मान में 26 जनवरी के दिन कर्तव्य पथ पर भारतीय सेना की टुकड़ियां शक्ति का संदेश देती हैं। इस दिन हर भारतीय का सीना चौड़ा हो जाता है। ऐसे ऐतिहासिक दिन पर इस बार एक नया अध्याय जुड़ने वाला है। जी हां, इस बार गणतंत्र दिवस की परेड में केवल शौर्य और अनुशासन की कहानी नहीं कही जाएगी बल्कि इस बार भारतीय सिनेमा को भी परेड से जुड़ने का मौका मिलेगा।
ऐसा पहली बार हो रहा है जब गणतंत्र दिवस की परेड में भारतीय सिनेमा को जोड़ा जा रहा है। और इस बार इस ऐतिहासिक जिम्मेदारी को निभाने का काम मिला है महान फिल्मकार संजय लीला भंसाली को। संजय लीला भंसाली ने अब तक फिल्मों में भव्यता, भावना और भारतीय परंपरा जीवंत रखी है और अब पर्दे से निकाल कर वे 26 जनवरी की परेड में भारत की सांस्कृतिक पहचान प्रस्तुत करेंगे।
क्या है इस अवसर की विशेषता ?
गणतंत्र दिवस 2026 की इस बार की थीम है ‘वंदे मातरम के 150 वर्ष’ ,गणतंत्र दिवस की परेड में आमतौर पर सेना की टुकड़िया, राष्ट्रीय बल, लोक कलाएं, राज्य संघ शासन की झांकी प्रस्तुत की जाती है। 2026 में सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा भी एक विशेष झांकी तैयार की जा रही है। सूचना प्रसारण मंत्रालय ने इस झांकी को तैयार करने के लिए बॉलीवुड के सबसे प्रतिष्ठित निर्देशक संजय लीला भंसाली की सहायता ली है। उनके साथ मिलकर भारतीय सिनेमा पर आधारित एक विशेष झांकी तैयार की है, जिसे 26 जनवरी 2026 को कर्तव्य पथ पर प्रदर्शित किया जाएगा।
क्यों मिला है संजय लीला भंसाली को यह मौका
संजय लीला भंसाली भारती सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली निर्देशक माने जाते हैं। उनकी फिल्मों में अक्सर कला, संगीत और भावनात्मक कहानियों का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है। उन्होंने बॉलीवुड को कई यादगार फिल्में दी है जैसे कि ‘हम दिल दे चुके सनम’, ‘देवदास’, ‘ब्लैक’, ‘बाजीराव मस्तानी’, ‘पद्मावत’, ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’; यह सारी फिल्में भारतीय इतिहास, कला संस्कृति का शानदार चित्रण करती हैं। यह सभी फिल्में या तो क्लासिक कैरेक्टर पर बनी है या तो कुछ ना कुछ प्रेरणादायक कहानी कहती हैं।संजय लीला भंसाली न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय रूप से भी जाने-माने से निर्देशक हैं। इसीलिए भारतीय सिनेमा का प्रतिनिधित्व करने के लिए सूचना प्रसारण मंत्रालय ने संजय लीला भंसाली को ही चुना है।
26 जनवरी 77 वें गणतंत्र दिवस पर भारतीय सिनेमा और राष्ट्रीय पर्व का संगम
भारतीय सिनेमा आज केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहा, बल्कि भारतीय सिनेमा सांस्कृतिक धरोहर और सामाजिक कैनवस को जीवंत करने वाला हिस्सा बन गया है। आज भारतीय सिनेमा सच को दिखाने में पीछे नहीं है। भारतीय सिनेमा के भाव, संगीत, मूल्य यहां तक कि इसके कलाकार भी भारत के ही विभिन्न हिस्सों से लिए गए हैं। यह सिनेमा हमारे रोजमर्रा के जीवन, त्योहार, भाषा, परंपराओं को दिखाता है। ऐसे में इस बार के गणतंत्र दिवस की थीम भी भारत की 150 वर्ष के इतिहास से जुड़ी है। इस ऐतिहासिक मौके पर सिनेमा की झांकी दिखाना अपने आप में ही एक बहुत बड़ा संदेश है।
77 वें गणतंत्र दिवस की परेड में भारतीय सिनेमा का प्रदर्शन
- 77वें गणतंत्र दिवस पर इस बार भारतीय सिनेमा के का प्रतिनिधित्व करते हुए संजय लीला भंसाली ने एक विशेष झांकी डिजाइन की है।
- गणतंत्र दिवस की परेड में इस झांकी को प्रदर्शित किया जाएगा।
- यह झांकी भारतीय फिल्मों की कलात्मक शैली, सांस्कृतिक विविधता और क्रिएटिव विजन को दिखाएंगी।
- यह भारतीय सिनेमा का इतिहास और आधुनिक भारत की पहचान को जोड़ते हुए कालांतर में सिनेमा के विकास को प्रदर्शित करेगी।
संजय लीला भंसाली का 2026 के गणतंत्र दिवस पर आना और भारतीय सिनेमा का प्रतिनिधित्व करना भारतीय सिनेमा के लिए एक गौरवशाली क्षण है। यह अवसर यह साबित करता है कि इस बार कर्तव्य पथ पर केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं होगा बल्कि भारतीय कला, संस्कृति को भी प्रदर्शित किया जाएगा।
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