पंचकूला के स्कूल में 6 साल की बच्ची पर 8 वर्षीय छात्र के हमले से हड़कंप मच गया। बच्ची PGIMER में भर्ती है; हरियाणा सरकार और बाल आयोग ने जांच भी शुरू की।

स्कूल को बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित जगह माना जाता है, लेकिन हरियाणा के पंचकूला से सामने आई एक घटना ने इस भरोसे को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक सरकारी स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले आठ वर्षीय छात्र पर छह साल की मासूम बच्ची के साथ बेरहमी से मारपीट करने का आरोप लगा है। हमले में बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई और उसे इलाज के लिए चंडीगढ़ के PGIMER में भर्ती कराना पड़ा।
यह घटना 28 अक्टूबर 2026 को पंचकूला के सेक्टर-20 स्थित स्कूल में हुई। मामले का खुलासा तब हुआ, जब छुट्टी के बाद बच्ची अपने निर्धारित स्थान पर नहीं पहुंची और परिवार ने उसकी तलाश शुरू की। बाद में वह स्कूल के एक कमरे में घायल और बेहोशी की हालत में मिली।
घटना के CCTV फुटेज सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। हरियाणा सरकार ने जांच कमेटी गठित की है, जबकि राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी स्वतः संज्ञान लेते हुए स्कूल प्रशासन से जवाब मांगा है।
मीडिया रिपोर्ट्स और सामने आए कथित CCTV फुटेज के अनुसार, घटना के दौरान आरोपी छात्र ने पहले बच्ची के बाल पकड़े और उसका सिर डेस्क पर पटक दिया।
इसके बाद बच्ची के जमीन पर गिरने के बावजूद उस पर कथित रूप से हमला जारी रहा। फुटेज में छात्र को बच्ची को लात मारते और किसी भारी वस्तु से हमला करते हुए देखा जा सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले में ईंट, पत्थर और फूलदान जैसी चीजों का इस्तेमाल किया गया। बच्ची के बेहोश हो जाने के बाद भी उसके साथ मारपीट किए जाने का आरोप है।
हालांकि, घटना के पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।
⚠️ TRIGGER WARNING: DISTURBING INCIDENT INVOLVING MINOR CHILDREN Panchkula, Haryana: 8-Year-Old Student Allegedly Assaults 6-Year-Old Girl With Special Needs Inside School, Victim Critically Injured. A disturbing incident has been reported at Sanskriti Model School in Sector 20, Panchkula, where an 8-year-old Class 3 student allegedly attacked a 6-year-old KG girl with special needs. According to reports, the accused student allegedly grabbed the girl's hair, slammed her head against a desk and repeatedly attacked her with bricks and a flowerpot. Even after the child reportedly lost consciousness, he allegedly continued dragging and kicking her. The injured girl was rushed for medical attention and later referred to PGI Chandigarh due to her critical condition. Police have initiated an investigation to establish the exact sequence of events and circumstances surrounding the incident. The incident has raised serious concerns over child safety, staff supervision and security arrangements inside schools, particularly when it comes to protecting younger and vulnerable students.
— Deadly Kalesh (@Deadlykalesh) October 31, 2026
इस पूरे मामले में सबसे परेशान करने वाली बात यह है कि बच्ची स्कूल में घायल अवस्था में पड़ी रही और परिवार को उसकी जानकारी काफी देर बाद मिली।
रिपोर्ट्स के अनुसार, स्कूल की छुट्टी होने के बाद बच्ची को लेने आने वाले ऑटो चालक को वह अपने निर्धारित स्थान पर नहीं मिली। इसके बाद उसने बच्ची के पिता को इसकी सूचना दी।
पिता स्कूल पहुंचे और बेटी की तलाश शुरू की। इसी दौरान कथित तौर पर उसी छात्र ने उन्हें बताया कि बच्ची ऊपर एक कमरे में पड़ी हुई है।
जब पिता कमरे में पहुंचे तो बेटी खून से लथपथ और गंभीर रूप से घायल हालत में मिली। परिवार के लिए यह दृश्य बेहद सदमे वाला था।
परिजन तुरंत बच्ची को अस्पताल लेकर पहुंचे।
घटना के बाद घायल बच्ची को पहले पंचकूला के सेक्टर-6 स्थित सिविल अस्पताल ले जाया गया। वहां शुरुआती इलाज के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे चंडीगढ़ स्थित पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) रेफर कर दिया गया।
शुरुआती रिपोर्ट्स में बच्ची की हालत गंभीर बताई गई थी। हालांकि, 30 अक्टूबर को हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष तृप्ति हरिपाल श्योराण ने PGIMER पहुंचकर बच्ची के माता-पिता से मुलाकात की।
आयोग को अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी ने जानकारी दी कि फिलहाल बच्ची की जान को कोई खतरा नहीं है। हालांकि, उसके चेहरे की हड्डियों और नाक में फ्रैक्चर होने की बात सामने आई है।
बच्ची का इलाज जारी है। उसके शारीरिक उपचार के साथ मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत भी बताई गई है।
घटना सामने आने के बाद हरियाणा सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है।
हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने 31 अक्टूबर को बताया कि घटना की जांच के लिए विभागीय स्तर पर कमेटी गठित की गई है। कमेटी को जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि जांच में स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों या किसी अन्य जिम्मेदार व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकार यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि स्कूल परिसर में इतनी गंभीर घटना कैसे हुई और समय रहते किसी को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली।
हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया है।
आयोग की अध्यक्ष तृप्ति हरिपाल श्योराण ने 30 अक्टूबर को PGIMER पहुंचकर बच्ची के परिजनों से मुलाकात की। इसके बाद आयोग ने 31 अक्टूबर को पंचकूला के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी।
आयोग ने स्कूल से कई महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी हैं, जिनमें शामिल हैं:
घटना के समय स्कूल में कितने शिक्षक और कर्मचारी मौजूद थे?
