धीरेंद्र शास्त्री की राम-कृष्ण तुलना वाला वीडियो वायरल है। विवाद के बीच उन्होंने सफाई दी कि टिप्पणी विनोद में थी। जानिए पूरा मामला और प्रतिक्रियाएं अब।

धर्म और आस्था से जुड़े मंचों पर कही गई एक-एक बात लाखों लोगों की भावनाओं को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में जब किसी प्रसिद्ध कथावाचक की टिप्पणी भगवान राम और श्रीकृष्ण के स्वरूप को लेकर हो, तो विवाद खड़ा होना स्वाभाविक है। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों अपने एक बयान को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं।
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए कई टिप्पणियां कीं। उन्होंने भगवान कृष्ण की मुद्रा, बांसुरी बजाने के अंदाज और वृंदावन धाम का जिक्र करते हुए भगवान राम के सीधे स्वरूप से उनकी तुलना की।
उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। कई लोगों ने इसे भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनुचित भाषा बताते हुए नाराजगी जताई। वहीं, कुछ लोगों ने इसे कथा के दौरान किया गया हास्य और व्यंग्य बताया। विवाद बढ़ने के बाद 2 नवंबर को धीरेंद्र शास्त्री ने भी इस मामले पर अपनी सफाई दी।
यह पूरा मामला मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में आयोजित धार्मिक कथा से जुड़ा है। वायरल वीडियो में धीरेंद्र शास्त्री कथा के दौरान भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप का अंतर बताते नजर आते हैं।
उन्होंने भगवान कृष्ण की प्रसिद्ध त्रिभंग मुद्रा का जिक्र करते हुए कहा कि उनके भक्तों के ठाकुर जी कहीं बैठे हों या खड़े हों, उनका शरीर तीन जगह से टेढ़ा दिखाई देता है।
उन्होंने कहा:
"तुम अपने वाले ठाकुर जी का एक भी फोटो देख लो। कहीं बैठे हैं तो ऐसे, कहीं ऐसे। तुम्हारे वाले खड़े भी होते हैं तो तीन जगह से टेढ़े। पैर के ऊपर पैर, कमर कहीं लचकाएं, बंसी बजाएं तो टेढ़े।"
इसके बाद उन्होंने भगवान राम के स्वरूप की तुलना करते हुए कहा कि उनके भगवान सीधे खड़े होते हैं। उनका नाम, चलना और धाम भी सीधा है। उन्होंने अयोध्या का उदाहरण देते हुए वृंदावन धाम का जिक्र किया।
उनकी इसी टिप्पणी को लेकर विवाद शुरू हुआ। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाया कि भगवान राम और भगवान कृष्ण दोनों ही हिंदू धर्म में समान रूप से पूजनीय हैं, ऐसे में उनके स्वरूप की इस तरह तुलना करना कितना उचित है?
@news24tvchannel अभी भी धीरेंद्र शास्त्री को अपनी गलती का एहसास नहीं है, सफाई दे रहे है कि हमने ऐसा नहीं बोला है, अर्थ का अनर्थ बनाया जा रहा है जबकि वीडियो स्वयं देख लीजिए, किस तरह से भगवान कृष्ण का अपमान किया जा रहा है। कानूनी कार्यवाही कीजिए @narendramodi जी। https://t.co/iCOboMxMfj
— Nadeem Ram Ali 🇮🇳 (@NadeemRamAli) November 2, 2026
धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए भगवान श्रीकृष्ण की बांसुरी और भगवान राम के धनुष का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि बांसुरी बजाना तो खेल है, लेकिन धनुष चलाना खेल नहीं है।
इस दौरान उन्होंने कथा मंच पर मौजूद एक बांसुरी बजाने वाले कलाकार की ओर इशारा किया और उसे बांसुरी बजाने के लिए कहा। कलाकार ने कुछ देर तक बांसुरी की धुन भी सुनाई।
इसके बाद उन्होंने भगवान कृष्ण के गाय चराने और गोवर्धन पर्वत उठाने के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए भगवान राम से जुड़े प्रसंगों की तुलना की।
उन्होंने कहा कि गाय चराना तो कोई भी कर सकता है, जबकि बंदरों को नचाना खेल नहीं है। इसी तरह उन्होंने भगवान राम के भक्त हनुमान द्वारा पर्वत उठाने का उदाहरण भी दिया।
हालांकि, अपनी बात के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि वह भगवान श्रीकृष्ण के विरोधी हैं। उन्होंने इसे विनोद के संदर्भ में कही गई बात बताया।
सोशल मीडिया पर लगातार आलोचना होने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने 2 नवंबर को अपने बयान पर प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि हाल ही में कुछ लोग उनकी बातों का गलत अर्थ निकाल रहे हैं। उन्होंने भगवान कृष्ण को लेकर अपनी टिप्पणी का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने यह बात भाव और विनोद में कही थी।
उनके मुताबिक, भगवान श्रीकृष्ण और भगवान राम दोनों ही उनके लिए पूजनीय हैं। उन्होंने कहा कि उनके नाम में भी कृष्ण है और जिनसे अधिक प्रेम होता है, उनसे इस तरह की बातें भी हो जाती हैं।
उन्होंने आलोचकों पर निशाना साधते हुए यह भी कहा कि आजकल सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होने के लिए बाबा बागेश्वर का विरोध करना एक नया ट्रेंड बन गया है।
उनकी सफाई के बाद विवाद पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। कई लोग अब भी मानते हैं कि धार्मिक मंच पर इस्तेमाल की जाने वाली भाषा को लेकर कथावाचकों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
श्री कृष्ण पर दिए विवादित बयान पर धीरेंद्र शास्त्री ने दी सफाई ◆ धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था, "हमारे वाले भगवान खड़े भी होते हैं तो एकदम सीधे, धाम भी सीधा है, अयोध्या, तुम्हारे वालों का नाम भी टेढ़ा है, चलते भी टेढ़े हैं और खड़े भी टेढ़े होते हैं #DhirendraShastri | Dhirendra Shastri
— News24 (@news24tvchannel) November 2, 2026
धीरेंद्र शास्त्री का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
एक तरफ कई यूजर्स ने उनकी टिप्पणी की आलोचना की है। उनका कहना है कि भगवान राम और भगवान कृष्ण में किसी तरह का अंतर बताकर भक्तों के बीच तुलना करना उचित नहीं है।
कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि यदि कोई दूसरा व्यक्ति किसी देवी-देवता के लिए इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल करता, तो क्या उसे भी मजाक कहकर नजरअंदाज कर दिया जाता?
