राज्य की राजधानी भोपाल में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में कैंसर के मरीज़ों को काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग में लगी अत्याधुनिक IHC (इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री) मशीन पिछले लगभग पाँच महीनों से काम नहीं कर रही है। इस मशीन के खराब होने से कैंसर के मरीज़ों की जाँच और इलाज, दोनों पर बुरा असर पड़ रहा है। मरीज़ों को निजी लैब में महँगे टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं, जिससे उन पर आर्थिक बोझ काफ़ी बढ़ गया है।
कैंसर की सटीक जाँच के लिए IHC टेस्ट ज़रूरी
डॉक्टरों के मुताबिक, कैंसर की सटीक पहचान के लिए IHC टेस्ट बहुत ज़रूरी है। इसी टेस्ट के आधार पर इलाज का सही तरीका तय किया जाता है—कि मरीज़ को कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी या सर्जरी की ज़रूरत है या नहीं। मशीन के खराब होने की वजह से रिपोर्ट समय पर नहीं मिल पा रही हैं, जिससे मरीज़ों के इलाज में लगातार देरी हो रही है।

निजी लैब में मरीज़ों का खर्च बढ़ा
पहले यह टेस्ट एम्स भोपाल में बहुत कम कीमत पर उपलब्ध था; लेकिन अब मरीज़ों को निजी लैब में इसके लिए ₹4,000 से ₹8,000 तक खर्च करने पड़ रहे हैं। यह खर्च आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों के लिए एक भारी बोझ साबित हो रहा है। कई मरीज़ पहले ही दवाओं और इलाज पर बड़ी रकम खर्च कर चुके हैं; ऐसे में, इन जाँच टेस्टों का अतिरिक्त खर्च उनकी परेशानी को और बढ़ा रहा है।
मरीज़ों और उनके परिवारों में नाराज़गी
सतना से अपनी माँ के इलाज के लिए आए एक मरीज़ के परिजन ने बताया कि डॉक्टर ने IHC टेस्ट करवाने को कहा था, लेकिन अस्पताल ने उन्हें बताया कि मशीन खराब है। नतीजतन, उन्हें यह महँगा टेस्ट बाहर किसी निजी लैब से करवाना पड़ा। मरीज़ों और उनके परिवारों का कहना है कि देश के एक प्रमुख सरकारी अस्पताल में किसी मशीन का महीनों तक खराब पड़े रहना घोर लापरवाही है।
एम्स दूसरे टेस्टों के लिए भी लंबा इंतज़ार
सिर्फ़ IHC टेस्ट ही नहीं, बल्कि मरीज़ों को दूसरे ज़रूरी जाँच टेस्टों के लिए भी लंबा इंतज़ार करना पड़ रहा है। कैंसर के मरीज़ों को PET स्कैन के लिए दो से तीन महीने बाद की तारीखें दी जा रही हैं, जबकि MRI स्कैन के लिए इंतज़ार का समय चार से पाँच महीने तक पहुँच गया है। यहाँ तक कि आम मरीज़ों को भी CT स्कैन के लिए 15 से 30 दिन पहले की अपॉइंटमेंट दी जा रही हैं।
शीघ्र समाधान की मांग
स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बात पर ज़ोर देते हैं कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में, समय पर निदान और उपचार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ज़रा सी भी देरी मरीज़ की हालत को गंभीर रूप से बिगाड़ सकती है। इसलिए, मरीज़ों को राहत पहुँचाने के लिए अस्पताल प्रबंधन को जल्द से जल्द मशीन की मरम्मत करवानी चाहिए।
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