737 भारतीय श्रद्धालुओं को पाकिस्तान का वीजा: सिख श्रद्धालुओं के लिए अच्छी खबर है। पाकिस्तान ने 737 भारतीय श्रद्धालुओं को वीज़ा जारी किए हैं, जिससे वे गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस से जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल हो सकेंगे। यह तीर्थयात्रा 10 जून से 19 जून, 2026 तक होगी, जिसके दौरान यह समूह पाकिस्तान में स्थित कई ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन करेगा।
737 भारतीय श्रद्धालुओं को पाकिस्तान का वीजा, यह तीर्थयात्रा क्यों महत्वपूर्ण है?
हर साल, गुरु अर्जन देव जी का शहीदी दिवस मनाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु भारत से पाकिस्तान जाते हैं। इसी परंपरा को जारी रखते हुए, पाकिस्तान सरकार ने इस साल भी भारतीय श्रद्धालुओं को वीज़ा जारी किए हैं। यह धार्मिक यात्रा दोनों देशों के बीच एक विशेष पहल का हिस्सा है, जो अलग-अलग धर्मों के लोगों को पवित्र स्थलों की यात्रा करने की सुविधा देती है।
किन गुरुद्वारों के दर्शन किए जाएंगे?
इस तीर्थयात्रा के दौरान, श्रद्धालु पाकिस्तान में कई प्रसिद्ध और पवित्र गुरुद्वारों में मत्था टेकेंगे। इनमें प्रमुख हैं:
- गुरुद्वारा ननकाना साहिब, जो सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्मस्थान है।
- गुरुद्वारा पंजा साहिब, जिसे सिखों के लिए एक प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है।
- गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर, जहाँ गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन के अंतिम वर्ष बिताए थे।
इनके अलावा, वे अन्य ऐतिहासिक गुरुद्वारों के भी दर्शन करेंगे।
SGPC ने क्या कहा?
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने बताया कि उसने 561 श्रद्धालुओं के लिए पासपोर्ट आवेदन जमा किए थे। इनमें से 541 लोगों को वीज़ा मिल गया है। बाकी श्रद्धालुओं ने अन्य माध्यमों से अपने वीज़ा प्राप्त किए हैं। श्रद्धालुओं का पूरा समूह 10 जून को अमृतसर से पाकिस्तान के लिए रवाना होगा।
SGPC ने श्रद्धालुओं से यह भी आग्रह किया है कि वे समय पर अपने दस्तावेज़ इकट्ठा कर लें और यात्रा की सभी तैयारियां पूरी कर लें।
पाकिस्तान उच्चायोग का बयान
नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग ने 1974 की घटनाओं को याद करते हुए एक विशेष स्मारक संस्करण जारी करने की घोषणा की है। उच्चायोग ने सभी भारतीय श्रद्धालुओं को सफल और सुरक्षित यात्रा के लिए शुभकामनाएं दी हैं।
सिख समुदाय के लिए यह कार्यक्रम क्यों महत्वपूर्ण है? सिख धर्म के प्रचार-प्रसार में गुरु अर्जन देव जी ने अहम भूमिका निभाई। उनके शहीदी दिवस को सिख समुदाय के लिए सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक मौकों में से एक माना जाता है। इस दिन गुरु को याद किया जाता है और उनकी शिक्षाओं को याद किया जाता है।
धार्मिक तीर्थयात्राओं की भूमिका
हालांकि भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक रिश्तों में अक्सर चुनौतियां आती रहती हैं, लेकिन धार्मिक तीर्थयात्राएं दोनों देशों के लोगों को जोड़ने का काम करती हैं। हर साल, हजारों लोग अपने पवित्र धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए सीमा पार करते हैं। इससे धार्मिक आस्था के प्रति सम्मान बढ़ता है और आपसी संबंध मजबूत होते हैं।
गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस के मौके पर पाकिस्तान में पवित्र गुरुद्वारों में मत्था टेकने के लिए 737 भारतीय तीर्थयात्रियों के जाने से खुशी का माहौल है।



