• देश को 35 साल बाद मिलेगा पुरुष प्रधानमंत्री
  • बांग्लादेश में जमात की शर्मनाक हार

ढाका। बांग्लादेश में हुए 13वें संसदीय चुनावों (Bangladesh Election) के नतीजे सामने आ गए हैं, जिसमें गुरुवार को हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बड़ी जीत दर्ज की है। BNP ने 299 सीटों में से 209 हासिल कर बहुमत के लिए जरूरी 150 के आंकड़े को पार कर लिया। अब तक 286 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं।

जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन को अब तक 70 सीटें मिली हैं। जमात प्रमुख शफीकुर रहमान ने ढाका-15 सीट से जीत दर्ज की है। देश में करीब 20 साल बाद BNP की सरकार बनी है। 2008 से 2024 तक वहां शेख हसीना की आवामी लीग सत्ता में थी।
इस जीत के साथ पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और BNP अध्यक्ष तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। तारिक ने दो सीटों से चुनाव लड़ा था और दोनों पर जीत हासिल की है। वे पिछले साल दिसंबर में 17 साल बाद देश लौटे थे।

 

PM मोदी ने BNP की जीत के लिए तारिक रहमान को बधाई दी

PM Modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बांग्लादेश चुनाव (Bangladesh Election) पर पहला बयान सामने आया है। उन्होंने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की बंपर जीत के लिए इसके चेयरमैन तारिक रहमान को बधाई दी है। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा:”मैं श्री तारिक रहमान को बांग्लादेश के संसदीय चुनाव में बीएनपी को निर्णायक जीत दिलाने के लिए अपनी हार्दिक बधाई देता हूं। यह जीत बांग्लादेश के लोगों द्वारा आपके नेतृत्व में रखे गए गहन विश्वास को दर्शाती है।

 

 

भारत निरंतर बांग्लादेश के साथ खड़ा रहेगा

पीएम मोदी ने आगे लिखा कि भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में निरंतर खड़ा रहेगा। मैं आपके साथ मिलकर हमारी बहुआयामी संबंधों को मजबूत करने और हमारे साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए काम करने का इंतजार कर रहा हूं।”

बांग्लादेश में 35 साल बाद कोई पुरुष प्रधानमंत्री बनेगा। 1988 में काजी जफर अहमद प्रधानमंत्री बने थे। इसके बाद 1991 से 2024 तक देश की राजनीति में पूर्व पीएम शेख हसीना और खालिदा जिया का दबदबा रहा। ये दोनों ही प्रधानमंत्री बनती रहीं।

भारत ने बीएनपी को दिया था ग्रीन सिग्नल

भारत ने अपनी तरफ से पहले से ही बीएनपी को ग्रीन सिग्नल दिया है, चाहे वो खालिदा जिया के बीमार होने पर चिंता जाहिर करना हो या उनके निधन पर भारत के विदेश मंत्री का खुद बांग्लादेश जाना हो। भारत के पीएम मोदी ने भी गंभीर रूप से बीमार खालिदा जिया के स्वास्थ्य पर चिंता जाहिर की थी और भारत के समर्थन की पेशकश की थी। इसके जवाब में बीएनपी ने भी ईमानदारी से आभार जताया था। यह राजनीतिक गर्मजोशी का एक दुर्लभ उदाहरण था।

खास बात ये भी है कि इस बार बांग्लादेश में बीएनपी ने अपना चुनाव जमात के पिच पर नहीं, खुद के बूते लड़ा है और बीएनपी की इस जीत से बांग्लादेश के हिंदुओं को कुछ हद तक राहत मिली होगी। क्योंकि हाल ही में इकबाल मंच के नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद बांग्लादेश में जिस तरह हिंसा फैली, और इसके बाद जब एक हिंदू युवक की लिंचिंग कर उसकी हत्या की गई, तो बीएनपी इन सबकी घोर आलोचना की थी। बांग्लादेश के हिंदुओं के दिल में छोटी ही सही लेकिन अब एक उम्मीद जरूर होगी कि बीएनपी की जीत और तारिक रहमान की नई सरकार में उनकी स्थिति में सुधार होगा, उन्हें भी दूसरे बांग्लादेशी नागरिकों की तरह ही मानवाधिकार मिलेगा।

Bangladesh Election
Bangladesh Election

बांग्लादेश में वोटिंग के दौरान झड़पें हुई

बांग्लादेश में वोटिंग के दौरान कई जगहों पर झड़पें भी हुई। खुलना में एक वोटिंग सेंटर के बाहर जमात-ए-इस्लामी कार्यकर्ताओं के साथ झड़प में एक BNP नेता मोहिबुज्जमान कोच्चि की मौत हो गई।

