MP OBC 27% रिजर्वेशन : मध्य प्रदेश के लाखों युवा जो सरकारी नौकरियों की आस लगाए बैठे हैं अब उनकी निगाहें एक बार सुप्रीम कोर्ट की तरफ ठहर गई हैं। जी हां, MP OBC 27% रिजर्वेशन वाला यह मामला जो अब तक कानूनी दांव पेंच में फंसा हुआ था अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दे दिया है कि इस मामले पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट 2 महीनों में फैसला सुना देगी। इस आदेश से साफ पता चलता है कि अगले 2 महीनों में मध्य प्रदेश में अटकी हुई भर्तियों का रास्ता साफ हो जाएगा
2019 में जब OBC वर्ग ने 14% आरक्षण को बढ़ाकर 27% करने का प्रस्ताव पेश किया था तब इस मामले को सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा था। लेकिन अदालत में लगातार चुनौतियों के बाद यह फैसला अटक गया। 6 साल तक लगातार इसपर पर सुनवाई चलती रही। हजारों पद खाली गए। लाखों युवा इंतजार में एलिजिबिलिटी से बाहर हो गए। भर्ती प्रक्रियाओं पर अनिश्चितता की तलवार लटकती रही और सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार इस मामले पर सख्ती अपनाते हुए दो महीना की समय सीमा तय कर दी है और सारे मामले को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में भेज दिया है।
क्या है MP OBC 27% रिजर्वेशन मामला ?
मध्य प्रदेश विधानसभा में 2019 में पिछड़े वर्ग को फायदा देने के उद्देश्य से OBC रिजर्वेशन को बढ़ाकर 27% करने का कानून बनाया गया था। लेकिन यह विवाद तब खड़ा हुआ जब हाई कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी। MP OBC 27% रिजर्वेशन मामला पिछले 6 सालों से कोर्ट में ही अटका हुआ है। ना आरक्षण लागू हो पाया और ना ही लाखों नियुक्तियां की जा सकी।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई जिसमें बताया गया कि राज्य सरकार और मध्य प्रदेश पब्लिक सर्विस कमिशन में 13% बचे हुए आरक्षण पदों पर भी भर्ती नहीं की गई। वर्षों तक इस मामलों को सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया। हाई कोर्ट में दलीलें पेश की गई लेकिन हर बार मामला आरोप-प्रत्यारोप तक ही सिमट कर रह जाता कोई ठोस फैसला नहीं लिया जा रहा था।
क्या है सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को फटकार लगाई गई है और सभी लंबी याचिाकाओं को फटाफट सुलझाने का नोटिस दे दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को झाड़ लगाते हुए कहा है कि दो महीनों बके भीतर अंतिम फैसला ले लिया जाए। मतलब अब हाई कोर्ट इस मामले में आखिरी निर्णय लेगा।
इस फैसले का यह मतलब होगा कि हाई कोर्ट तय करेगा कि इस मामले को अंतिम रूप से कैसे निपटाया जाए? हालांकि हाई कोर्ट की कर्तव्य सीमा भी तय कर दी गई है। अगर हाई कोर्ट ने सही निर्णय नहीं लिया तो सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप करेगा। मतलब हाई कोर्ट को निर्णय सोच समझ कर लेना होगा और दी गई डेडलाइन के अंदर ही इस मुद्दे को समाप्त करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से भर्तियों पर क्या असर होगा ?
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय उन लाखों युवाओं के लिए बहुत बड़ी खबर साबित होने वाला है जो लंबे समय से MP OBC 27% रिजर्वेशन आरक्षण का लाभ लेना चाहते थे। लेकिन 27% आरक्षण की खबर के वजह से भर्तियां टल गई और कई सारे पदों पर अभ्यर्थियों को नियुक्त नहीं किया गया। अब दो महीनों के भीतर हाई कोर्ट इस मामले को सुलझाएगा। जिससे संभावना बढ़ जाएगी कि जल्द से जल्द भर्तियां की जा सके। अगर हाई कोर्ट निर्देश देता है कि 27% ओबीसी आरक्षण लागू किया जाए तो अटकी हुई नौकरियों के पद भर ही जाएंगे। और इंतजार कर रहे अन्य अभ्यर्थियों को भी इसमें राहत मिलेगी।
MP OBC 27% रिजर्वेशन में आगे क्या होगा ?
- MP OBC 27% रिजर्वेशन वाले मामले में अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट अंतिम फैसला लेगी।
- हाईकोर्ट यदि 27% ओबीसी आरक्षण लागू करता है तो पुरानी भर्तियां और नई नियुक्तियां होगी।
- यदि हाईकोर्ट 14% आरक्षण को ही लागू मानकर फैसला लेता है तो पुरानी भर्तियां गठित की जाएगी।
- यदि हाई कोर्ट पेंडिंग मुद्दों को फिर से रोक कर रखता है तो यह मामला फिर से सुप्रीम कोर्ट में जाएगा।
कुल मिलाकर MP OBC 27% रिजर्वेशन अब कानून और न्यायपालिका का मुद्दा नहीं रहा एमपी ओबीसी 27% आरक्षण वाला मुद्दा अब सामाजिक मुद्दों को जन्म दे रहा है। क्योंकि लंबे समय से बेरोजगारी की दर बढ़ती जा रही है। एलिजिबल युवाओं को जॉब नहीं मिल पा रहा। उनकी नियुक्तियां नहीं हो पा रही हैं। लंबे समय से कई सारे पद खाली जा रहे हैं। हाई कोर्ट सही निर्णय नहीं ले पा रहा। सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट को झाड़ लगा रहा है। लगातार सरकारी नौकरी चयन प्रक्रियाओं में असंतुलन पैदा हो रहा है। अब देखना यह होगा कि अगले 2 महीना में MP हाईकोर्ट इस प्रक्रिया को कैसे अंजाम दिया जाता है।

