लड़कों का शादीशुदा महिलाओं के प्रति आकर्षण: अक्सर आपने अपने आसपास मजाक में ही सही यह बात जरूर सुनी होगी कि लड़के भाभियों की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं। लेकिन यह बात मजाक या हल्की-फुल्की नहीं, इसके पीछे मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारण छुपे हैं। जी हां सोशल मीडिया से लेकर कई अलग-अलग प्लेटफार्म पर कम उम्र की लड़के और शादीशुदा महिलाओं के रिलेशनशिप और लड़कों का शादी-शुदा महिलाओं पर आकर्षण की चर्चा देखने को जरूर मिलती है। यहां तक की एडल्ट फिल्म इंडस्ट्री में भी शादीशुदा महिलाएं और छोटी उम्र के लड़कों के बीच के संबंध सबसे ज्यादा वायरल होते हैं।
यह कोई बनावटी या झूठी कहानी नहीं, इसके पीछे गहरा मनोवैज्ञानिक कारण है। यह आकर्षण अचानक नहीं है बल्कि यह एक इंसानी व्यवहार है जो असल में अनुभव और भावनात्मक जरूरतवका ही रूप है और आजकल यह ट्रेंड काफी चल पड़ा है। क्योंकि कम उम्र के लड़कों का शादी-शुदा महिलाओं पर आकर्षण और भाभियों की तरफ खिंचाव ज्यादा दिखाई दे रहा है। जिसकी वजह से समाज में भी हलचल मच चुकी है। और अब लोग यही जानना चाहते हैं कि आखिर क्यों लड़को को शादीशुदा महिलाएं और भाभियां ज्यादा आकर्षित करती हैं?
क्यों लड़कों का शादी-शुदा महिलाओं पर आकर्षण बढ़ता जा रहा है? रिलेशनशिप एक्सपर्ट का क्या है कहना?
मैच्योरिटी और समाज का आकर्षण: रिलेशनशिप एक्सपर्ट के अनुसार शादीशुदा महिलाएं कुंवारी लड़कियों की तुलना में काफी समझदार और इमोशनली मेच्योर होती हैं। वह रिश्तो को बेहतर तरीके से संभालता जानती हैं। ड्रामा कम करती है उन्हें उम्मीदें कम होती हैं। वे लड़कों के साथ आसानी से बातचीत करती हैं और लड़कों को उनके साथ बात करना सुकून भरा लगता है। जिससे कम उम्र के लड़के अपनी बात आसानी से शादीशुदा महिलाओं के सामने रख पाते हैं और उन्हें इमोशनल सिक्योरिटी मिलती है।
केयरिंग नेचर और अपनापन: शादीशुदा महिलाएं और भाभियां काफी केयरिंग और अपनेपन से भरी हुई होती हैं। वह छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखती है जिसकी वजह से लड़के भावनात्मक कनेक्शन महसूस करते हैं। कई एक्सपर्ट मानते हैं कि केयर और अटेंशन ही आकर्षण का सबसे बड़ा कारण बनता है। क्योंकि लड़कों को कुंवारी लड़कियों को अटेंशन देना पड़ता है पर जब उन्हें इस केस में खुद अटेंशन मिलता है तो उन्हें महिलाओं के प्रति ज्यादा आकर्षण होता है।
कॉन्फिडेंस और क्लियर पर्सनालिटी’: शादीशुदा महिलाएं शादी के बाद जान जाती है कि उन्हें क्या चाहिए और क्या नहीं? उनका कॉन्फिडेंस बढ़ जाता है। उनकी पर्सनैलिटी ज्यादा बेहतर हो जाती है और उनकी यही सोच छोटी उम्र के लड़कों को प्रभावित करती है। एक्सपर्ट की माने तो आत्मविश्वास रिश्ते में सबसे बड़ा आकर्षक गुण होता है और शादीशुदा महिलाओं में यह कूट-कूट कर भर जाता है। क्योंकि वह अब सब कुछ संभालना सीख जाती है।
शारीरिक बनावट और उभार: कुंवारी लड़कियों की शारीरिक बनावट काफी स्लिक और नाजुक सी होती है। कुंवारी लड़कियों का शरीर भी भरा और कर्वी नहीं होता। वही शादीशुदा महिलाओं और भाभियों का शरीर शादी के बाद सुगढ़ और उभार वाला हो जाता है। कई महिलाओं में शादी के बाद कर्व से पहले से ज्यादा बेहतर हो जाते हैं और लड़कों को यह सब काफी आकर्षित करता है। इसलिए कम उम्र के लड़कों का शादी-शुदा महिलाओं पर आकर्षण होने लगता है। और सबसे बड़ी शादी शुदा महिलाएं कुंवारी लड़कियों की तरह अपनी बॉडी को लेकर इनसिक्योर नहीं होती, इसीलिए लड़कों को उनका यह कॉन्फिडेंस भी पसंद आता है।
कम ड्रामा वाला एटीट्यूड: शादीशुदा महिलाएं इमोशनल उतार चढ़ाव देख चुकी होती हैं। वह अब स्थिर और शांत हो जाती है। ऐसे में उनके बिहेवियर में नो ड्रामा एटीट्यूड शामिल हो जाता है और कम उम्र के लड़कों को यही सभा आकर्षित करता है। वही रिलेशनशिप साइकोलॉजी में एक कॉन्सेप्ट होता है जो ना मिल सके उस पर आकर्षक ज्यादा होता है। शादीशुदा महिलाएं पहले से ही रिश्ते में होती है। लड़कों को पता होता है कि यह टारगेट मुश्किल है इसलिए उनका आकर्षण और ज्यादा बढ़ जाता है।
रिलेशनशिप एक्सपर्ट के माने तो लड़कों का शादी-शुदा महिलाओं पर आकर्षण काफी कॉमन और नेचुरल है। लेकिन इसे हैंडल करना बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। क्योंकि सामाजिक दृष्टि से देखें तो शादीशुदा महिलाओं के साथ छोटे लड़कों का संबंध समाज कई स्वीकार नहीं करता। वही इससे महिलाओं की जिंदगी और पर्सनल लाइफ पर भी विपरीत प्रभाव देखा जा सकता है। इसके अलावा कम उम्र के लड़कों की मानसिक स्थिति पर भी बुरा असर पड़ता है। ऐसे में रिश्तों को बचाने और मेंटल हेल्थ को बेहतर रखने के लिए इस प्रकार के आकर्षण को कंट्रोल करना सबसे ज्यादा जरूरी है।
कुल मिलाकर कम उम्र के लड़कों का शादी-शुदा महिलाओं पर आकर्षण या भाभियों की तरफ अट्रेजशन होना मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारणों से भरा हुआ है। लेकिन समझदारी इसी में है कि इस आकर्षण को सही समय पर संभाल लिया जाए और रिश्तो की मर्यादा बनाकर रखी जाए। अन्यथा पर्सनल लाइफ से लेकर सामाजिक उथल-पुथल मचना तय होता है।

