बच्चों की निगरानी के लिए क्या व्यवस्था थी?
CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग और फुटेज।
संबंधित कर्मचारियों का ड्यूटी रोस्टर।
स्कूल का उपस्थिति रिकॉर्ड।
घटना के बाद स्कूल प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
शिक्षा विभाग की ओर से शुरू की गई जांच का विवरण।
आयोग यह भी जांच करेगा कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा और निगरानी को लेकर किसी तरह की लापरवाही तो नहीं हुई।
इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू भी है। कथित हमले में शामिल छात्र की उम्र आठ साल बताई गई है। ऐसे में उसके खिलाफ कार्रवाई सामान्य आपराधिक मामलों से अलग कानूनी प्रक्रिया के तहत होगी।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 20 के अनुसार, सात साल से कम उम्र के बच्चे का कोई भी कृत्य अपराध नहीं माना जाता। वहीं, सात से 12 साल के बीच के बच्चों के मामले में यह देखा जाता है कि बच्चे में अपने कृत्य की प्रकृति और परिणामों को समझने की पर्याप्त परिपक्वता थी या नहीं।
पंचकूला पुलिस के डीसीपी (क्राइम) अमरिंदर सिंह के अनुसार, आठ वर्षीय छात्र का मेडिकल और मानसिक स्थिति से संबंधित आकलन कराया जा रहा है। आगे की कार्रवाई इस आकलन और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर तय होगी।
पुलिस स्कूल प्रबंधन और संबंधित छात्र के माता-पिता से भी पूछताछ कर रही है।

पंचकूला की यह घटना सिर्फ दो बच्चों के बीच हुए कथित विवाद का मामला नहीं है। यह स्कूलों में छोटे बच्चों की निगरानी, शिक्षकों की जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्कूल परिसर में CCTV कैमरे होने के बावजूद घटना को समय रहते क्यों नहीं रोका जा सका? अगर बच्चे की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही थी, तो इतनी गंभीर स्थिति बनने तक किसी शिक्षक या कर्मचारी को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली?
स्कूलों में सुरक्षा का मतलब केवल गेट पर गार्ड या कैमरे लगाना नहीं है। छोटे बच्चों पर लगातार नजर रखना, उनकी शिकायतें सुनना और किसी भी विवाद को समय रहते समझना भी उतना ही जरूरी है।
साथ ही, इस मामले में आरोपी भी नाबालिग है। इसलिए जांच के दौरान उसकी उम्र, मानसिक स्थिति और परिस्थितियों को समझना जरूरी होगा। किसी भी बच्चे की पहचान उजागर किए बिना मामले की निष्पक्ष जांच और पीड़ित बच्ची को बेहतर चिकित्सा एवं मानसिक सहायता मिलनी चाहिए।
फिलहाल पुलिस और शिक्षा विभाग की जांच जारी है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के पीछे क्या वजह थी और स्कूल में सुरक्षा व्यवस्था के स्तर पर कहां चूक हुई।
एक बात साफ है: स्कूल में बच्चों को सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, सुरक्षित माहौल भी मिलना चाहिए। किसी भी अभिभावक के लिए अपने बच्चे को स्कूल भेजने के बाद उसकी सुरक्षा को लेकर इस तरह की चिंता होना बेहद दुखद है।
Disclaimer: इस लेख में घटना से जुड़ी जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स, पुलिस के बयानों और संबंधित अधिकारियों की जानकारी पर आधारित है। मामला जांच के अधीन है और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। बच्चों की पहचान और निजता का सम्मान किया जाना चाहिए।