भोपाल की बरकतुल्ला यूनिवर्सिटी (BU) ने अपनी परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। यूनिवर्सिटी पारंपरिक तरीके से हाथ से उत्तर-पुस्तिका (answer-script) की जांच करने के बजाय ऑनलाइन डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली अपनाने की तैयारी कर रही है। अगर टेंडर प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाती है, तो नई प्रणाली 2026-27 शैक्षणिक सत्र से लागू की जा सकती है।

मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज़ और त्रुटि-मुक्त बनाने के उद्देश्य से यह बदलाव लगभग 3.5 लाख छात्रों वाली यूनिवर्सिटी के लिए किया जा रहा है। नई प्रणाली लागू होने के बाद, छात्रों की उत्तर-पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कंप्यूटर स्क्रीन पर किया जाएगा और उनके पूरे शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिटल प्रारूप में सुरक्षित रूप से रखे जाएंगे।

बरकतुल्ला यूनिवर्सिटी की नई प्रणाली कैसे काम करेगी?

यूनिवर्सिटी प्रशासन के अनुसार, उत्तर-पुस्तिकाओं को हाई-स्पीड स्कैनर का उपयोग करके स्कैन किया जाएगा। खास बात यह है कि पुस्तिका की बाइंडिंग या स्पाइन को नुकसान पहुंचाए बिना पूरी उत्तर-पुस्तिका की डिजिटल कॉपी बनाई जाएगी।

इसके बाद, सभी उत्तर-पुस्तिकाओं को एक केंद्रीय सर्वर पर अपलोड किया जाएगा और प्रत्येक पुस्तिका को एक यूनिक आईडी दी जाएगी। परीक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर इन डिजिटल प्रतियों को देखकर उत्तर-पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करेंगे। इससे उत्तर-पुस्तिकाओं के खोने, अंकों के योग में त्रुटि या किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना काफी कम हो जाएगी।

छात्रों को क्या लाभ होंगे?

नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली छात्रों के लिए कई प्रमुख लाभ प्रदान करती है:

  • परिणाम जल्दी घोषित किए जा सकते हैं।
  • मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।
  • अंकों के योग में त्रुटियां कम से कम होंगी।
  • पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता कम हो जाएगी।
  • छात्रों के पूरे शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रूप से संग्रहीत किए जाएंगे।
  • उत्तर-पुस्तिकाओं के साथ छेड़छाड़ की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।

चुनौतियां भी हैं

हालांकि इस कदम को बहुत सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है, लेकिन यूनिवर्सिटी को तकनीकी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। इस साल की शुरुआत में, CBSE ने कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली लागू की थी, जिसमें कई मामलों में खराब स्कैनिंग गुणवत्ता और धुंधली छवियों जैसी समस्याएं सामने आई थीं। इस संदर्भ में, BU के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना होगा कि स्कैनिंग और मूल्यांकन प्रणाली पूरी तरह से सटीक और विश्वसनीय बनी रहे, ताकि छात्रों को किसी भी कठिनाई का सामना न करना पड़े।

अगले सत्र से लागू होने की संभावना

यूनिवर्सिटी प्रबंधन का कहना है कि नोडल एजेंसी का चयन होने के बाद इस परियोजना पर तेजी से काम शुरू हो जाएगा। अगर सभी प्रक्रियाएँ समय पर पूरी हो जाती हैं, तो आने वाले 2026-27 शैक्षणिक सत्र से डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को अनिवार्य रूप से लागू किया जा सकता है।

इस नई प्रणाली को उच्च शिक्षा क्षेत्र में एक बड़े तकनीकी बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे परीक्षा परिणामों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता, दोनों के बेहतर होने की उम्मीद है।