दूसरी तरफ मुंशीगंज-3 और गोपालगंज सदर इलाके में वोटिंग सेंटर के बाहर देसी बम फेंके गए। गोपालगंज सदर इलाके में धमाके से 3 लोग घायल हो गए थे।

बांग्लादेश चुनाव को लेकर भारत ने नतीजों का इंतजार करने के लिए कहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नतीजे आने के बाद ही यह देखा जाएगा कि जनादेश किस तरह का है।

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बांग्लादेश चुनाव से जुड़े बड़े अपडेट्स

तारिक रहमान का PM बनना लगभग तय

तारिक रहमान 25 जनवरी को ब्रिटेन से बांग्लादेश लौटे थे। उनकी वापसी के सिर्फ पांच दिन बाद, पूर्व प्रधानमंत्री और उनकी मां खालिदा जिया का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। इसके बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की कमान पूरी तरह उनके हाथों में आ गई।
तारिक पर 2001 से 2006 के BNP शासनकाल में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। 2007 में अंतरिम सरकार के दौरान उन्हें 18 महीने जेल में रहना पड़ा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए तारिक 2008 में लंदन भाग गए थे। तब उन्हें उस समय इलाज के लिए देश से बाहर जाने की अनुमति मिली थी। इसके बाद वे देश नहीं लौटे।

टाइम मैगजीन के मुताबिक देश से बाहर रहने के बावजूद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) में तारिक को ही पार्टी का नेता माना जाता रहा। पार्टी की रणनीति, आंदोलन और राजनीतिक लाइन लंबे समय तक उन्हीं के इशारों पर तय होती रही।
तारिक रहमान खुद को शांत, सुनने वाला और पॉलिसी पर फोकस नेता की तरह पेश कर रहे हैं। वे हर साल 5 करोड़ पेड़ लगाने, ढाका में नए ग्रीन जोन बनाने और तकनीकी शिक्षा बढ़ाने की बात करते हैं।

 

हसीना के तख्तापलट में शामिल नाहिद इस्लाम सिर्फ 2000 वोट से जीते

शेख हसीना के तख्तापलट में शामिल रहे NCP नेता नाहिद इस्लाम महज 2,039 वोटों से चुनाव जीत पाए हैं। ढाका-15 सीट पर उनका मुकाबला BNP उम्मीदवार एम.ए. कय्यूम से था।
नाहिद इस्लाम को 93,872 वोट मिले, जबकि एम.ए. कय्यूम को 91,833 वोट मिले। ढाका-15 सीट पर कुल 4,39,078 मतदाता हैं, जिनमें 2,22,877 पुरुष और 2,16,198 महिला मतदाता हैं।

 

बांग्लादेशी संविधान में भी बड़े बदलाव की तैयारी

बांग्लादेश में संविधान सुधार से जुड़े प्रस्तावों पर जारी जनमत संग्रह में अभी तक ‘YES’ वोट आगे चल रहा है। संसदीय चुनाव के दिन यानी कल ही सरकार ने संविधान सुधारों से जुड़े प्रस्तावों को लागू करने के लिए जनमत संग्रह कराया था।
अगर ‘YES’ जीतता है तो सरकार इन संविधान सुधारों को लागू कर सकेगी। इन बदलावों के तहत प्रधानमंत्री की कुछ ताकतें कम होंगी और राष्ट्रपति की कुछ ताकतें बढ़ेंगी।

संवैधानिक पदों पर नियुक्ति एक समिति करेगी, जिसमें सत्ताधारी दल, विपक्ष और कुछ मामलों में न्यायपालिका के प्रतिनिधि शामिल रहेंगे। अभी ज्यादातर कार्यकारी अधिकार प्रधानमंत्री के पास रहते हैं और राष्ट्रपति को अधिकतर फैसले प्रधानमंत्री की सलाह पर लेने पड़ते हैं।

जनमत संग्रह के पक्ष में रिजल्ट आने पर पर देश में दो सदनों वाली संसद बनेगी। तब संविधान में बदलाव करने के लिए निचले सदन में दो-तिहाई और ऊपरी सदन में बहुमत का समर्थन जरूरी होगा।
अगर ‘हां’ जीतता है तो अगले राष्ट्रीय चुनाव के बाद चुने गए प्रतिनिधि मिलकर एक संविधान सुधार परिषद बनाएंगे। यह परिषद अपनी पहली बैठक से 180 कार्यदिवस के भीतर सुधार का काम पूरा करेगी। हालांकि अगर परिषद तय समय में सुधार पूरा नहीं कर पाती है, तो आगे क्या होगा यह साफ नहीं बताया गया है।