वहीं, दूसरी तरफ धीरेंद्र शास्त्री के समर्थकों का कहना है कि वायरल वीडियो को उसके पूरे संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, कथा के दौरान संतों और भक्तों के बीच अपने-अपने आराध्य को लेकर हास्य और व्यंग्य की बातचीत हो रही थी।
NCIB Headquarters के नाम से सोशल मीडिया पर सक्रिय अकाउंट ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। पोस्ट में कहा गया कि किसी छोटे वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति के बारे में अंतिम राय नहीं बनानी चाहिए। इसमें पूरे वीडियो और बातचीत के संदर्भ को समझने की अपील की गई।
इस पक्ष का तर्क है कि राम और कृष्ण के बीच कोई वास्तविक भेद नहीं है, बल्कि उनके स्वरूप और लीलाएं अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार हैं।
हिंदू धर्म में भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण दोनों को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। दोनों के जीवन, शिक्षाओं और लीलाओं का अपना अलग महत्व है।
भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में पूजे जाते हैं, जबकि भगवान श्रीकृष्ण को उनकी लीलाओं, गीता के उपदेश और प्रेम के संदेश के लिए याद किया जाता है।
श्रीकृष्ण की त्रिभंग मुद्रा उनकी पहचान का हिस्सा है। इसमें उनका शरीर तीन स्थानों से मुड़ा हुआ दिखाई देता है। यह कोई कमी या मजाक का विषय नहीं, बल्कि भारतीय धार्मिक कला और भक्ति परंपरा में विशेष आध्यात्मिक महत्व रखने वाला स्वरूप है।
इसी तरह भगवान राम का धनुष धारण किए सीधे खड़े होने वाला स्वरूप उनकी मर्यादा और वीरता का प्रतीक माना जाता है।
दोनों के स्वरूप अलग हो सकते हैं, लेकिन उनकी महिमा को एक-दूसरे से कम या ज्यादा बताने की जरूरत नहीं है।
धार्मिक कथावाचकों की लोकप्रियता जितनी अधिक होती है, उनकी जिम्मेदारी भी उतनी ही बढ़ जाती है। लाखों लोग उनकी बातें सुनते हैं और उन पर भरोसा करते हैं। इसलिए धार्मिक मंचों पर हास्य और व्यंग्य करते समय भी शब्दों का चयन सोच-समझकर करना जरूरी है।
इस विवाद के बीच सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने धीरेंद्र शास्त्री के बयानों को राजनीतिक विचारधारा और हिंदू राष्ट्र से जुड़ी उनकी सार्वजनिक गतिविधियों से जोड़कर भी सवाल उठाए हैं।
कुछ आलोचकों का आरोप है कि धार्मिक मंचों का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने और समाज में विभाजन पैदा करने के लिए किया जा रहा है।
हालांकि, भगवान राम और कृष्ण को लेकर की गई इस विशेष टिप्पणी के पीछे किसी राजनीतिक दल का निर्देश या चुनावी रणनीति होने का कोई पुष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए ऐसे आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
फिलहाल इस पूरे मामले का केंद्र धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी, उस पर हुई आलोचना और उनकी सफाई है।
धर्म लोगों को जोड़ने, प्रेम सिखाने और जीवन को बेहतर दिशा देने का माध्यम है। भगवान राम और श्रीकृष्ण दोनों करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं।
किसी के आराध्य को दूसरे के आराध्य से बेहतर साबित करने की कोशिश से भक्ति का उद्देश्य पूरा नहीं होता। धार्मिक मंचों पर मतभेद या हास्य हो सकता है, लेकिन भाषा ऐसी होनी चाहिए जिससे किसी की आस्था को अनावश्यक ठेस न पहुंचे।
धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी टिप्पणी को विनोद बताया है, लेकिन विवाद यह सवाल जरूर खड़ा करता है कि धार्मिक उपदेश देने वाले लोगों को सार्वजनिक मंचों पर अपनी भाषा और जिम्मेदारी के प्रति कितना सतर्क रहना चाहिए।