Yam Panchak 2026 कब से कब तक मनाया जाएगा? जानें नेपाल के तिहार पर्व की पांच दिनों की परंपराएं, कौवा-कुत्ता पूजा, लक्ष्मी पूजा और भाई टीका का महत्व।

नेपाल में साल 2026 में यम पंचक की प्रमुख परंपराएं 7 नवंबर से 11 नवंबर तक मनाई जाएंगी। हालांकि, तिहार से जुड़ी धनतेरस और धन्वंतरि जयंती की शुरुआत 6 नवंबर से होगी। नेपाल की पंचांग निर्धारण समिति की घोषणा और काठमांडू महानगरपालिका के कैलेंडर के अनुसार इस बार के प्रमुख पर्वों की तारीखें तय हैं।
2026 में पांच दिनों के प्रमुख आयोजन इस प्रकार हैं:
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तारीख |
पर्व और परंपरा |
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7 नवंबर |
काग तिहार (कौवा पूजा) |
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8 नवंबर |
कुकुर तिहार और लक्ष्मी पूजा |
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9 नवंबर |
गाई तिहार (गाय पूजा) |
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10 नवंबर |
गोवर्धन पूजा, गोरु पूजा और म्ह पूजा |
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11 नवंबर |
भाई टीका |
इस साल भाई टीका के लिए नेपाल की पंचांग निर्धारण समिति ने सुबह 11:07 बजे का शुभ समय घोषित किया है। यह समय नेपाल के स्थानीय समय के अनुसार है।
यम पंचक नेपाल में मनाए जाने वाले पांच दिवसीय तिहार पर्व का धार्मिक और सांस्कृतिक नाम है। इसे दीपावली या दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। नेपाल के अलग-अलग समुदायों में इस त्योहार को मनाने के तरीके थोड़े अलग हो सकते हैं, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य सुख-समृद्धि, पारिवारिक रिश्तों और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान व्यक्त करना है।
भारतीय दिवाली में जहां मुख्य रूप से भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा, दीप प्रज्वलन और घरों की सजावट पर जोर रहता है, वहीं नेपाल के तिहार में कौवे, कुत्ते, गाय और बैल जैसे जीवों को भी विशेष रूप से सम्मान दिया जाता है।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, तिहार के पांच दिनों में यमराज, माता लक्ष्मी और पशु-पक्षियों से जुड़ी धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं। इस पर्व का समापन भाई टीका के साथ होता है, जिसमें बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं।
यम पंचक का पहला प्रमुख दिन काग तिहार यानी कौवा पूजा का होता है। नेपाली धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं में कौवे को यमराज का संदेशवाहक माना जाता है।
इस दिन लोग सुबह अपने घरों की छतों, आंगन या खुले स्थानों पर कौवों के लिए भोजन रखते हैं। मान्यता है कि कौवों को भोजन कराने से परिवार पर आने वाली परेशानियां और अनहोनी टल सकती हैं।
कौवे को शुभ और अशुभ समाचारों से जोड़कर भी देखा जाता है। इसलिए इस परंपरा के पीछे केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि लोकविश्वास और पूर्वजों से जुड़ी मान्यताएं भी हैं।
तिहार का दूसरा प्रमुख आकर्षण कुकुर तिहार है। इस दिन कुत्तों को फूलों की माला पहनाई जाती है और उनके माथे पर तिलक लगाया जाता है। उन्हें स्वादिष्ट भोजन भी खिलाया जाता है।
नेपाल की धार्मिक मान्यताओं में कुत्ते को यमराज के द्वार का रक्षक और उनका संदेशवाहक माना गया है। इसी वजह से इस दिन कुत्तों का विशेष सम्मान किया जाता है।