प्रस्ताव यह भी कहते हैं कि कोई भी इंसान जीवन में अधिकतम 10 साल तक ही प्रधानमंत्री रह सकेगा। साथ ही प्रधानमंत्री अपनी पार्टी का प्रमुख नहीं रहेगा। हालांकि इस मुद्दे पर BNP की राय अलग है। इन बदलावों के बाद राष्ट्रपति मानवाधिकार आयोग, सूचना आयोग, प्रेस काउंसिल, विधि आयोग, बांग्लादेश बैंक के गवर्नर और ऊर्जा नियामक आयोग जैसे पदों पर अपने अधिकार से नियुक्ति कर सकेंगे।

अमेरिका ने तारिक रहमान को जीत की बधाई दी

ढाका स्थित अमेरिकी दूतावास ने बांग्लादेश संसदीय चुनाव में जीत पर BNP और उसके अध्यक्ष तारिक रहमान को बधाई दी। दूतावास ने अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट कर बांग्लादेश की जनता को सफल चुनाव कराने के लिए भी शुभकामनाएं दीं।
पोस्ट में कहा गया कि अमेरिका दोनों देशों की समृद्धि और सुरक्षा के साझा लक्ष्य को हासिल करने के लिए बांग्लादेश के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।

 

तारिक रहमान की BNP पार्टी के चुनावी वादे

महिला सशक्तिकरण

महिलाओं के नाम पर ‘फैमिली कार्ड’ जारी किया जाएगा।
महिलाओं को पोस्ट ग्रेजुएशन तक मुफ्त पढ़ाई दी जाएगी।

बुलेट ट्रेन

ढाका को देश के बड़े शहरों से जोड़ने के लिए हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) चलाई जाएगी।

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा

हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की जान, संपत्ति और पूजा स्थलों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाए जाएंगे।

अर्थव्यवस्था

छोटे उद्योगों को टैक्स में छूट दी जाएगी।
विदेशों में काम करने वाले बांग्लादेशी मजदूरों के लिए खास कल्याण फंड बनाया जाएगा।

 

प्रशासनिक सुधार

न्यायपालिका को और मजबूत व स्वतंत्र बनाया जाएगा।
चुनाव आयोग को ज्यादा अधिकार दिए जाएंगे।
प्रशासन में सुधार कर भ्रष्टाचार कम किया जाएगा।

 

जमात ए इस्लामी के हिंदू उम्मीदवार चुनाव हारे

जमात ए इस्लामी के हिंदू उम्मीदवार कृष्णा नंदी खुलना-1 से हार गए। उन्हें BNP उम्मीदवार आमिर एजाज खान 50,434 वोटों से हराया। आमिर एजाज खान को कुल 1,20,092 वोट मिले, जबकि कृष्णा नंदी को 69,658 वोट मिले।

NCP का आरोप- चुनाव नतीजों में गड़बड़ी की साजिश हो रही
ढाका में नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के प्रवक्ता आसिफ महमूद सजीब भुइयां ने आरोप लगाया है कि चुनाव के नतीजों में गड़बड़ी की साजिश हो रही है। गुरुवार देर रात राजधानी ढाका के बांग्लामोटर स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने यह बात कही।
NCP का आरोप है कि गलत वोट को गिनकर BNP उम्मीदवार को जिताने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ढाका-15 सीट पर जब 20 हजार वोटों का अंतर था, तब BNP उम्मीदवार ने फेसबुक पर खुद को विजेता घोषित कर दिया, जिससे दबाव बनाने की कोशिश हुई।

 

हसीना बोलीं- चुनाव पूरी तरह दिखावटी और फिक्स

शेख हसीना ने गुरुवार को हुए चुनाव को पूरी तरह से दिखावटी और पहले से तय किया हुआ बताया। उन्होंने कहा कि यूनुस ने गैरकानूनी और असंवैधानिक तरीके से सत्ता पर कब्जा किया और उसी के तहत यह चुनाव कराया गया।

हसीना के मुताबिक इस चुनाव में लोगों के वोट देने के अधिकार, लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की भावना का सम्मान नहीं किया गया। आवामी लीग की भागीदारी के बिना कराया गया यह चुनाव जनता के साथ धोखा है।

बयान में कहा गया कि 11 फरवरी की शाम से ही कई मतदान केंद्रों पर कब्जा किया गया, गोलियां चलाई गईं, पैसे बांटे गए, बैलेट पेपर पर जबरन मुहर लगाई गई और एजेंटों से नतीजों पर हस्ताक्षर करवाए गए। 12 फरवरी की सुबह तक देश के ज्यादातर मतदान केंद्रों पर बहुत कम लोग वोट देने पहुंचे और कई जगह तो कोई मतदाता ही नहीं था।

 

एक्सपर्ट बोले- भारत से रिश्ते रीसेट करने में रहमान बेहतर

बांग्लादेश में बदले राजनीतिक हालात के बीच भारत-बांग्लादेश रिश्तों को लेकर नई चर्चा हो रही है। बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त रहीं वीना सीकरी का कहना है कि तारिक रहमान भारत के साथ संबंधों को फिर से संतुलित करने में बेहतर भूमिका निभा सकते हैं।

