पर्शिया से ईरान बनने की कहानी : मिडिल ईस्ट में आजकल तनाव छिड़ा हुआ है। युद्ध का दौर शुरू हो चुका है। परंतु क्या आप जानते हैं कि मिडिल ईस्ट का ईरान कभी पर्शिया कहलाता था। 20वीं सदी में यह मिडल ईस्ट का सबसे आधुनिक और प्रगतिशील देश था। आज सख्त इस्लामी शासन वाला ईरान कभी फैशन, फिल्म, शिक्षा और महिला स्वतंत्रता के मामले में यूरोपियन देशों की बराबरी करता था। फिर आखिर ऐसा क्या हुआ कि पर्शिया बदलकर इस्लामी गणराज्य बन गया? पर्शिया से ईरान बनने की कहानी आखिर क्या है? क्यों यहाँ 1महिलाओं की आजादी छीन ली गई?

प्राचीन पर्शिया की गौरवशाली सभ्यता और पर्शिया से ईरान बनने की कहानी
ईरान का असली नाम पर्शिया था। यह दुनिया की सबसे पुरानी और प्रभावशाली सभ्यताओं में से एक था। 550 ईसा पूर्व में साइरस ने इस साम्राज्य की स्थापना की थी जिसे आकेमेनिड साम्राज्य भी कहा जाता है। यह एशिया यूरोप और अफ्रीका तक फैला था। पर्शिया कला, वास्तु कला, प्रशासन और साहित्य के लिए दुनिया भर में मशहूर था। यहां ज़ोरोस्ररनिस्म (Zoroastrianism) का पालन किया जाता था. पर्शियन संस्कृति अपने संगीत, कविता, लिटरेचर के लिए काफी प्रसिद्ध थी। यहां रहने वाले लोगों को हम पारसी नाम से जानते हैं जो आज दुनिया भर में फैले हुए हैं, इन्हें पर्शिया छोड़कर जाना पड़ा। एक समय था जब पर्शिया धार्मिक सहिष्णुता और बेहतर प्रशासन के लिए जाना जाता था।
कैसे हुआ इस्लाम का आगमन और बदल गई पहचान
7 वीं सदी में अरब मुस्लिम सेनाओं ने पर्शिया पर आक्रमण किया। धीरे-धीरे यहां इस्लाम फैलने लगातार। कुछ लोगों ने डर के मारे मुस्लिम बनना स्वीकार कर लिया। कुछ लोग पलायन कर गए। सबसे खास बात यह रही कि ईरान में शिया इस्लाम का वर्चस्व फैल गया और आज भी यही ईरान की धार्मिक पहचान है। ईरान में पूरी तरह से इस्लामी संस्कृति फैल गई।
हालांकि पर्शिया से ईरान बनने की कहानी काफी दिलचस्प है। पर्शिया को ईरान नाम वहां के राजा मोहम्मद राजा शाह पहलवी ने दिया। ईरान का अर्थ होता है ‘आर्यों की भूमि’ और इसीलिए पर्शिया को कालांतर में ईरान कहां जाने लगा। और वहां जन्मे लोगों को ईरानी समुदाय का नाम दिया जाने लगा। ईरान एक समय पर इतना मॉडर्न था कि वहां महिलाएं डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर बन रही थी। वहां महिलाओं को वोट देने का अधिकार था। महिलाएं स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ रही थी। लेकिन इस्लामी क्रांति आने के बाद तानाशाही बढ़ती गई और महिलाओं की आजादी छीन ली गई।
1979 की इस्लामिक क्रांति
1979 में पर्शिया में काफी विरोध प्रदर्शन हुआ जिसके बाद वहां धार्मिक नेता आयातुला रूहोलल्लाह खोमैनी ने नेतृत्व किया और ईरान को इस्लामी गणराज्य घोषित कर दिया गया। जैसे ही ईरान इस्लामिक रिपब्लिक बना यहां पर शरिया कानून लागू माना जाने लगा। महिलाओं से उनकी आजादी छीन ली गई। इस्लामी शासन आने के बाद कई नियम बदले गए। हिजाब अनिवार्य कर दिया गया। पारिवारिक कानून में बदलाव हुए।
तलाक और अन्य अधिकारों में पुरुषों को प्राथमिकता मिली। सांस्कृतिक गतिविधियों पर रोक लगा दी गई। मीडिया पर नियंत्रण कर दिया गया। हालांकि आज भी ईरान में महिलाएं विभिन्न पेशों में सक्रिय है लेकिन उनकी स्वतंत्रता पहले जैसी नहीं रही। पिछले कुछ वर्षों में हिजाब नियमों के खिलाफ प्रदर्शन भी हुआ लेकिन इसके चलते उन्हें कड़ी सजा का भी सामना करना।
मिडिल ईस्ट का सबसे आधुनिक देश कहा जाने वाला पर्शिया पारसी लोगों की भूमि थी। लेकिन पर्शिया से ईरान बनने की कहानी के बाद धीरे-धीरे यह इस्लाम रीपब्लिक में बदल गया। वहां रहने वाले पारसियों को अपनी भूमि छोड़कर अलग-अलग जगहों पर जाना पड़ा। कुछ जाने पहचाने पारसी नाम जिन्हें हम जानते हैं जैसे कि जमशेदजी नौरोजी टाटा, रतन टाटा, जॉन अब्राहम, बोमन ईरानी यह सब ईरान की भूमि से जुड़े हुए हैं जिनका असली राज्य पर्शिया है।
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