मध्यप्रदेश के गुना ज़िले से एक ऐसा मामला सामने आया है जो न सिर्फ इंसानियत को शर्मसार करता है, बल्कि पुलिस व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े करता है। बामोरी थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की के साथ तीन युवकों ने गैंगरेप किया। और जब पीड़िता का परिवार न्याय म...

मध्यप्रदेश के गुना ज़िले से एक ऐसा मामला सामने आया है जो न सिर्फ इंसानियत को शर्मसार करता है, बल्कि पुलिस व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े करता है। बामोरी थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की के साथ तीन युवकों ने गैंगरेप किया। और जब पीड़िता का परिवार न्याय माँगने थाने पहुँचा, तो पुलिस ने FIR लिखने से साफ मना कर दिया। शारीरिक दर्द और मानसिक तकलीफ से टूटी पीड़िता ने घर लौटकर ज़हरीला पदार्थ खा लिया। अभी वो ज़िला अस्पताल में ज़िंदगी और मौत के बीच झूल रही है, हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।
यह घटना 25 अप्रैल को हुई। उस दिन पीड़िता की माँ पास के एक गाँव में तेरहवीं के कार्यक्रम में गई हुई थीं। घर में लड़की अकेली थी — और इसी का फायदा उठाने की साज़िश रची गाँव के एक युवक ने। दोपहर करीब 3 बजे वो आरोपी पीड़िता के पास आया और झूठ बोला कि उसकी माँ ने उसे बुलाया है। लड़की माँ के पास जाने के लिए उसकी मोटरसाइकिल पर बैठ गई। रास्ते में जब उसने सवाल किया कि रास्ता कहाँ जा रहा है, तो आरोपी ने धमकी देकर उसे जंगल की तरफ खींच ले गया — जहाँ उसके दो और साथी पहले से मौजूद थे।
उन तीन दरिंदों ने उस मासूम के साथ बारी-बारी से गैंगरेप किया। जब लड़की की हालत बिगड़ने लगी, तो घबराए आरोपी उसे इलाज का बहाना बनाकर शिवपुरी ले गए और वहाँ मेडिकल कॉलेज के बाहर उसे अकेला छोड़कर फरार हो गए। इधर परिवार वाले घर में बेटी को ढूँढते रहे, थाने-दर-थाने भटकते रहे। जब परिवार ने शुरू में मुख्य आरोपी से पूछा तो उसने साफ मुकर गया — कहा कि उसे लड़की के बारे में कुछ नहीं पता।
बाद में आरोपी ने अपने एक रिश्तेदार को सच्चाई बता दी। उसी से परिवार को पता चला कि उनकी बेटी शिवपुरी के अस्पताल में है। परिवार वहाँ पहुँचा, बेटी को वापस लाया और न्याय के लिए बामोरी थाने गए — लेकिन वहाँ जो हुआ वो और भी दर्दनाक था।
थाने में पुलिस ने यह कहकर टरका दिया कि जाँच हो चुकी है, शिकायत दर्ज नहीं होगी। एक नाबालिग गैंगरेप पीड़िता का परिवार दरवाज़े-दरवाज़े भटक गया और पुलिस ने उसे खाली हाथ लौटा दिया। पहले दरिंदों ने लड़की की ज़िंदगी तबाह की, फिर उस व्यवस्था ने उसे अकेला छोड़ दिया जो उसकी रक्षा के लिए बनी है।
शारीरिक चोट, मानसिक आघात और पुलिस की बेरुखी सब एक साथ झेलते-झेलते वो नाबालिग लड़की टूट गई। घर लौटकर उसने ज़हरीला पदार्थ खा लिया। परिवार ने उसे तुरंत ज़िला अस्पताल पहुँचाया, जहाँ अभी भी उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।
यह सिर्फ एक अपराध की खबर नहीं है — यह उस व्यवस्था की नाकामी की दास्तान है जो पीड़ित को न्याय देने की बजाय उसे और तोड़ देती है।
जब एक नाबालिग गैंगरेप पीड़िता थाने पहुँचती है और पुलिस FIR तक नहीं लिखती — तो वो बच्ची कहाँ जाए? किसके पास जाए? उसका दोष क्या था? यह मामला अब सिर्फ गुना का नहीं रहा — यह पूरे मध्यप्रदेश की पुलिस व्यवस्था और न्याय तंत्र पर एक बड़ा सवालिया निशान है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और पुलिस की जवाबदेही तय हो — यही माँग अब हर ज़ुबान पर है।
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