उनके मुताबिक, शेख हसीना के बाद बने नए माहौल में दोनों देशों के रिश्तों को नए सिरे से मजबूत करने की जरूरत होगी। उनका मानना है कि रहमान के साथ लोकतंत्र की बहाली, पहले से हुए समझौतों को जारी रखने और भारत के पूर्वोत्तर के अलगाववादी संगठनों को समर्थन न देने जैसे मुद्दों पर सहमति बन सकती है।

 

बांग्लादेश को 35 साल बाद पुरुष प्रधानमंत्री मिलेगा

बांग्लादेश में 35 साल बाद कोई पुरुष प्रधानमंत्री बनेगा। 1988 में काजी जफर अहमद प्रधानमंत्री बने थे। इसके बाद 1991 से 2024 तक बांग्लादेश की राजनीति में पूर्व पीएम शेख हसीना और खालिदा जिया का दबदबा रहा। ये दोनों ही प्रधानमंत्री बनती रहीं।

शेख हसीना के देश छोड़ने और खालिदा जिया के निधन के बाद यह पहला चुनाव था। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को इस चुनाव में हिस्सा लेने की इजाजत नहीं दी गई थी। चुनाव आयोग का कहना था कि 2024 में हुए छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में पार्टी की भूमिका की वजह से यह फैसला लिया गया था।

 

जमात के हिंदू उम्मीदवार कृष्ण नंदी 50 हजार से ज्यादा वोट से हारे

खुलना-1 निर्वाचन क्षेत्र में जमात-ए-इस्लामी के हिंदू उम्मीदवार कृष्ण नंदी को 50 हजार से अधिक वोटों से हार का सामना करना पड़ा। अनौपचारिक नतीजों में BNP उम्मीदवार आमिर एजाज खान विजयी घोषित हुए हैं। BNP के आमिर एजाज खान को 1,20,092 वोट मिले। वहीं जमात उम्मीदवार कृष्ण नंदी को 69,658 वोट मिले। इस तरह दोनों के बीच 50 हजार से अधिक वोटों का अंतर रहा।

BNP ने 165 सीटें जीतीं

बांग्लादेश चुनाव में BNP ने 165 सीटें जीतकर अजेय बढ़त हासिल कर ली है। अब तक 299 में से 213 सीटों के नतीजे आ चुके हैं।

206 सीटों के नतीजे घोषित, BNP की 159 पर जीत

बांग्लादेश चुनाव में अब तक 206 सीटों के नतीजे सामने आ चुके हैं। तारिक रहमान की BNP को 159 सीटों पर जीत मिली है, जबकि जमात ने 45 सीटों पर जीत दर्ज की है।

 

BNP को बहुमत मिला, 151 सीटें जीतीं

बांग्लादेश चुनाव में BNP को बहुमत मिल गया है। पार्टी ने 151 सीटों पर जीत दर्ज की है। इसके साथ उसके सरकार बनाने का रास्ता भी साफ हो गया है।

 

BNP महासचिव मंजूर इलाही जीते

BNP महासचिव मंजूर इलाही ने नरसिंदी-3 (शिबपुर) सीट से जीत हासिल की है। उन्हें 81,415 वोट मिले, जबकि उनके विपक्षी निर्दलीय उम्मीदवार आरिफ उल इस्लाम मृधा को 45,401 वोट मिले।102 बूथों की काउंटिंग के बाद अनौपचारिक चुनावी नतीजे घोषित किए गए।

ढाका-15 सीट से जमात चीफ शफीकुर रहमान जीते

ढाका-15 सीट से जमात-ए-इस्लामी के चीफ डॉ. शफीकुर रहमान ने जीत दर्ज की है। गुरुवार रात वोटों की गिनती के बाद उन्हें अनौपचारिक तौर पर विजेता घोषित किया गया। आधिकारिक सूचना चुनाव आयोग की ओर से जारी की जाएगी। इस सीट पर मुकाबला काफी चर्चित रहा था।

 

NCP ने नतीजे बदलने की कोशिश का आरोप लगाया

नेशनल सिटिजन्स पार्टी (NCP) के नेता नासिरुद्दीन पटवारी ने अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट कर दावा किया कि “नतीजों को बदलने के प्रयास किए जा रहे हैं, सभी सावधान रहें। जो लोग अभी तक अपने मतदान केंद्रों की सुरक्षा के लिए नहीं आए हैं, वे आगे आएं।”
पार्टी संयोजक नाहिद इस्लाम ने समर्थकों से ढाका के आठों निर्वाचन क्षेत्रों में जाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि छात्रों और आम लोगों के मतदान अधिकारों की रक्षा के लिए सभी को आगे आना चाहिए।