सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे छात्र लगातार एक समस्या का सामना कर रहे हैं वह है नॉर्मलाइजेशन, इसे सामान्यीकरण भी बोल सकते हैं। इस समस्या का सामना SSC CGL की तैयारी कर रहे देश भर के लाखों छात्र कर रहे हैं।

सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे छात्र लगातार एक समस्या का सामना कर रहे हैं वह है नॉर्मलाइजेशन, इसे सामान्यीकरण भी बोल सकते हैं। इस समस्या का सामना SSC CGL की तैयारी कर रहे देश भर के लाखों छात्र कर रहे हैं।
बीते कुछ दिनों से बेरोजगारी पर चल रहे कैंपन में नॉर्मलाइजेशन की बात भी सामने निकलकर आयी है। छात्रों का मानना है कि इस प्रकिया से उनके मेहनत करने का भी कोई नतीजा नहीं निकलता और छात्र चाहते हैं कि नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया सरकार को पूरी तरह से बंद कर देनी चाहिए।
आइए जानते हैं क्या है नॉर्मलाइजेशन-

नार्मलाइजेशन की विस्तार से बात की जाए तो हमें SSC CGL के एग्जाम प्रोसस को समक्षना होगा, SSC CGL या कोई अन्य विभाग एक एग्जाम कंडेक्ट कराने के लिए कुछ अलग अगल दिन चुनता है ताकि सभी लोगों का ठीक तरह से एग्जाम लिया जा सके लेकिन अगल अलग दिन चुनने की वजह से एक ही एग्जाम का पेपर सेट भी अलग अलग होता है। किसी दिन का पेपर सेट सरल होता है तो किसी दिन का कठिन ऐसे में SSC बोर्ड सभी पेपर सेट के नम्बर का एवरेज निकालता है ताकि छात्रों के अंको को बराबर किया जा सके।
एग्जाम पेपर के अंको को बराबर करने के लिए बोर्ड एक फॉर्मुला लागू करता है जिससे के कठिन पेपर सेट का एग्जाम देकर आए छात्रों के नम्बर बढ़ा दिए जाते हैं और सरल पेपल सेट का एग्जाम देकर आए बच्चों के नम्बर कम कर दिए जाते हैं। ताकि नम्बर का बराबर ऐवरेज निकाला जाए।
वैसे तो नार्मलाइजेशन छात्रों मे समान अंक बांटने की प्रोसेस है लेकिन इसके कुछ गंभीर दुष्प्रभाव है जिनका छात्र सालों से सामना कर रहे हैं।
यहां जाने नार्मलाइजेशन के दुष्प्रभाव-
बीते कुछ दिनों से चल रहे #modi_rojgar_do और #modi_job_do के ट्रेंड में नार्मलाइजेशन एक अहम मुद्दा सामने निकलकर आया है जिस पर कई छात्र SSC CGL बोर्ड पर सवाल उठा रहे हैं, इतना वाकी कुछ बोर्ड भी हैं जो नार्मलाइजेशन की प्रकिया लागू करते हैं जिससे की कई छात्रों को 100 प्रतिशत मेहनत के बाद भी किस्त्म के भरोसे बैठना पढ़ता है।