इस परंपरा की सबसे खूबसूरत बात यह है कि पूजा केवल पालतू कुत्तों तक सीमित नहीं रहती। सड़कों पर रहने वाले आवारा कुत्तों को भी माला पहनाकर और भोजन देकर सम्मानित किया जाता है।
इसके जरिए इंसान और कुत्ते के बीच सदियों पुराने रिश्ते, वफादारी और सुरक्षा के भाव को महत्व दिया जाता है।
यम पंचक के दौरान गाय की पूजा का भी विशेष स्थान है। नेपाल में गाय को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि गाई तिहार के दिन गायों को फूलों की माला पहनाई जाती है, माथे पर तिलक लगाया जाता है और उन्हें हरा चारा तथा अन्य पसंदीदा भोजन दिया जाता है।
गाय को हिंदू धर्म में पवित्रता, पोषण और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इस परंपरा को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और पशुधन के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर भी माना जाता है।
गाय की पूजा के बाद तिहार में लक्ष्मी पूजा की परंपरा भी निभाई जाती है। घरों को दीपों और रंगीन रोशनी से सजाकर माता लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है।
ध्यान दें: नेपाल के 2026 कैलेंडर में लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर और गाई तिहार 9 नवंबर को निर्धारित है। दोनों परंपराएं तिहार के अलग-अलग दिनों में निभाई जाएंगी।
यम पंचक से जुड़ी सबसे प्रचलित धार्मिक कथा यमराज और उनकी बहन यमुना के प्रेम से संबंधित है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार यमराज अपनी बहन यमुना के घर अतिथि बनकर पहुंचे। यमुना ने पांच दिनों तक उनका आदर-सत्कार किया और पूरे प्रेम से उनकी सेवा की।
यमराज अपनी बहन के इस स्नेह से बेहद प्रसन्न हुए। उन्होंने यमुना को वरदान मांगने के लिए कहा। इस पर यमुना ने इच्छा जताई कि जो भाई इस दिन अपनी बहन से तिलक करवाए, उसे लंबी उम्र, सुख और समृद्धि प्राप्त हो।
मान्यता है कि यमराज ने उनकी यह इच्छा स्वीकार कर ली। इसी कथा को भाई टीका की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है।
नेपाल सरकार के सांस्कृतिक परिचय दस्तावेज में भी यमराज के अपनी बहन यमुना के घर पांच दिन रहने की कथा को यम पंचक नाम से जोड़ा गया है।
यम पंचक के चौथे दिन नेपाल में गोवर्धन पूजा और गोरु पूजा की जाती है। इस अवसर पर बैलों को फूलों की माला पहनाई जाती है और तिलक लगाकर भोजन कराया जाता है।
खेती-किसानी में बैलों के योगदान को देखते हुए उन्हें सम्मान देने की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।
इसी दिन नेपाल के नेवार समुदाय में म्ह पूजा भी मनाई जाती है। म्ह पूजा का अर्थ स्वयं की पूजा करना है। इस परंपरा में व्यक्ति अपने शरीर, आत्मा और जीवन के प्रति सम्मान व्यक्त करता है। यह दिन नेपाल संवत के नए साल की शुरुआत से भी जुड़ा है। साल 2026 में नेपाल संवत 1147 की शुरुआत 10 नवंबर को होगी।
यम पंचक का अंतिम दिन भाई टीका के नाम से जाना जाता है। यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते को समर्पित है।
इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर रंगीन तिलक लगाती हैं और उनकी लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की कामना करती हैं। भाई भी बहनों को उपहार देते हैं और उनके प्रति अपने प्रेम और जिम्मेदारी का भाव व्यक्त करते हैं।
नेपाल में भाई टीका के दौरान कई परिवारों में सात रंगों वाला तिलक लगाने की परंपरा भी देखने को मिलती है। इसके साथ फूलों की माला, मिठाइयां और विशेष पकवान भी अनुष्ठान का हिस्सा होते हैं।
इस तरह भाई टीका के साथ पांच दिनों तक चलने वाला यम पंचक उत्सव संपन्न होता है।