मार्च 2026 में डिजिटल क्रिएटर और गुजराती इन्फ्लुएंसर हेटल परमार अचानक सोशल मीडिया पर सुर्खियों में आ गईं। एक कथित वायरल वीडियो इंटरनेट पर फैल गया, जिससे उनके फॉलोअर्स और डिजिटल समुदाय में भारी हलचल मच गई। वीडियो WhatsApp और Telegram जैसे प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुआ और कहा जा रहा था कि इसमें परमार को एक विवादास्पद स्थिति में दिखाया गया है। उनके “घरेलू और पारंपरिक गुजराती संस्कृति” पर आधारित कंटेंट के चलते, यह अचानक वायरल वीडियो उनके फॉलोअर्स के लिए चौंकाने वाला था।
Hetal Parmar का जवाब! वीडियो है फेक और AI Deepfake

हेटल परमार ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर वीडियो अपलोड कर साफ शब्दों में इनकार किया कि वीडियो में दिख रही शख्स वह हैं। उन्होंने कहा कि यह वीडियो AI आधारित डीपफेक या मोर्फिंग तकनीक से बनाया गया हो सकता है, जिसका उद्देश्य उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाना था।
उन्होंने अपने फॉलोअर्स से आग्रह किया कि वीडियो को शेयर करना बंद करें और चेताया कि ऐसा फेक वीडियो मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल सुरक्षा के लिहाज से गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।
कानूनी कार्रवाई की तैयारी

परमार ने बताया कि उन्होंने कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ली है और जो भी इस वीडियो को अपलोड और शेयर कर रहे हैं, उनके खिलाफ भारतीय IT कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी। भारतीय कानून के अनुसार बिना सहमति के यौन सामग्री या मोर्फ़ वीडियो का वितरण अपराध है।
डिजिटल सुरक्षा और AI Deepfake की बढ़ती चुनौती

हेटल परमार का मामला यह दिखाता है कि AI तकनीक का दुरुपयोग कैसे किसी की प्रतिष्ठा और करियर को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि फैक्ट चेकिंग और जिम्मेदारी से पोस्ट करना आज के डिजिटल दौर में पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
हेटल परमार कौन हैं?
हेटल परमार एक लोकप्रिय Gujarati influencer और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं। वह मुख्यतः जीवनशैली, पारिवारिक वीडियो और गुजराती संस्कृति पर आधारित कंटेंट बनाती हैं। उनके इंस्टाग्राम और यूट्यूब चैनल “Hetal Parmar Official” पर लाखों फॉलोअर्स हैं, और उनके वीडियो अक्सर हजारों व्यूज़ पाते हैं।
उन्होंने Kavi N Kavita Podcast जैसी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी सहयोग किया है। उनकी सामग्री में पारंपरिक गुजराती रीति-रिवाज, रोज़मर्रा की ज़िंदगी और प्रेरणादायक थीम शामिल हैं।
वायरल वीडियो मामले में होटल परमार ने साफ किया कि वीडियो फेक और डीपफेक तकनीक से तैयार किया गया है। यह मामला डिजिटल सुरक्षा और AI के गलत इस्तेमाल की चुनौती को उजागर करता है। उनके फॉलोअर्स और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए यह एक संदेश है कि फेक वीडियो को फैलाना न केवल कानूनी रूप से गलत है, बल्कि मानसिक और सामाजिक नुकसान भी पहुंचा सकता है।
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