मणिपुर के किसान अब प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत धीरे-धीरे स्मार्ट और टिकाऊ खेती के तरीकों को अपना रहे हैं। नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रमों, खेतों में प्रदर्शन और कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से किसान पानी का सही इस्तेमाल करना सीख रहे हैं, जिससे फसल उत्पादन में भी सुधार हो रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट है — कम पानी में ज्यादा फसल पैदा करना।
बेहतर जल प्रबंधन से बढ़ती फसल उत्पादकता
कृषि विशेषज्ञ किसानों को आधुनिक सिंचाई तकनीकों की जानकारी दे रहे हैं, जिससे पानी की बर्बादी कम हो सके। ड्रिप सिंचाई और स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी विधियों से फसलों को सही समय पर और सही मात्रा में पानी मिलता है। इसके साथ-साथ किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने के तरीकों के बारे में भी बताया जा रहा है। बायोचार जैसी तकनीकों को अपनाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जो खासतौर पर वर्षा पर निर्भर क्षेत्रों के लिए बेहद जरूरी है।
खेती में तकनीक की बढ़ती भूमिका
अब खेती में तकनीक का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। किसानों को AI और IoT आधारित डिजिटल टूल्स से परिचित कराया जा रहा है, जिनकी मदद से वे मिट्टी की स्थिति, फसल की सेहत और पानी के उपयोग पर नजर रख सकते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और महानलनोबिस राष्ट्रीय फसल पूर्वानुमान केंद्र (MNCFC) जैसे तकनीकी संस्थान किसानों को उन्नत तकनीकी सहयोग प्रदान करेंगे।
केवीके अन्द्रो में एक्सपोजर विजिट
पीएमकेएसवाई 2.0 के तहत 29 दिसंबर को इम्फाल ईस्ट जिले के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), अन्द्रो में एक एक्सपोजर विजिट का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वाटरशेड डेवलपमेंट कंपोनेंट (WDC-PMKSY 2.0) के अंतर्गत आयोजित हुआ। इस दौरान काकचिंग जिले के किसानों ने भाग लिया और कृषि वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों से सीधे बातचीत कर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
किसानों की सक्रिय भागीदारी
इस कार्यक्रम में करीब 60 किसानों ने हिस्सा लिया। इनमें लांगमेडोंग, एलांगखंगपोकपी, वाइखोंग लाइमानई, तांगजेंग, सेरू और वांगू जैसे गांवों के किसान शामिल थे। किसानों ने न केवल सवाल पूछे, बल्कि अपने अनुभव भी साझा किए। केवीके अन्द्रो के विशेषज्ञों ने उन्हें उन्नत खेती और सहायक कृषि गतिविधियों पर उपयोगी सलाह दी।
वाटरशेड विकास को मिल रही मजबूती
पीएमकेएसवाई के तहत चल रहे वाटरशेड विकास प्रोजेक्ट्स का उद्देश्य वर्षा आधारित और खराब हो चुकी जमीन की उत्पादकता बढ़ाना है। यह कार्यक्रम सामुदायिक भागीदारी, एकीकृत वाटरशेड प्रबंधन और दीर्घकालिक टिकाऊ विकास को बढ़ावा देता है।
साथ ही, बेहतर कार्यान्वयन के लिए प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन और गांवों के बीच आपसी सीख को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
“हर बूंद से ज्यादा फसल” की दिशा में कदम
किसान उत्पादक संगठन (FPOs) और सरकारी एजेंसियां मिलकर जमीनी स्तर पर जागरूकता फैलाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। इससे किसानों को जल संरक्षण और कुशल खेती के महत्व को समझने में मदद मिल रही है।
टिकाऊ कृषि की ओर बढ़ता मणिपुर
पीएमकेएसवाई के तहत मणिपुर के किसान अब आधुनिक और टिकाऊ खेती के तरीकों को अपनाने में आत्मविश्वास महसूस कर रहे हैं। निरंतर प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और विशेषज्ञ मार्गदर्शन से किसान उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी कर पा रहे हैं। आने वाले समय में ये प्रयास न केवल किसानों की आजीविका को मजबूत करेंगे, बल्कि स्थायी कृषि विकास को भी बढ़ावा देंगे।
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